नास्तिक होने का अर्थ…- 27 जून 2013

दर्शनशास्त्र

नास्तिक किसी अलौकिक शक्तियों पर विश्वास नहीं करते। इसके विपरीत वे स्वयं पर भरोसा करते हैं।

नास्तिक नर्क जाने के डर से बुरे कामों को करने से नहीं बचते बल्कि इसलिए उनसे दूर रहते हैं कि वे बुरे काम हैं।

नास्तिक अपने स्वर्गारोहण के उद्देश्य से अच्छे काम नहीं करते बल्कि चैरिटी और दूसरों की भलाई के लिए करते हैं।

नास्तिक उन पुस्तकों पर आँख मूंदकर भरोसा नहीं करते जो हजारों साल पहले लिखी गईं बल्कि स्वतंत्रतापूर्वक अपने दिमाग से सोचते हैं।

नास्तिक अपने कार्यों की जवाबदारी किसी गुरु, धर्म या ईश्वर पर नहीं डालते बल्कि उसे खुद उठाते हैं।

नास्तिक धर्म या धार्मिक संस्थाओं के आदेशों का पालन नहीं करते बल्कि वैज्ञानिक जानकारियों, अनुभवों और सहज बुद्धि से अपने निर्णय लेते हैं।

नास्तिक पूजा करते हुए ईश्वर को रिश्वत नहीं चढ़ाते बल्कि अपनी क्षमताओं पर भरोसा करते हुए आत्मविश्वास के साथ वही करते हैं जो वे करना चाहते हैं।

नास्तिक उन बातों के लिए अपराधबोध से ग्रसित नहीं होते जो उन्होंने नहीं की हैं या उनके काबू में नहीं हैं बल्कि अपने कर्मों या गलत निर्णयों के परिणामों को भुगतने के लिए तैयार रहते हैं।

नास्तिक किसी मिथकीय, रहस्यमय शक्ति या जीवों से नहीं डरते बल्कि भौतिक नियमों से परिचालित क्रमिक विकास के परणामस्वरूप अस्तित्व में आई प्रजातियों की विविधता को देखकर प्रसन्न और चमत्कृत होते हैं।

नास्तिक आपसे चंदा नहीं मांगते कि उसके बदले वे आपको जीवन में खुशी और मृत्यु के बाद स्वर्ग प्रदान करने में सहायक होंगे।

नास्तिक अंधविश्वासी नहीं होते।

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