यहाँ सब कुछ आभासी नहीं है: जब सोशल मीडिया मित्रों को वास्तविक जीवन में एक-दूसरे से मिलवाता है! 16 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सोशल मीडिया के ज़रिए उन्हें अपने जीवन में कई तरह के लाभ प्राप्त हुए, जिनमें नए-नए दोस्तों का उनके वास्तविक जीवन में प्रवेश सर्वप्रमुख है।

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ऑनलाइन संसार – कितना झूठा, कितना सच्चा? 15 दिसंबर 2015

सोशल मीडिया के बारे में लिखते हुए स्वामी बालेंदु आगाह कर रहे हैं कि ऑनलाइन पढ़ी, देखी या साझा की गई हर सामग्री पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

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भरोसा करना अच्छी बात है – मगर अपने शक पर भी भरोसा करें – 16 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु उन बेईमान लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो आपसे उन पर विश्वास करने की गुज़ारिश करते हैं-लेकिन सवाल यह है कि आपको कैसे पता चले कि उनके विषय में आपका शक सही हैं या नहीं!

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आस्था आपको पशुओं का मल-मूत्र भी खिला पिला सकती है – 8 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह भारत में इस समय गोमूत्र, गोबर और उनसे तैयार सामानों की धूम मची हुई है।

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आध्यत्मिक मूर्खता, जिसका दावा है कि सी-सेक्शन माँ और बच्चे के बीच के लगाव को बाधित करता है – 12 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु आध्यात्मिक और रहस्यवादियों की ओर से आए प्राकृतिक प्रसव का प्रसार करने वाले एक वक्तव्य के बारे में बता रहे हैं, जिसके अनुसार सी-सेक्शन माँ और बच्चे के मध्य प्रेम को बाधा पहुँचाता है, जबकि उनका यह अतिवादी दावा अप्रिय स्थिति भी पैदा कर सकता है।

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जब आस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश में होने वाली धोखेबाज़ी ने मुझे आश्चर्यचकित किया! 23 नवंबर 2014

स्वामी बालेंदु अपने एक मित्र के बारे में बता रहे हैं, जो जल्द से जल्द पैसा कमाने के चक्कर में एक कपटपूर्ण स्कीम में पैसा लगाकर धोखा खा गए।

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भारत के निजी स्कूल किस तरह शिक्षा को भ्रष्ट व्यापार में तब्दील किए दे रहे हैं! – 26 मार्च 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे भारत के निजी स्कूल अनाप-शनाप फीस और चंदे के रूप में वसूले जा रहे बेनामी रुपयों से अपनी झोली भरते चले जा रहे हैं.

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वास्तविक पढ़ाई के लिए स्कूल जाना – हमारे स्कूल के बच्चे – 7 फरवरी 2014

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के अखिल नामक एक बच्चे से आपका परिचय करवा रहे हैं। उसकी बड़ी बहन घर में सिलाई का काम करती है, जिससे परिवार का खर्च चलाने में थोड़ी-बहुत मदद हो सके।

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विदेशी पर्यटकों के साथ अंतरंगता तब तक ही अच्छी है जब तक उसमें कोई धोखेबाजी निहित न हो! 22 दिसंबर 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे बहुत से लोग अपनी यात्राओं में अंतरंग संबंध बना लेते हैं और इस बात की चिंता नहीं करते कि घर में उनकी पत्नी और बच्चे उनकी बात जोह रहे हैं!

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ध्यान में विचारशून्यता की बात महज भ्रम है या व्यापार कौशल! 11 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि उनके अनुसार जनसाधारण में प्रचारित ध्यान का ‘लक्ष्य’ अर्थात सम्पूर्ण विचारशून्यता, एक बकवास बात है!

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