भारतीय क्यों सोचते हैं कि बच्चों को अपने अभिभावकों से डरना चाहिए? 8 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे स्कूली किताबें डरा-धमकाकर बच्चों का लालन-पालन करने की भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित करती हैं, विशेष रूप से पिता से डरकर रहने की संस्कृति को।

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आपके हवाई जहाज़ पर एक बच्चा रो रहा है? क्या करना चाहिए और क्या नहीं? 17 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु एक ऐसी स्थिति के बारे में लिख रहे हैं, जिससे हर हवाई यात्री घबराता है: आपके हवाई जहाज़ पर बहुत से बच्चे भी यात्रा कर रहे हैं और उनमें से कम से कम एक बेतहाशा रो-चीख रहा है! क्या किया जाए?

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कुछ बच्चे पढ़ने में कमज़ोर होते हैं लेकिन मार-पिटाई से उनमें कोई परिवर्तन नहीं होगा! 24 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि आपका कर्तव्य बच्चों को बेहतर इंसान बनाना है न कि उन्हें अधिक से अधिक जानकारियाँ कंठस्थ करवाना और इस मामले में भी हिंसा आपकी कोई मदद नहीं कर सकती!

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हर चाँटा आपके बच्चे को थोड़ा सा और तोड़ देता है! 23 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि भारतीय समाज में बच्चों के प्रति हिंसा किस तरह जड़ जमाए बैठी है और दुनिया भर के अभिभावकों और शिक्षकों से अनुरोध कर रहे हैं कि अपने बच्चों के साथ वे ज़रा सी भी हिंसा का इस्तेमाल न करें!

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भारतीय स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाली क्रूरतापूर्वक शारीरिक प्रताड़ना का वीडियो सहित पर्दाफाश – 18 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु इस ब्लॉग के ज़रिए पवन के स्कूल में दिए जा रहे शारीरिक दंड की सूचना पाठकों तक पहुँचा रहे हैं। नीचे दिए गए वीडियो को देखें, जिसमें क्रूरतापूर्वक बच्चों की पिटाई की जा रही है और जो भारतीय स्कूलों में रोज़मर्रा की बात है!

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बात करने के लिए कभी-कभी आपको किसी दूरस्थ मित्र की ज़रूरत पड़ती है – 8 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने एक मित्र का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसने बात करने के लिए उन्हें फोन किया क्योंकि अपने आसपास के लोगों से वह बात नहीं कर पा रहा था! उसकी समस्या क्या थी, यहाँ पढ़िए।

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अपने बच्चों के सामने दूसरे बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करें – 18 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे आपका अपना बच्चा आपके लिए हमेशा ख़ास रहेगा-लेकिन आपको दूसरे बच्चों को भी उसके जैसा ही समझना चाहिए!

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एक बच्चे की आँख से दुनिया को देखें और अपना तनाव शांत करें – 17 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे ज़्यादा से ज़्यादा बच्चे बनकर वे चिंतामुक्त रह सकते हैं और जीवन का आनंद ले सकते हैं। कैसे अपना नजरिया बदलें? कुछ टिप्स यहाँ पढ़ें।

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कैसे सतत मार्गदर्शन बच्चों के विकास में बाधा पहुँचाता है – 11 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे बच्चों को बार-बार टोकना कि यह करो, वह मत करो और उन्हें पूरी तरह आज़ाद (छुट्टा) छोड़ देना, दोनों ही उचित नहीं है। बच्चों के लालन-पालन संबंधी प्रश्नों की विवेचना यहाँ पढ़िए।

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अपनी साढ़े तीन साल की बच्ची, अपरा के बगैर पहली बार माँ और पा – 14 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि जब उनकी बेटी तीन दिन के लिए उन्हें छोड़कर गई तब वे और उनकी पत्नी कैसा महसूस कर रहे थे।

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