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गरीबों को सिर्फ निम्न स्तरीय शिक्षा ही नसीब हो सकती है – हमारे स्कूल के बच्चे – 23 अक्टूबर 2015

परोपकार

स्वामी बालेन्दु अपने स्कूल के दो बच्चों से आपका परिचय करवा रहे हैं, जिनके अभिभावक अपने सबसे बड़े बेटे को सिर्फ एक सस्ते निजी स्कूल में पढ़ाने की हैसियत रखते हैं-और वहाँ वह आज तक ज़्यादा कुछ नहीं सीख पाया!

भारत में शिक्षा व्यवसाय को बंद कराने में अम्माजी’ज़ आयुर्वेदिक रेस्तराँ किस तरह सहायक होगा? 21 मई 2015

विद्यालय

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि क्यों वे सोचते हैं कि धनी और गरीब दोनों वर्गों से आने वाले बच्चों को अच्छी, स्तरीय निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के अपने स्वप्न को साकार करने में वे सफल होंगे!

धनवान और गरीब सभी के लिए एक जैसी उच्च स्तरीय मुफ्त शिक्षा का सपना – 20 मई 2015

विद्यालय

स्वामी बालेंदु अपने इस स्वप्न का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसके अनुसार वे एक ऐसा स्कूल खड़ा करना चाहते हैं, जो धनी और गरीब सभी बच्चों को बढ़िया से बढ़िया शिक्षा मुफ्त मुहैया करेगा! यह योजना कैसे काम करेगी, यहाँ पढ़िए!

ईश्वर के बगैर बच्चों का लालन-पालन करना – 24 फ़रवरी 2015

पालन पोषण

अपरा की उपस्थिति में रमोना और उनके आश्रम के एक बच्चे के बीच ईश्वर, पाप और झूठ आदि बातों पर एक रोचक संवाद हुआ, जिसे स्वामी बालेन्दु अपने पाठकों के सामने रख रहे हैं।

एक घर, चार कमरे, चार परिवार – हमारे स्कूल के बच्चे – 14 नवंबर 2014

परोपकार

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों का परिचय अपने स्कूल के दो बच्चों से करवा रहे हैं: प्रिया और हिमांशु। उनका, उनके परिवार का और उनके घर का हालचाल जानने के लिए पढ़ें, यह ब्लॉग।

मालाएँ बेचकर इतनी कमाई नहीं होती कि स्कूल की फीस भरी जा सके – हमारे स्कूल के बच्चे – 7 नवंबर 2014

परोपकार

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के दो बच्चों से पाठकों का परिचय करवा रहे हैं, जिनके अभिभावक अब किसी दूसरे स्कूल की फीस अदा करने में असमर्थ हो चुके हैं।

फ्लैट स्क्रीन टीवी तो है मगर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए पैसा नहीं – हमारे स्कूल के बच्चे – 3 अक्टूबर 2014

परोपकार

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों से अपने स्कूल के एक बच्चे का परिचय करवा रहे हैं, जो परिवार में पैसे की किल्लत के चलते आठ साल की उम्र में पहली बार स्कूल गया है। उनके पास फ्लैट स्क्रीन टी वी कहाँ से आया, यहाँ पढ़िए।

जब आर्थिक समस्याओं के बावजूद लड़के बेहतर शिक्षा प्राप्त करते हैं – 11 जुलाई 2014

परोपकार

स्वामी बालेन्दु अपने पाठकों से अपने स्कूल के दो और बच्चों का परिचय करवा रहे हैं। उनके माता-पिता उनकी शिक्षा पर हैसियत से ज़्यादा खर्च करते हैं मगर अपनी लड़कियों को ऐसे स्कूलों में भेजते हैं जहाँ वे कुछ भी सीख नहीं सकतीं।

अभिभावकों के होते हुए क्या बच्चों का बोर्डिंग स्कूल माता-पिता की स्नेहिल छत्रछाया का विकल्प हो सकता है? 2 जून 2014

पालन पोषण

स्वामी बालेन्दु अमीर अभिभावकों के बीच पनप रहे इस चलन के बारे में बता रहे हैं, जिसमें बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए बोर्डिंग स्कूल में भर्ती किया जाता है। लेकिन एक अदेखा, अनिश्चित बेहतर भविष्य वर्तमान में माता-पिता से दूर रहने का विकल्प हो सकता है?

तापमान 48 डिग्री और एक पंखा तक नहीं – हमारे स्कूल के बच्चे – 2 मई 2014

परोपकार

स्वामी बालेंदु अपने चैरिटी स्कूल के दो गरीब बच्चों का परिचय अपने पाठकों से करवा रहे हैं। वे एक मामूली झोपड़ी में रहते हैं, जहां वृन्दावन की इस गर्मी में उनके पास पंखा तक नहीं है!

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