प्यार का कोई विलोम नहीं है – 7 सितंबर 2015

मेरे लिए प्रेम जीवन का एक प्रमुख विषय है। सदा से रहा है। वास्तव में मैं समझता हूँ कि अधिक से अधिक लोगों को अपने जीवन में प्रेम को अधिक से अधिक प्रमुखता देनी चाहिए क्योंकि उससे उन्हें लाभ हो सकता है। प्रेम पर चर्चा करने वाले लोगों यानी आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाले लोगों के प्रचार के विपरीत मैं यह मानता हूँ कि प्रेम का विलोम कुछ भी नहीं है। ऐसी कोई विपरीत भावना नहीं है, जिसका अस्तित्व प्रेम की उपस्थिति में असंभव हो।

परस्पर विरोधी चीज़ें एक साथ नहीं रह सकतीं, ठीक? कोई व्यक्ति एक साथ लंबा और ठिगना नहीं हो सकता। तापमान एक साथ ठंडा और गरम नहीं हो सकता। आपके बाल एक साथ लंबे और छोटे नहीं हो सकते। इसी तरह लोग सोचते हैं कि घृणा या डर भी प्रेम के विलोम हैं। कई लोग मुझसे कहते रहते हैं: "जहाँ प्रेम होगा वहाँ घृणा नहीं हो सकती" या अगर "आपमें प्रेम का भाव है तो फिर डर के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।" मैं नहीं समझता कि ये दोनों वक्तव्य सच हैं।

मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि प्रेम दूसरी किसी भी भावना के साथ एक साथ रह सकता है! प्रेम छल के साथ रह सकता है, वह जूनून के साथ एक साथ रह सकता है। यहाँ तक कि प्रेम का अस्तित्व नापसंदगी (अरुचि) के साथ, अज्ञान या विरक्ति के साथ भी हो सकता है।

आपने भी ऊपर उल्लिखित एहसासों (भावनाओं) को प्रेम के साथ, एक साथ मौजूद देखा होगा लेकिन आप शायद कल्पना भी नहीं कर सकते कि घृणा और डर के साथ भी प्रेम अपना सहअस्तित्व बना लेता है।

क्या आपने कभी लव-हेट रिलेशनशिप नहीं देखी? क्या आपके सामने कभी भी ऐसी परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई, जहाँ ऐसा हुआ हो कि जिससे आप प्रेम करते हैं, उसने आपका कोई अहित किया हो? भले ही यह बहुत कम समय के लिए हुआ हो लेकिन जब आप क्रोधित या अपमानित हुए तो क्या उसमें कुछ मात्रा में घृणा भी नहीं मिली हुई थी। और उस समय, क्षण भर के लिए ही सही, क्या आपने यह नहीं सोचा कि आपके बीच प्रेम नहीं रह गया है।

इसी तरह मेरा विश्वास है कि भय के साथ भी यही होता है। वह भी एक ही समय में एक साथ मौजूद हो सकता है। आप प्रेम भी कर रहे हो सकते हैं और उसी वक़्त आपको डर भी लग रहा हो सकता है कि यदि आप कुछ ज़्यादा खुलेंगे तो पता नहीं क्या हो। क्या आपको फिर बुरा लगेगा? क्या आपकी बहुमूल्य भावनाओं का गलत इस्तेमाल कर लिया जाएगा? इससे आपके प्रेम पर कोई असर नहीं होगा लेकिन आप इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि उसी वक़्त आपके मन में भय भी मौजूद था- एक साथ दोनों!

तो यह बहुत स्पष्ट है: जितनी शिद्दत से मेरा भरोसा है कि प्रेम है, उतनी ही शिद्दत से मेरा मानना है कि उसके साथ डर या घृणा भी मौजूद हो सकती है। और ये दोनों भी महज नैसर्गिक भावनाएँ हैं, जिन्हें हम अपने अस्तित्व का हिस्सा मान सकते हैं!

दिन भर के कामकाज और मेहनत के बाद क्या आप सेक्स के लिए बेहद थक जाते हैं? 10 अगस्त 2015

कुछ समय पहले मुझसे किसी ने अपनी एक व्यक्तिगत समस्या पर सलाह मांगी: दिन भर कामकाज में व्यस्त रहता था। जब घर लौटता था तो अपने काम के तनाव और श्रम के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से अत्यंत शिथिल पड़ जाता था। या तो उसके पास समय नहीं होता था या समय होता था तो इतनी शक्ति नहीं होती थी कि पत्नी के साथ सम्भोग कर सके! इसके चलते स्वाभाविक ही पत्नी असंतुष्ट रह जाती थी और दुखी रहने लगी थी। उसे क्या करना चाहिए?

सर्वप्रथम तो यह कि यह बड़ी अच्छी बात है कि आप किसी दूसरे से सलाह मांगने की ओर उद्यत हुए हैं क्योंकि समय आ गया है कि आप इस विषय में गंभीर हो जाएँ! जब आपके संबंध उस स्तर तक पहुँच जाते हैं, जहाँ शिकायतों का स्वर तीक्ष्ण होने लगता है और दोनों एक-दूसरे से अप्रसन्न रहते हैं तब आपके लिए अपनी जीवन-चर्या पर गंभीरता पूर्वक विचार करना ज़रूरी हो जाता है! अच्छा हो अगर आप उसमें कुछ बड़े परिवर्तन भी कर सकें!

दूसरे, मैं आशा करता हूँ कि सहवास-सुख की कमी सिर्फ आपकी पत्नी नहीं, बल्कि आप भी महसूस कर रहे होंगे!

जब एक बार आप विवाह कर लेते हैं तो आपके साथ हाड़ मांस का एक और प्राणी भी साथ रहने लगता है, जिसकी आपसे कुछ जायज़ अपेक्षाएँ होती हैं। यहाँ मैं आर्थिक अपेक्षाओं की बात नहीं कर रहा हूँ! और स्पष्ट कहूँ तो मैं सिर्फ भौतिक अपेक्षाओं की बात भी नहीं कर रहा हूँ! असल में यह समस्या सेक्स से संबंधित है ही नहीं। वह भावनाओं और प्रेम से संबंधित है। परस्पर प्रेम के साझेदार के रूप में आपकी पत्नी का आपके हृदय और आपके समय पर कुछ अधिकार तो है ही!

आप खुद निर्णय करें: आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है? क्या आप अपने काम के लिए जी रहे हैं या सिर्फ आजीविका के लिए काम कर रहे हैं? आपको अपना काम ज़्यादा प्रिय है या पत्नी के साथ समय बिताना?

मुझे गलत न समझें- अपने काम में भी आपको मज़ा आना चाहिए। लेकिन ज़्यादा आनंद आपको अपने परिवार या साथी के साथ समय बिताने में आना चाहिए। अगर इस तरह आप अपना दिल पत्नी के सामने नहीं खोल सकते तो आपको जीवन जीने का कोई और तरीका अख्तियार करना चाहिए था!

बहुत से लोग कहेंगे: 'मैं यह सब, इतनी कड़ी मेहनत उन्हीं के लिए कर रहा हूँ, अपने परिवार के लिए, उनके भविष्य के लिए और बच्चों के लिए!' विशेष रूप से, जब आपके बच्चे भी हैं तो आपको यह समझना चाहिए कि आप ऐसे आनंद में अपना समय नहीं गुज़ार सकते। मेरा दावा है कि अगर आप कुछ कम काम करते हैं, थोड़ा कम पैसा कमाते हैं लेकिन कुछ अधिक समय परिवार और पत्नी के साथ गुज़ारते हैं तो आपका जीवन वास्तव में बेहतर हो जाएगा!

अगर आप इसी तरह चलते रहे, अपना रवैया नहीं बदला तो आप और आपका साथी एक-दूसरे से और दूर होते चले जाएँगे। अब आपको तय करना होगा कि आप साथ रहने में और एक-दूसरे से प्रेम करने में ज़्यादा रुचि रखते हैं या अपने काम में ही रमे रहना चाहते हैं। अगर आप अपने काम को चुनते हैं और पत्नी भी किसी दूसरी बात में मन लगा लेती है, कोई ऐसी रुचि पैदा कर लेती है, जहाँ वह अपना समय बिताना चाहती है तो फिर आपके पास शिकायत का कोई कारण नहीं होना चाहिए!

अपनी पत्नी से यह अपेक्षा न करें कि वह ताजिंदगी घर की सफाई करती रहेगी, बच्चों की देखभाल करती रहेगी और आपका इंतज़ार करती रहेगी कि जब आपको समय मिलेगा तो आप आएँगे और उसके साथ समय बिताएँगे। या उसके साथ बिस्तर साझा करेंगे- हालांकि इस मामले में सेक्स सिर्फ एक निशानी है कि आप लोग आपस में कितना करीब हैं। वह सिर्फ परस्पर प्रेम का भौतिक इज़हार है! और फिलहाल आपका काम उसे धीरे-धीरे खत्म कर रहा है!

आपके लिए आवश्यक है कि दैनिक जीवन में आप अपने प्रेमीजनों के लिए समय निकालें और फिर सप्ताहांत को वास्तविक सप्ताहांत बनाएँ- परिवार के साथ कहीं छुट्टियों पर निकल जाएँ या दो दिन का समय उनके साथ कुछ अलग तरह से बिताने की कोशिश करें। सिर्फ समय न गुजारें- ज़िंदगी का लुत्फ उठाएँ!

पश्चिमी महिलाओं के साथ संबंधों के प्रति गंभीर हो रहे भारतीय पुरुषों और पश्चिमी महिलाओं के लिए कुछ टिप्स – 18 जून 2015

पिछले कुछ दिनों से मैं उन पश्चिमी महिलाओं पर ब्लॉग लिख रहा हूँ, जो भारतीय पुरुषों के साथ ऑनलाइन चैटिंग करने के बाद उनके प्रेम में लिप्त हो जाती हैं और फिर उनसे मिलने भारत चली आती हैं। इसी सन्दर्भ में एक ब्लॉग मैंने उन पुरुषों के बारे में भी लिखा था, जो समय काटने के लिए चैटिंग करते हैं और उसी ब्लॉग में मैंने एक स्थान पर ज़िक्र किया था कि अलग-अलग लोगों के साथ परिस्थितियाँ अलग-अलग हो सकती हैं। जैसे, एक क्षीण सी संभावना हो सकती है कि कोई भारतीय पुरुष इस मामले में वाकई गंभीर हो। आज का ब्लॉग मैंने इसी संभावना पर चर्चा करने के लिए सुरक्षित किया है- इस विषय पर अपने कुछ विचार, कुछ टिप्पणियाँ, जिन्हें आपको, इस रास्ते पर आगे कदम रखते हुए, याद रखना चाहिए।

सबसे पहले तो आप दोनों को बधाई कि इतनी भौगोलिक दूरी के बावजूद सिर्फ आधुनिक मीडिया की बदौलत आपको अपना मनपसंद साथी और प्रियकर मिल गया है! मैं आप दोनों के दीर्घकालीन और सुखी सहजीवन के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ। लेकिन साथ ही मैं चाहता हूँ कि पूरी गंभीरता के साथ वचनबद्ध होने से पहले आप अपने आपको तैयार कर लें। पुनः मैं कहना चाहता हूँ कि मेरे ये विचार उन लोगों के साथ मेरे वार्तालाप और अनुभवों का नतीजा हैं, जो ऐसी परिस्थितियों से गुज़र चुके हैं या ऐसे दंपतियों के साथ, जो भिन्न-भिन्न देशों और संस्कृतियों से संबंध रखते हैं।

जिस व्यक्ति को आप उसके लिखे शब्दों से या फोन पर बात करके और वीडियो संवाद के ज़रिए जानते हैं, पूरी संभावना है कि उसका सोचने का तरीका आपसे पूरी तरह भिन्न हो। निश्चित ही, आपके देश के भी सारे पुरुष और सारी महिलाएँ अलग-अलग व्यक्तित्व रखते हैं लेकिन यहाँ हम संस्कृतियों के बीच की गहरी खाई को भी उसमें जोड़ रहे हैं। और तब, आपके जीवन में पदार्पण करने वाले इस व्यक्ति को अपने जीवन में पूरी तरह समाहित कर लेना या पराए देश में रहकर अपने आपको पूरी तरह उसके जीवन में विलीन कर लेना आसान नहीं होगा। ऐसी-ऐसी दिक्कतें पेश आएँगी, जिनकी अभी, जब कि आपके जीवन की शुरुआत होने ही जा रही है, आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इसीलिए मैं आपसे कुछ तैयारियाँ करने की गुजारिश कर रहा हूँ, जिससे ये मामले विशाल समस्याओं का रूप न ले लें।

किसी भी रूप में हो, ऑनलाइन संवाद एक बात है और वास्तव में दूसरे के साथ रहना, भौतिक रूप से एक छोटे से इलाके में, सीमित विस्तार और सीमाबद्ध वातावरण में एक साथ रहना बिल्कुल दूसरी बात है। हम समझ सकते हैं कि किसलिए ये पश्चिमी महिलाएँ यहाँ आती हैं और यहाँ आकर क्या जानने की कोशिश करती हैं: आपको दोनों में से एक देश में जाकर आपस में मिलना होगा और व्यक्तिगत रूप से मिलकर एक-दूसरे के व्यक्तित्व को जानना-समझना होगा!

दोनों में से कोई एक देश चुनें- लेकिन वीजा की पाबंदियों के कारण भारतीय पुरुषों के लिए पश्चिमी देशों की यात्रा के मुकाबले वहाँ की महिलाओं के लिए भारत की यात्रा करना आसान है। आप कोई अच्छी जगह चुन सकते हैं, जो स्वाभाविक ही व्यक्तिगत रुचि और आपकी परिस्थितियों पर निर्भर है। भारत के किसी अलग कोने में कोई जगह, जिसे एक तटस्थ स्थान कहा जा सके, बात करने के लिए बढ़िया जगह हो सकती है। महिला एक संयुक्त परिवार के घरेलू अनुभवों और झंझटों से विचलित होना नहीं चाहेगी और भारतीय पुरुष भी इससे बचना चाहेगा क्योंकि वह भी नहीं चाहेगा कि उसके परिवार में इसका अन्यथा अर्थ निकाला जाए।

आपको बार-बार और लगातार बात करते रहना होगा, जिससे चीज़े साफ़ हो सकें। विस्तार में जाने में ज़रा भी न हिचकिचाएँ और दूसरों की देखादेखी सिर्फ यही न पूछते रहें: 'तुम्हें यह अच्छा लगा?', 'तुम्हें वह कैसा लगा?' आदि। स्पष्ट बात करें कि आपकी क्या अपेक्षाएँ हैं, क्या अनिवार्य है और आप किन चीजों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकते!

महिलाओं, भारत के बारे में आपके मन में जो भी पूर्वाग्रह हैं, सुनी-सुनाई बातें हैं, उन्हें साफ-साफ दूसरे के सामने रखें। उनमें से बहुत सी बातें सही हैं और आपके होने वाले जीवन साथी को चाहिए कि उनके बारे अपने विचार स्पष्ट करे, जिससे आप जान सकें कि उनमें खतरे के निशान तो नहीं हैं कि समय रहते अपने पैर पीछे खींच लिए जाएँ!

पुरुषों, पश्चिमी महिलाओं के साथ आप भी वही करें जो आपने उनके बारे में सुना है, उनकी जीवन चर्या और उनकी पसंद-नापसंद। वह सब पूछें जो आप हमेशा से पूछना चाहते थे और कुछ भी न छोड़ें-अगर आप चाहते हैं कि आप अपनी होने वाली जीवन साथी को सदा प्यार करते रहें तो उसके बारे में आपको पहले से सब कुछ जानना होगा!

मैं चाहूँगा कि आप किसी एक विशेष बिन्दु पर पहुँचें जो उभयनिष्ठ हो, कि आपके बीच प्रेम के अलावा भी अधिकतर बातें समान हों, अनुकूल हों। और यह भी कि याद रखें, एक शानदार संबंध की यह सिर्फ शुरुआत है!

मुझे इस विषय में लोगों की बहुत रुचि नज़र आई इसलिए मैं इससे संबन्धित कुछ और विषयों और प्रश्नों को, जिन पर आपको भी खुलकर चर्चा करनी चाहिए, अपने ब्लॉग का विषय बनाते हुए और अधिक विस्तार से लिखूँगा।

यदि आप पश्चिमी महिलाओं के साथ ऑनलाइन सेक्स चैट करने वाले भारतीय पुरुष हैं तो इसे अवश्य पढ़ें! 17 जून 2015

पश्चिमी महिलाओं की निराशा हमने अपनी आँखों से देखी है और उनके मुख से उनकी दास्तान सुनी है। उनकी निराशाजनक परिस्थितियों के बारे में मैं पिछले ब्लॉगों में आपको बता चुका हूँ। यह भी कि किस तरह वे भारतीय पुरुषों के साथ ऑनलाइन चैट करती हैं, उनके प्रेम में लिप्त हो जाती हैं, उनसे मिलने इतनी दूर भारत चली आती हैं। पिछले दो दिनों से मेरे शब्दों का रुख इन महिलाओं की ओर था लेकिन आज मैं यह ब्लॉग भारतीय पुरुषों के बारे में लिखना चाहता हूँ, जो इन परिस्थितियों की जड़ हैं।

मैं एक बार फिर स्पष्ट कर दूँ कि मेरे शब्द उन महिलाओं के अनुभवों पर आधारित हैं, जो ऐसी परिस्थिति से दो-चार हुईं और जिन्होंने यहाँ आकर अपनी दास्तानें हमें सुनाई हैं।

मेरे प्रिय भारतीय मित्रों, मुझे इस बात से कतई कोई एतराज़ नहीं होगा अगर आप मेरे मित्रों से सोशल नेटवर्क पर संपर्क करते हैं। अगर वे आपको जवाब देते हैं और आपके बीच मित्रता हो जाती है, चर्चाएँ होने लगती हैं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता है तो मैं आप दोनों के लिए बड़ा खुश होऊँगा, बधाई दूँगा! लेकिन याद रखिए, इस बात की पूरी संभावना है कि जिस महिला के साथ आप इस तरह की चर्चा कर रहे हैं, मुझसे संपर्क करके मुझसे आपके बारे में पूछे और आपके बीच होने वाली बातों की चर्चा भी करे।

अगर उसके बाद मुझे पता चलता है कि आप उनके साथ इश्कबाज़ी कर रहे हैं और वे अब आप से मिलने के लिए भारत आने का विचार कर रही हैं तो मैं उनसे सतर्क रहने की गुज़ारिश अवश्य करूँगा, जैसा कि मैं अपने पिछले दो ब्लॉगों में बता चुका हूँ। क्योंकि मैं जानता हूँ कि वे इस संबंध को लेकर बहुत गंभीर हैं जबकि हो सकता है कि आप इस बारे में गंभीर न हों।

मैं इस बात को बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहता हूँ: वास्तव में यह महिला इंटरनेट पर एक ऐसे व्यक्ति से प्रेम कर बैठी है, जो बहुत दूर बैठा है, जिसे वह बिल्कुल नहीं जानती और वह व्यक्ति आप हैं! आप जो कुछ भी उससे कह रहे हैं, उस पर और आपकी चिकनी-चुपड़ी बातों पर वह ईमानदारी से विश्वास कर रही है। मैं हमेशा प्रेम के खुले इज़हार के पक्ष में रहा हूँ और सभी को इस बात की स्वतंत्रता है कि वह अपनी मर्ज़ी से अपनी राह चुनें और अपने जीवन साथी की खोज करें- लेकिन वह आपके प्रेम में लिप्त हो गई है और मुझे संदेह है कि आप खुद अपने शब्दों को लेकर उतने गंभीर नहीं हैं जितनी कि वह है!

आप किसी की भावनाओं के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों करते हैं? हो सकता है, आप वास्तव में न जानते हों कि सामने वाला आपकी मज़ाकिया छेड़छाड़, लटकों-झटकों और इश्कबाज़ी को गंभीरता से ले रहा है। हो सकता है, आप समझ रहे हों कि ऐसी ऑनलाइन बातें वह आप जैसे दस और लोगों के साथ कर रही होगी, जैसा कि आप स्वयं दस और महिलाओं के साथ कर रहे हैं। यह भी हो सकता है कि किसी भारतीय महिला के साथ आपका अनुभव रहा हो कि World Wide Web पर उसने भी आपसे गुमनाम रहकर बातें तो की थीं लेकिन उसका कोई गंभीर नतीजा नहीं निकला था। आप लोग सिर्फ मज़ाकिया छेड़छाड़ करते रहे, इस बात का मज़ा लेते रहे कि आप दोनों, इंटरनेट पर ही सही, इतने खुले मन से आपस में सेक्स की बातें कर पा रहे हैं। सच बात तो यह है कि भारत में आप सेक्स के बारे में बात नहीं कर पाते, वास्तविक सेक्स तो कर ही नहीं पाते क्योंकि ऐसा करना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। न तो आपने, न उस लड़की ने भी सोचा होगा कि कभी आपकी मुलाक़ात हो सकती है। भले ही आपने आपस में संभोग करने का सपना तक देख डाला हो!

मैं आपको एक बात बताना चाहता हूँ: एक पश्चिमी महिला के लिए यह सब पूरी तरह भिन्न होता है। उसकी संस्कृति अलग है। वह बिल्कुल दूसरी तरह से सोचती है और हो सकता है कि उसने यौनिकता के दमन की वैसी पीड़ा न भुगती हो जैसी आपने भुगती है। यही कारण है कि बिना वास्तविक सेक्स की संभावना के ऐसी सेक्स की चर्चा करना उसके लिए आवश्यक नहीं है। वह गंभीर है क्योंकि वह जीवन के ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ वाकई उसे एक आत्मीय, स्थिर और टिकाऊ संबंध की आवश्यकता है! वह कभी भी यहाँ, आपके दरवाजे पर आकर खड़ी हो सकती है और वह सब मांग सकती है, जिसे देने का वादा आपने ऑनलाइन किया था!

क्या आपको डर लग रहा है? बढ़िया! बढ़िया इसलिए कि अगर आप डर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप वाकई इस मामले में गंभीर नहीं हैं और अगर गंभीर नहीं हैं तो आपको तुरंत इसे यहीं समाप्त कर देना चाहिए! आप जिस राह पर चल रहे हैं, वहाँ और आगे बढ़ने पर किसी के दिल पर ज़बरदस्त ठेस लग सकती है। उसके सामने स्पष्ट कर दें कि आप हँसी-ठट्ठा करके टाइम पास कर रहे थे, यह भी स्पष्ट करें कि आप कुछ साल बाद उस लड़की से शादी करने वाले है जिसे आपके अभिभावक आपके लिए चुनेंगे या आप वास्तव में शादीशुदा है और आप सिर्फ बातें करके मन बहलाना चाहते हैं। यह ठीक है और मैं दावा करता हूँ कि ज़्यादातर महिलाएँ इतना सब हो जाने के बाद भी एक मित्र के रूप में आपसे बात करती रहेंगी- लेकिन तब तक ही, जब तक कि आप उन्हें धोखा देने की कोशिश नहीं करते और उनके साथ झूठे वादे नहीं करते!

जिस भारतीय पुरुष के साथ आप प्यार और सेक्स के बारे में ऑनलाइन चैट कर रही हैं, वास्तव में वह आपके साथ विवाह क्यों नहीं करेगा! 16 जून 2015

कल मैंने एक बहुत महत्वपूर्ण मामले पर लिखना शुरू किया था: उन पश्चिमी महिलाओं के बारे में, जो भारतीय पुरुषों के ऑनलाइन प्रेम में पड़ जाती हैं और फिर इस आशा में कि शायद उन्हें एक जीवन साथी मिल गया है, उनसे मिलने भारत आ जाती हैं। जब कि मैं वास्तव में सकारात्मकता का समर्थक हूँ और चाहता हूँ कि लोग अपनी भावनाओं और इच्छाओं के अनुसार काम करें, इस मामले में मैं सतर्कता बरतने की सलाह भी दूँगा। हाल ही में हमने बहुत से ऐसे मामले देखे हैं, जिनकी परिणति निराशा और अवसाद में हुई है और इसलिए मैं एक बार पुनः स्पष्ट करना चाहता हूँ कि ऐसा क्यों होता है। आज मैं पुनः पश्चिमी महिलाओं पर ही अपना ध्यान केन्द्रित कर रहा हूँ लेकिन कल मैं उन भारतीय पुरुषों के लिए भी कुछ पंक्तियाँ लिखूँगा, जो इन महिलाओं की निराशा और उनके अवसाद का कारण बनते हैं।

मैं आपकी परिस्थिति समझता हूँ। आप उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहाँ आप बहुत कुछ देख चुकी हैं, किसी संबंध में स्थिर होने की आपने काफी कोशिश की है। आपको अपने हिस्से का प्यार और सेक्स प्राप्त हुआ है तथा उसी अनुपात में संबंध टूटने की कसक भी। अब आप एक परिपक्व महिला हैं, आप क्या चाहती हैं, यह आपको अच्छी तरह पता है और जो आप चाहती हैं वह बहुत ठोस, गंभीर और उदात्त है।

शायद आपने भारतीय संस्कृति के बारे में सुना है और वहाँ के युवकों के बारे में ये अच्छी बातें भी सुनी होंगी कि वे भोले-भाले होते हैं, दूसरों को धोखा नहीं देते और उनकी बहुत सी गर्लफ्रेंड्स नहीं होतीं बल्कि वे एक स्थिर और चिरस्थायी संबंधो के हामी होते हैं। आँकड़ों की भाषा में यह बात सत्य प्रतीत होती है लेकिन जब आप वाकई भारत की धरती पर कदम रखते हैं तो बहुत जल्द आपको उसके विडंबनापूर्ण कटु यथार्थ के दर्शन हो जाते हैं।

जिस पुरुष के साथ आप चैट करती रही थीं, वह एक युवक है, जिसे महिलाओं के साथ बर्ताव का बहुत थोड़ा सा अनुभव है या बिल्कुल ही नहीं है और जो अपने अभिभावकों द्वारा तय की गई लड़की से विवाह करने से पहले, कुछ वर्ष महज थोड़ी-बहुत मौज मस्ती चाहता है। अब उसके सामने एक विदेशी महिला के साथ रोमांचक समय गुजारने का अवसर उपस्थित हो गया है, जिसके बारे में उसके मन में सिर्फ एक विचार है कि वह ‘गोरी चमड़ी वाली है और आसानी से उपलब्ध’ हो जाती है।

यह आपको बहुत कटु और निष्ठुर बात लग रही होगी और मैं मानता हूँ कि इससे भिन्न प्रकरण भी हो सकते हैं लेकिन मैंने यह अनुभव किया है और ऐसे विचार रखने वाले बहुत से भारतीयों को देखा है, जिनके साथ सिर्फ पश्चिमी महिलाएँ ही इस स्थिति से दो-चार नहीं होतीं। बहुत से पुरुषों के लिए यह इससे ज़्यादा कुछ नहीं होता। वे जानते हैं कि आप किसी अन्य देश में, कहीं बहुत दूर बैठी हैं और इस बात की संभावना बहुत कम है कि आप वाकई उड़कर यहाँ आ जाएँगी और उसे ढूँढ़ना शुरू कर देंगी। वास्तव में वे नहीं समझते कि आप इस संबंध को इतनी गंभीरता के साथ ले रही होंगी!

आपकी यह बात सही है कि भारतीय पुरुष आम तौर पर आसानी से एक संबंध तोड़कर दूसरे संबंध पर नहीं लपकते। अधिकतर इसलिए कि उन्हें अधिक संबंध उपलब्ध ही नहीं हो पाते! शादी से पहले ऐसे किसी सम्बन्ध में लिप्त होना भारतीय संस्कृति में आम तौर पर संभव ही नहीं है, बहुत से परिवारों के लिए किसी अविवाहित बच्चे का कोई साथी होना अर्थात, संभवतः किसी के साथ सेक्स संबंध होना, किसी कलंक या हादसे से कम नहीं है! लड़कों को यह बात लड़कियों से भी अधिक ज़ोर देकर सिखाई जाती है क्योंकि लड़कियाँ पहले ही इस बारे में बहुत सतर्क होती हैं और किसी लड़के के साथ प्रेम और सेक्स के बारे में चैट करके कलंकित होने का खतरा मोल नहीं लेतीं।

यही बात आपको इस चक्र में खींच लाती है: आप उन देशों से आती हैं जहाँ लोग समझते हैं कि उनकी संस्कृति सेक्स को लेकर बहुत उदार और खुली है। यह सही है कि आपके देशों में लोग आसानी से यौन संबंध बना लेते हैं और एक-दूसरे के साथ जीवन-साथी के रूप में रहने लगते हैं, जहाँ दोनों एक-दूसरे का पूरा सम्मान करते हैं लेकिन बहुत से भारतीय इसे बिल्कुल दूसरी निगाह से देखते हैं। मुझसे अक्सर पूछा जाता है, 'तुम पश्चिमी देशों में जाते रहते हो, क्या वहाँ किसी के साथ भी सेक्स संबंध बनाना वाकई आसान है?' इसके अलावा कई पश्चिमी महिलाओं ने मुझे बताया है कि कैसे बिल्कुल अजनबी भारतीयों ने उनसे पूछा, 'आपके देश में तो ओपन सेक्स कल्चर है न?’ वास्तव में वे सोचते हैं कि पश्चिमी देशों में लोग बिना किसी भावनात्मक अनुराग के ही सेक्स संबंध बना लेते हैं- आखिर वे शादीशुदा तो नहीं होते! वे सोच ही नहीं पाते कि आप सारी भावनात्मकता के साथ किसी संबंध में लिप्त होते हैं!

अपनी आशाओं को उस दिशा में आगे बढ़ने की इजाज़त देने से पहले आपको यह भी समझना चाहिए कि आप उनके लिए विवाह योग्य प्रत्याशी नहीं हैं! सामान्य भारतीय अपने जीवन की योजना इस तरह बनाते हैं कि उनके माता-पिता उनका विवाह उनके धर्म और जाति की किसी युवा लड़की से तय कर देते हैं जो उनके लिए बच्चे पैदा करेगी और इस तरह वे अपने वंश को आगे बढ़ाएँगे।

यहाँ आप कहाँ फिट होती हैं? अधिकतर परिवारों में, जहाँ लगभग पूरी तरह परंपरागत मूल्यों का पालन किया जाता है, महज इसलिए भी आप स्वीकार योग्य नहीं होंगी कि आप भारतीय नहीं हैं, हिन्दू नहीं हैं और न उनकी जाति की हैं। इसके अलावा, शायद आप उस उम्र को भी पार कर चुकी हैं, जिसे वे बच्चे पैदा करने के लिहाज से उपयुक्त उम्र मानते हैं! एक औसत भारतीय व्यक्ति अपने परिवार वालों से बहुत जुड़ा होता है और यह मुश्किल है कि वह आपकी खातिर उनका दिल तोड़ दे। भारतीय पुरुष अपने माता-पिता की खुशी के लिए अपनी प्रेमिकाओं को, जिनका उनके जीवन में आना उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना होता है, बड़ी आसानी से छोड़ देते हैं और फिर परिवार की मर्ज़ी से विवाह रचा लेते हैं। एक विदेशी के साथ जीवन बिताने के लिए वे अपने परिवार के साथ शायद ही वैमनस्य मोल लें, जब कि वह विदेशी महिला स्वयं अपने बारे में बहुत आश्वस्त नहीं है।

अंत में इतना ही कहा जा सकता है कि वे सिर्फ मज़ा लेना चाहते हैं और इस संबंध को लेकर गंभीर नहीं होते। अगर आप भारत आकर उनके साथ झगड़ा करना चाहेंगी तो वे डर जाएँगे।

और यह सिर्फ युवकों के बारे में ही सच नहीं है! आपको कोई विवाहित पुरुष भी मिल सकता है जो प्यार और सेक्स की बातें करने के लिए आपको मनाने के उद्देश्य से कुछ भी कह सकता है, जैसे यह कि उसकी पत्नी मर गई है या उसका तलाक हो चुका है। हो सकता है, उसका विवाह उतना सुखद न रह गया हो और वह अपनी पत्नी से अक्सर दूर रहना ही पसंद करता हो। वह मात्र आपके साथ सेक्स की बातें करके या एकाध बार स्काइप पर रूबरू चैटिंग करके ही संतुष्ट हो सकता है। लेकिन जब आप भारत आ जाती हैं तो आपसे मिलने की उनकी हिम्मत ही नहीं होती क्योंकि उन्हें डर लग रहा होता है कि कहीं उनकी पत्नियों को पता न चल जाए। या फिर वे आपसे सिर्फ एक रात के लिए भर मुलाक़ात कर लेते हैं और पुनः आपको हमेशा के लिए निराशा के गर्त में धकेल देते हैं।

आखिर में, मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि इंटरनेट की दुनिया यथार्थ नहीं है। मेरे भी फेसबुक पर बहुत से मित्र हैं और आप आपस में दोस्त हो सकते हैं लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ। मैं किसी के भी बारे में कोई गारंटी नहीं दे सकता, इसलिए कृपा करके यह मत सोचिए कि सिर्फ इसलिए कि वे मेरे संपर्क में हैं, वे ईमानदार हैं, नैतिक रूप से सच्चे हैं या बहुत अच्छे लोग हैं।

आप कुछ भी करें, कहीं भी दिल लगाएँ, मगर सतर्कता पूर्वक। अगर आप वास्तव में इस आदमी से मुलाक़ात करना चाहती हैं, कम से कम उससे मिलने की कोशिश करना चाहती हैं तो यहाँ, भारत में हमारे दरवाजे आपका स्वागत करने के लिए हमेशा तैयार हैं। इतना याद रखें कि परिस्थितियाँ आपकी अपेक्षा से बहुत अलग भी हो सकती हैं।

भारतीय पुरुष, जैसा कि वादा है, मैं आपके लिए कुछ पंक्तियाँ कल लेकर आऊँगा।

3 साल के बच्चे को उसके सवाल का जवाब देना: प्रेम क्या होता है? 30 मार्च 2015

कुछ दिन पहले मैं घर के सामने वाले हाल में लगे झूले पर बैठे अपरा के साथ खेल रहा था। हम लोग सिर्फ आपस में गले लिपटकर हँसी-मज़ाक कर रहे थे। ऐसे सुखद माहौल में अचानक मेरी बेटी ने मेरी ओर देखा और पूछा: 'पा, प्यार क्या होता है?'

उन बहुत से लोगों ने, जो मुझे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, पहले से सुना होगा कि मैं ठीक इसी विषय पर भाषण दे चुका हूँ: प्रेम। जो लोग मेरे ब्लॉग पढ़ते हैं, वे भी निश्चित ही इस विषय पर मेरे ब्लॉग पढ़ चुके होंगे। जब मैं मंच पर होता हूँ तो कई आध्यात्मिक लोग मुझसे यही प्रश्न पूछते हैं और जब मैं उसका उत्तर देता हूँ तो वह अक्सर एक या कई घंटों में फैल जाता है!

लेकिन आप क्या जवाब देंगे जब पूछने वाला एक तीन साल का बच्चा हो, आपकी गोद में खेलती आपकी नन्ही बच्ची हो?

एक साथ कई विचार मेरे मन में उठे लेकिन मैंने यह जवाब दिया: "जो मैं तुम्हारे लिए, तुम्हारी माँ, तुम्हारे चाचाओं के लिए महसूस करता हूँ, वही प्रेम है। और तुम भी मेरे प्रति प्रेम महसूस करती हो। प्रेम आपस में एक-दूसरे के साथ होता है।"

इस जवाब पर अपरा एकाध मिनट के लिए गहन सोच में डूब गई। खामोशी के साथ हम झूला झूलते रहे। फिर उसने स्वीकार में सिर डुलाया। उसे सब कुछ समझ में आ गया था और वह जवाब से संतुष्ट थी।

और देखिए, यह कितना आसान था!

विश्वास और प्रेम की अनुभूति – 15 फरवरी 2015

जिसे आप जीवन में सबसे अधिक प्यार करते हैं, उसके साथ साझेदारी और सहजीवन के विषय में आपके सामने मैं अपने कुछ विचार रखना चाहता हूँ।

शाम को भोजन पश्चात अपने मेहमानों के साथ कुछ समय गुजारने के बाद हम अक्सर अपने पिताजी के कमरे में उनके साथ भी कुछ समय गुज़ारते हैं। अपरा के सोने के थोड़े समय पहले का यह वक़्त होता है-या यह कहना ठीक होगा कि जब वह उनींदी होने लगती है। हम खेलते हैं, बातें करते हैं और उनके बिस्तर पर बैठे हुए कुछ समय हम सब एक साथ गुज़ारते हैं। कल जब हम साथ बैठे हुए थे, मैंने अपना सिर रमोना के कंधों पर रख दिया और वह भी मेरी तरफ थोड़ा सा खिसक आई और इस तरह मैं अधलेटा सा उसकी बाहों में पड़ा हुआ था। उस समय मुझे जो एहसास हुआ, वही इन विचारों का उद्गम है।

स्वाभाविक ही मुझे एहसास हुआ कि मुझसे प्रेम किया जा रहा है लेकिन बारीकी से देखा जाए तो उसमें एक सूक्ष्म भेद था। प्रेम के साथ मुझे दुलार का, संरक्षण पाने का एहसास भी हुआ था। यह मज़ाक लग सकता है क्योंकि ऐसी कोई बात नहीं है कि मुझे सुरक्षा देने की रमोना को आवश्यकता पड़े या जो इसे मर्दाना गुण नहीं मानते, उनसे मैं कहना चाहता हूँ कि मैं खुद अपनी सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हूँ। 🙂 लेकिन वह एहसास मौजूद था और वह एहसास बड़ा ही सुंदर था: विश्वास और प्रेम का एहसास।

लेकिन साथ ही मुझे लगा यह कितना सुंदर है कि मैंने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया! ऐसे किसी व्यक्ति को पाने का एहसास, जिसकी आप कदर करते हैं, जिसका आप भरण-पोषण कर सकते हैं- हालांकि स्त्रीवादियों से मैं कहना चाहता हूँ कि मेरी पत्नी इतनी सक्षम है कि वह स्वयं अपना भरण-पोषण कर सकती है! 🙂 यह एहसास भी बड़ा सुंदर है और हालांकि स्वाभाविक ही मैं अपरा के साथ इसे अधिक शिद्दत के साथ महसूस करता हूँ क्योंकि वह बच्ची है और मुझ पर और उसके आसपास के दूसरे वयस्कों पर बहुत हद तक निर्भर है, रमोना के मामले में यह स्वाभाविक ही अलग एहसास है। मुझे गर्व होता है कि इस महिला ने एक व्यक्ति के रूप में मुझे चुना है, जिसकी बाहों में वह सिमटना चाहती है और जब मर्ज़ी या आवश्यकता हो, उसके कंधों पर सिर टिकाना चाहती है।

मैं जानता हूँ कि यह एक प्रकार का आदिम एहसास है, कि इस एहसास के साथ स्वभावगत मूल प्रवृत्तियाँ जुड़ी हुई हैं, जो हमारे दिलों, हमारे शरीरों और मस्तिष्क के ज़रिये अपने आपको व्यक्त करती हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह उन्हें कम महत्वपूर्ण नहीं बनाता। उन्हें महसूस करना मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और हर बार जब भी मैं उन्हें पूरे होशोहवास के साथ अनुभव करता हूँ, मुझे बड़ा अच्छा लगता है और मैं उन्हें सँजोकर रखना चाहता हूँ।

कल मुझे इस अनुभूति से बहुत आश्चर्य हुआ कि हमने इन दोनों भावनाओं को महसूस किया। आदिम सहज-वृत्तियों के बारे में बात करते हुए आप सोचते हैं कि प्रतिपालक या संरक्षक के रूप में पुरुष हमेशा गर्व महसूस करता है, जब कि स्त्रियाँ हमेशा किसी की सुरक्षा में रहना और अपने बारे में चिंता किया जाना पसंद करती हैं। लेकिन मैं जानता हूँ कि पुरुष और महिलाओं, दोनों में, दोनों बातें मौजूद होती हैं और हमें दोनों बातों का एक साथ एहसास करते हुए जीना पड़ता है!

मैंने पत्नी से बात की और पाया कि उसने भी इन दोनों भावनाओं को महसूस किया था। मुझे लगता है कि यह संज्ञान आजकल के सम्बन्धों में ही परिलक्षित हो सकता है, आधुनिक दुनिया में, क्योंकि आज के जमाने में ही एक पुरुष के लिए यह स्वीकार करना संभव है कि वह भी संरक्षण चाहता है और स्त्री के लिए यह स्वीकार करना कि वह भी अपने प्रियकरों का भरण-पोषण करने में अपनी भूमिका का निर्वाह करना चाहती है।

हमें दोनों पक्षों को स्वीकार करना होगा-और मुझे आशा है कि तब आप उन दोनों का लुत्फ उठा पाएँगे!

और मेरी प्रेम कहानी इस तरह शुरू हुई….. – 11 जनवरी 2015

सन 2007 में लगभग होली के आसपास की बात है, मेरे जीवन में एक महत्वपूर्ण घटना घटित हुई, जिसने मेरे जीवन के सबसे शानदार अध्याय की शुरुआत की। मुझे एक ईमेल प्राप्त हुआ।

जब मैं पिछली बार जर्मनी और यूरोप के दूसरे देशों की यात्रा पर था, मेरे पास बहुत अधिक काम हुआ करता था। जहाँ भी हफ्ते भर के लिए भी मैं जाता, पूरे समय के लिए बुकिंग की लंबी कतारें हुआ करती थीं। मेरी कार्यशालाएँ बुक हो जाती थीं और व्यक्तिगत सत्रों में भी इतनी भीड़ हुआ करती थी कि मुझे देर रात तक काम करते रहना पड़ता था। इसके अलावा मेरे आयोजक भी बताते थे कि इतने लोग उनसे संपर्क कर रहे हैं कि सबका हिसाब-किताब रख पाना बहुत मुश्किल हो रहा है।

इसलिए 2006 से ही मैंने किसी ऐसे व्यक्ति की खोज शुरू कर दी थी, जो इस विषय में मेरी और मेरे आयोजकों की सहायता कर सके। मैंने अपने मित्रों से कहा कि वे इस बात को लोगों तक पहुँचा दें, अपने मित्रों से कहें और किसी ऐसे व्यक्ति को खोजने में मेरी मदद करें, जो मेरी इस विषय में सहायता कर सके, मेरे ईमेलों का जवाब दे सके, हमारी वैबसाइट के लिए लिख सके और अंग्रेज़ी से जर्मन भाषा में अनुवाद कर सके। 2007 के मेरे यूरोप दौरे का कार्यक्रम पूरी तरह निश्चित हो चुका था और मुझे स्पेन, लग्जेंबर्ग, लातविया और संभवतः इटली भी जाना था और इन सबके साथ जर्मनी तो था ही। पूरे दौरे के बाद, जो लगभग तीन या चार महीनों का होना था, मैं उस सहायक को अपने साथ आश्रम ले आने वाला था और चाहता था कि वह कुछ दिन आश्रम में हमारे साथ रहकर हमारा यह काम करे!

बहुत से लोगों को इस विषय में बताने के कारण मेरे पास कई जवाब आए। लेकिन जब एक खास जवाब आया तो मैं तुरंत ही समझ गया कि निश्चय ही यही व्यक्ति है जो हमारी मददगार हो सकती है: वह एक युवा महिला थी, जिसने एक मित्र की मित्र के रूप में अपना परिचय मुझे दिया। उसने लिखा: "मुझे पता चला है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति की खोज में हैं…", और साथ में अपना परिचय, शैक्षणिक योग्यता और साथ ही एक फोटो भी संलग्न किया हुआ था।

दुर्भाग्य से मेरे पास अब वह ईमेल नहीं है लेकिन मुझे याद है कि उसकी अंतिम पंक्ति मुझे बहुत पसंद आई थी: "मुझे विश्वास है कि इस काम के लिए मैं सबसे योग्य व्यक्ति हूँ!"

और वाकई वह योग्य थी।

आपने निश्चय ही अब तक समझ लिया होगा कि उस ईमेल को भेजने वाला कौन था: जी हाँ, भविष्य में होने वाली मेरी पत्नी और मेरी बेटी की माँ, रमोना!

जब मैं पारंपरिक विवाह समारोह में शिरकत करता हूँ तो क्या मैं दहेज प्रथा का समर्थन करता हूँ? 25 दिसंबर 2014

कल मैंने कुछ परिस्थितियों का वर्णन किया था, जिसमें मैंने कहा था कि यदि अस्पृश्यता और दहेज प्रथा जैसी हानिकारक और पूरी तरह अन्यायपूर्ण परम्पराओं का पालन न करने की बात हो तो हमें अपने आधुनिक विचारों पर अडिग रहना चाहिए। एक भारतीय ने कुछ दिन पहले मुझसे कहा कि वह भी पेशोपेश में है कि क्या उसकी परिस्थिति भी उसी श्रेणी में आती है। उसका मित्र विवाह कर रहा था और वह जानता था कि मित्र के विवाह में दहेज लिया जाएगा, जिसका वह दृढ़ता पूर्वक विरोध करता था। अब वह पेशोपेश में था कि क्या उसे अपने मित्र के विवाह में शामिल होना चाहिए या नहीं यानी क्या वह वहाँ जाकर दहेज प्रथा का समर्थन कर रहा होगा!

जब इस तरह के मामले सामने आते हैं तो कुछ लोग कहते हैं कि मैं बहुत सख्त हूँ। और वास्तव में मैं अपने शब्दों का शब्दशः पालन करता हूँ और जो लिखता हूँ या कहता हूँ, उस पर पूरा अमल करता हूँ। लेकिन साथ ही मैं इन दो स्थितियों में अंतर कर सकता हूँ कि कब अपने विश्वास या अविश्वास को सबके सामने रखना चाहिए और कब उनसे मुझे एक मित्र की तरह मिलना चाहिए क्योंकि हम एक दूसरे से प्रेम करते हैं।

मेरे विचार में यहाँ भी वही मामला है। अगर वह आपका घनिष्ठ मित्र है तो शायद आपने अपना मंतव्य ज़ाहिर कर दिया है। अगर वह आपका करीबी रिश्तेदार है और आपको इस मामले में उससे कुछ कहना है तो मैं कहूँगा कि आपको दहेज के इंतज़ाम या उसके ‘लेन-देन’ को रोकने के लिए, जो भी आपसे बन पड़े, करना ही चाहिए।

आप कितना भी करीबी रूप से दूल्हा या दुल्हन से जुड़े हों, दहेज के मुद्दे पर आपके विवाह समारोह में न जाने पर विवाह नहीं रुकने वाला। अगर आप रिश्तेदार नहीं हैं, करीबी मित्र भी नहीं हैं तो फिर आपको समारोह में बुलाने वाले इसका बुरा नहीं मानेंगे बल्कि हो सकता है आपके न आने को नोटिस तक न लें और तब आपका विरोध अलक्षित रह जाएगा। अगर आप करीबी रिश्तेदार या मित्र हैं तो आपके न आने पर वे विचलित होंगे और उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचेगी और आप उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे होंगे।

आपका यह व्यवहार आपके आपसी रिश्तों को तो नुकसान पहुँचाएगा मगर आपके मित्रों या रिश्तेदारों को अपनी दकियानूसी और नुकसानदेह परंपराओं का पालन करने से नहीं रोक पाएगा। जब आप उनके सामने अपने विचार रखकर कुछ नहीं कर पाए तो ऐसा करके भी कुछ हासिल नहीं कर पाएँगे।

और यहाँ मैं आपसे यह सवाल पूछना चाहता हूँ कि अधिक महत्वपूर्ण क्या है: आपका अहं, जोकि उनके द्वारा आपके विचारों का अनुपालन न करने के कारण आहत हुआ है या उनके प्रति आपका स्नेह? आपका विश्वास या आपकी मित्रता?

मेरे विचार से विवाह में आपका सम्मिलित होना उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण, उनके लिए सबसे सुखद और आत्मीय अवसर पर आपका उनके साथ रहना है! उनके प्रेम में सहभागी होने के लिए आप एक शाम इस बात को भुलाकर कि उनके विचार आपसे नहीं मिलते या वे दक़ियानूसी और नुकसानदेह हैं, उनके साथ मिलकर सिर्फ अवसर का आनंद उठाएँ!

इसका यह अर्थ भी नहीं है कि आपको पूरे समय वहाँ बैठकर सारे कर्मकांडों में उपस्थित रहना है, अगर आप उस अवसर के धार्मिक अंशों के विरुद्ध हैं तो उनसे दूर रहिए! यह आवश्यक नहीं है और यदि वे आपका नज़रिया जानते हैं तो कोई भी इस बात से परेशान नहीं होगा कि आप विवाह समारोह के उस हिस्से में अनुपस्थित रहे। लेकिन पार्टी में वे आपको अवश्य ही मिस करेंगे-और निश्चय ही आप भी उन्हें मिस करेंगे!

तो ऐसे सवालों से अपने आपको परेशान करने की ज़रूरत नहीं है, जो आपकी दिली इच्छा हो वही कीजिए और अपने परिवार और दोस्तों के साथ खुला व्यवहार कीजिए! जीवन का आनंद लीजिए-उसे बहुत ज़्यादा जटिल मत बनाइए!

और उसी जज़्बे के साथ, भले ही मेरा क्रिसमस से या उसकी परम्पराओं से या उसके महत्व से कोई लेना-देना नहीं है, मैं अपने पाठकों और मित्रों के लिए, जिन्होंने कल या आज क्रिसमस मनाया या कल मनाएँगे, क्रिसमस की शुभकामनाएँ अर्पित करता हूँ कि उनके जीवन में सदा सुख-शांति बनी रहे! अपनी छुट्टियाँ और त्योहार मनाते रहें, परिवार वालों को खूब गले लगाएँ और ज़्यादा खाना न खाएँ भले ही वह कितना भी सुस्वादु क्यों न हो!

क्या आप उस उदात्त प्रेम और शारीरिक अंतरंगता को कई लोगों के साथ साझा कर सकते हैं? 29 अक्टूबर 2014

कल का ब्लॉग पढ़कर आप जान चुके होंगे कि मैं प्रेम को बहुत सेक्सी मानता हूँ। जी हाँ, मैं प्रेम से जुड़ी बहुत सी बातों को सेक्सी मानता हूँ और इसी तरह जो भी चीजें यौनिकता (सेक्सुअलिटी) से सम्बंधित हैं उन्हें मैं प्रेम से भी सम्बंधित मानता हूँ। इस नज़रिए से सोचने पर मैं समझता हूँ कि प्रेम, वह अन्तरंग, उदात्त और गहन प्रेम सिर्फ और सिर्फ एक व्यक्ति के साथ ही संभव हो सकता है। कई लोगों से नहीं। और इसीलिए मेरा विश्वास है कि बहु-विवाह या एक ही समय में कई लोगों से शारीरिक सम्बन्ध रखना, वास्तव में चल नहीं सकता।

दरअसल मैंने कई लोगों को इसकी कोशिश करते देखा है लेकिन आज तक किसी को सफल होते नहीं देखा। उनके बीच हमेशा ईर्ष्या सम्बन्धी समस्याएँ मौजूद रहती हैं और मैं समझता हूँ कि इसका मूल कारण इस तथ्य में निहित है कि आप एक साथ कई लोगों को वह उदात्त और गहन प्रेम नहीं दे सकते जिसका मैंने ऊपर ज़िक्र किया है।

इसमें कोई शक नहीं कि आप एक ही समय पर कई लोगों के साथ अन्तरंग हो सकते हैं। क्यों नहीं हो सकते- आखिर यह सिर्फ शारीरिक मामला ही होगा और यह बिलकुल संभव है कि जिसके साथ आप यौन संबंध स्थापित करते हैं उसके शरीर को पसंद भी करते हैं और उससे बढ़कर, उस व्यक्ति से प्रेम भी कर सकते हैं। लेकिन मैं जिस प्रेम की चर्चा कर रहा हूँ, वह विशाल, सब कुछ अपने में समाहित कर लेने वाला प्रेम जिसमें कि आप अपने प्रियतम को, वो जैसा भी है स्वीकार करते हैं, वह गहन प्रेम इस तरह के विभिन्न लोगों के साथ होने वाले यौन-सत्रों में साझा नहीं हो सकता!

कैसे साझा करेंगे? वह गहराई तक जुड़ाव की आतंरिक अनुभूति यहाँ कैसे प्राप्त होगी? क्या इसका सबसे अच्छा पहलू यह नहीं है कि उस दूसरे को सिर्फ आप इतनी अच्छी तरह जानते हैं, जितना दूसरा कोई नहीं जानता? कि मस्तिष्क या शरीर का कोई हिस्सा आपके बीच या आपके लिए शर्म या संकोच का बायस नहीं है?

उसके बाद शारीरिक स्पर्श का प्रश्न है: आप अपने प्रेमी का स्पर्श महसूस करते हैं, उसे अच्छी तरह पहचानते हैं। आप अच्छी तरह जानते हैं कि आपका साथी किस तरह आपका हाथ अपने हाथ में लेता है, किस तरह वह आपके नितम्बों को सहलाता है- दूसरे दिन, दूसरे के साथ आप वैसा ही आनंद कैसे प्राप्त कर पाएँगे? दूसरे व्यक्ति के हाथों का स्पर्श अलग तरह का होगा, उँगलियों की छुअन का एहसास अलग होगा- क्या आप तुलना नहीं करेंगे और फिर क्या किसी एक को दूसरे से अधिक प्यार नहीं करेंगे? किसी भी हालत में आप किसी दूसरे के लिए वही भावना नहीं रख सकते!

जी नहीं! भावनात्मक, शारीरिक, मानसिक, मेरा विश्वास है कि आप किसी भी तरह से कई साथियों के साथ एक ही समय में पूरी तरह समर्पित नहीं रह सकते और न ही उनसे उसी एक जैसी गहराई के साथ प्रेम कर सकते हैं। आप साथ-साथ एकाध रात गुज़ार सकते हैं। आप बहुत बढ़िया, सुखद समय गुज़ार सकते हैं। आप सेक्स का आनंद ले सकते हैं, शारीरिक प्रेम कर सकते हैं।

लेकिन आप तीन या चार लोगों के साथ एक साथ उस उदात्त और गहन प्रेम का अनुभव नहीं कर सकते।

अगर कर सकते हों तो मुझे गलत सिद्ध करके दिखाइए।