मूर्ख धार्मिक चैरिटी वाले समलैंगिकों की मदद लेने से इंकार कर देते हैं! 26 नवम्बर 2014

स्वामी बालेन्दु अपने एक समलैंगिक मित्र की चर्चा रहे हैं, जिसे एक चैरिटी ने कहा कि वह अनैतिक और पथभ्रष्ट है जब कि वह उस चैरिटी की नियमित मदद करता रहा था। स्वाभाविक ही, चैरिटी को उसकी मदद मिलनी बंद हो गई!

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समलैंगिकता का विरोध नहीं, बल्कि स्वीकृति योग का काम होना चाहिए – 1 जून 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे उनके एक मित्र का गुरु इस बात को पसंद नहीं करता था कि वह एक समलैंगिक है। वे पूछते हैं कि आखिर कोई ऐसे गुरु का अनुयायी कैसे हो सकता है।

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योग गुरु कैसे अपने समलैंगिक शिष्यों के मन में आतंरिक कलह पैदा करते हैं! 25 मई 2014

स्वामी बालेन्दु अपने एक समलैंगिक मित्र के बारे में बता रहे हैं, जो पहले एक हिन्दू योग गुरु का शिष्य था। उसके गुरु द्वारा उसकी समलैंगिकता का विरोध करने के कारण उसके मन में मचे आतंरिक संघर्ष के बारे में यहाँ पढ़ें।

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महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के लिए अपनी समलैंगिकता को स्वीकार करना ज़्यादा कठिन क्यों होता है! 18 मई 2014

सन 2006 में स्वामी बालेन्दु ने बहुत से महिला और पुरुष समलैंगिकों के साथ काम किया था, जो उन्हें अपनी कहानियाँ सुनाते थे। इस ब्लॉग में वे उन्हीं अनुभवों के बारे में और विस्तार से लिख रहे हैं।

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पुरुषों के साथ अनुभव लेने के बाद बहुत सी महिलाएँ समलैंगिक क्यों हो जाती हैं! 11 मई 2014

स्वामी बालेन्दु उन कारणों की विवेचना कर रहे हैं, जिनके चलते बहुत सी चालीस-पार महिलाएँ अपने पति और बॉयफ्रेंड से अलग होकर किसी महिला के साथ सम्बन्ध बनाने को उद्यत होती हैं।

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समलैंगिक – अलग मगर उतने अलग भी नहीं – 4 मई 2014

स्वामी बालेन्दु को पश्चिमी देशों की अपनी यात्राओं के दौरान सन 2006 और उसके पहले भी कई समलैंगिकों से मिलने का मौका मिला। यहाँ वे उनके साथ हुए अपने अनुभवों के बारे में लिख रहे हैं।

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तुम्हारी पेशकदमी को नज़रअंदाज़ करता हूँ, इसका मतलब यह नहीं कि मैं समलैंगिक हूँ! 25 अगस्त 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उन्हें पता चला कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है और उनकी आयोजक, भूतपूर्व पोल-डांसर, न सिर्फ तंत्र विद्या का धंधा करती थी बल्कि उसने उनके बारे में यह अफवाह फैलाना शुरू कर दिया था कि वे समलैंगिक हैं!

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क्रूर धर्म किस तरह अपने अनुयायियों को यातना देते हैं – 10 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि किस तरह से सभी धर्म मानसिक हिंसा करते हैं|

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जब बात सेक्स की हो तो सवाल उठता है स्वतंत्रता और सहिष्णुता का – 1 मार्च 13

स्वामी बालेंदु कहते हैं कि यदि आप अपनी बात कहने और मनचाहा जीवन जीने की आजादी चाहते हैं तो आपको सहिष्णु बनना ही होगा|

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