हाँ, मुझे सेक्स, पैसा, भौतिक पदार्थ और मेरी पत्नी पसंद हैं और मुझे कोई अपराधबोध भी नहीं है! 19 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु उन चीजों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे उन्हें प्रेम है, भले ही बहुत से लोग उन चीजों में संलग्न होना बुरा समझते हों। क्यों? और ये चीजें क्या हैं, यहाँ पढ़िए!

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आश्रम आने के विषय में पूछताछ का एक उदाहरण, जिसे हमने अस्वीकार कर दिया – 5 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु आश्रम आने की इच्छुक एक महिला के साथ हुई ईमेल बातचीत की प्रतिलिपि प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने उसे मना कर दिया-क्योंकि वह धार्मिक माहौल की तलाश में थी।

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धर्म, सेक्स, ईश्वर और आपके पूर्वजों के बीच क्या संबंध है? 13 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु धर्म, सेक्स, कुछ नियमों और उनकी आपसी अंतःक्रियाओं से उद्भूत बहुत सारी मज़ेदार बातों के बारे में लिख रहे हैं!

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भारत में सामाजिक परिस्थिति लगातार बेहद शर्मनाक, शोचनीय और पीड़ादायक हो चली है – 7 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों वे समझते हैं कि भारत में मौजूदा हालत न सिर्फ बहुत नाज़ुक और संवेदनशील हो गई है बल्कि वह लगातार बिगड़ती ही जा रही है। इस विषय में विस्तार से यहाँ पढिए।

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जीवन आपका है, निर्णय भी आपके होने चाहिए-आपको क्या करना है, इस पर धर्म के दबाव का प्रतिरोध कीजिए – 17 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि धर्म चाहता है कि लोग उसके निर्देशों पर चलें और लोगों को चाहिए कि वे अपने निर्णय खुद लें और उनके परिणामों की ज़िम्मेदारी भी लें।

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जब चुनाव, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धर्म सीमित करता है – 16 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह धर्म स्वतंत्रता की उनकी परिकल्पना से बहुत अलग है: वह लोगों पर पाबंदी लगाता है, उनका मत-परिवर्तन करना चाहता है और यहाँ तक कि, जो प्रतिरोध करते हैं, उनकी हत्या करता है।

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यह कहना कि इस्लाम शांति का धर्म नहीं है, क्यों इस्लाम के विरुद्ध पूर्वग्रह नहीं है – 15 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु स्पष्ट कर रहे हैं कि बिना घृणा के भी आप इस्लाम और उसके प्रसार को लेकर अपनी चिंताएँ व्यक्त कर सकते हैं क्योंकि हिंसा उसके धर्मग्रंथ का हिस्सा है।

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यूरोपियन सरकारों से अपील – शरणार्थियों की मदद करें लेकिन मजहब और मस्जिदों पर सख्त पाबंदी लगाएँ – 14 सितंबर 2015

जर्मनी में 200 मस्जिदें तामीर करने के सऊदी अरब के प्रस्ताव पर स्वामी बालेंदु अपने विचार लिख रहे हैं। उनके अनुसार उन्हें चाहिए कि वे इस प्रस्ताव को सिरे से नामंज़ूर कर दें। क्यों? यहाँ पढ़ें।

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संथारा की मूर्खतापूर्ण परंपरा की वजह से आत्महत्या को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता! 26 अगस्त 2015

स्वामी बालेंदु एक टी वी परिचर्चा का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसमें वे भी शामिल हुए थे। यह चर्चा संथारा पर थी, जो जैन समुदाय की एक पुरानी परंपरा है और जो 75 साल से ऊपर के लोगों के बीच आत्महत्या को प्रोत्साहन देती है।

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स्कूलों में बच्चों को ईश्वर और धर्म से क्यों प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए – 25 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे उन्होंने अपने स्कूल की पाठ्य पुस्तकों में परिवर्तन करके उन्हें अधार्मिक बनाया और किन तरीकों से वे धार्मिक प्रभावों को अपने स्कूल से बाहर रखते हैं।

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