स्त्रियाँ और पुरुष, दोनों रोज़गार करते हैं मगर घर के कामों की ज़िम्मेदारी सिर्फ स्त्रियों की ही होती है – 10 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे लैंगिक भूमिकाओं को स्त्रियाँ और पुरुष, दोनों ज़िंदा रखे हुए हैं। जैसे, घर के कामों का सारा बोझ स्त्री उठाती है और पुरुष को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और वह मदद के लिए सामने नहीं आता!

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जी नहीं, घर की सफाई करना सिर्फ स्त्रियों का काम ही नहीं है! 9 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस प्रकार परंपरागत लैंगिक भूमिकाएँ आज भी सिर्फ भारत में ही नहीं, पश्चिम में भी समस्याएँ बनी हुई हैं। यहाँ पढिए, कौन से काम पुरुषोचित हैं और कौन से स्त्रियोचित, इस विषय में लोगों की प्रचलित धारणाओं के बारे में!

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उन्मुक्त सेक्स संबंध बनाना गलत नहीं है परन्तु मुझे लगता है, वे सफल नहीं हो पाते – 3 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु स्पष्ट कर रहे हैं कि वे यह नहीं समझते कि खुले, स्वच्छंद संबंधों में नैतिक या सामाजिक रूप से कुछ गलत है। मेरा मानना सिर्फ इतना है कि वे अधिक समय तक चल नहीं पाते।

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एक से अधिक सेक्स पार्टनर के साथ आपसी संबंधों में रोमांच, थ्रिल, उत्तेजना और असफलता – 1 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु खुले संबंधों में आने वाली एक और समस्या के बारे में लिख रहे हैं: जब लोग अपने मुख्य पार्टनर में भी रुचि खोने लगते हैं।

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भारतीय स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाली क्रूरतापूर्वक शारीरिक प्रताड़ना का वीडियो सहित पर्दाफाश – 18 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु इस ब्लॉग के ज़रिए पवन के स्कूल में दिए जा रहे शारीरिक दंड की सूचना पाठकों तक पहुँचा रहे हैं। नीचे दिए गए वीडियो को देखें, जिसमें क्रूरतापूर्वक बच्चों की पिटाई की जा रही है और जो भारतीय स्कूलों में रोज़मर्रा की बात है!

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पश्चिमी महिला के लिए क्यों भारत में सामाजिक जीवन बनाने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं – 2 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु उन दिक्कतों के बारे में लिख रहे हैं, जो एक पश्चिमी महिला के सामने आ सकती हैं, जो भारत में रहकर वहाँ के समाज में मित्रता स्थापित करने की कोशिश में लगी हैं। पेश आने वाली कुछ संभव दिक्कतों के बारे में यहाँ पढिए।

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जब भगवान भी बलात्कार करते हैं – हिन्दू मिथकों का भारतीय समाज पर असर – 3 नवंबर 2014

स्वामी बालेंदु आज मनाए जा रहे त्योहार के पीछे की कथा का वर्णन करते हुए दर्शा रहे हैं कि कैसे हिन्दू कथाएँ बलात्कार पीड़िता को खुद पर अत्याचार करने वाले बलात्कारी से विवाह करने की शिक्षा देती है।

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दो इंच की बिकनी से क्या फर्क पड़ता है? 22 अक्टूबर 2014

स्वामी बालेंदु गलतफहमियों, गलत नतीजों और कम कपड़ों से पड़ने वाले बड़े अंतर के बारे में लिख रहे हैं।

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पूरब और पश्चिम में स्तनपान कराना और स्तनपान छुड़ाना – एक तुलनात्मक चर्चा – 27 अगस्त 2014

स्वामी बालेंदु जर्मनी और भारत में स्तनपान कराने और दूध छुड़ाने की परम्पराओं के बीच तुलना कर रहे हैं-दोनों देशों की काम-धंधा करने वाली और घर पर रहने वाली महिलाओं के बारे यहाँ पढ़ें।

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‘आइए, सेक्स के बारे में बातें करें’ का अर्थ ‘आइए, अश्लील चित्र देखें’ नहीं है! 7 अगस्त 2014

स्वामी बालेंदु बहुत से भारतीयों की संकीर्ण, बीमार मानसिकता का वर्णन करते हुए बता रहे हैं कि भारत के लोग सोचते हैं कि सेक्स से संबन्धित हर चीज़ या हर बात गंदी और अश्लील होती है।

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