नास्तिकता का प्रसार करके क्या हम दुनिया को बेहतर जगह बना सकते हैं? 4 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि वास्तव में वे क्यों इस बात की परवाह नहीं करते कि आप नास्तिक हैं या नहीं? क्योंकि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता!

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यह स्पष्ट करने के लिए कि आप नीरस या असंवेदनशील नहीं हैं, अपनी नास्तिकता को सबके सामने स्वीकार कीजिए – 28 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु नास्तिकों से आह्वान कर रहे हैं कि वे दूसरों को अपना दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से बताएँ और खुलकर कहें कि वे नास्तिक हैं। इस तरह, नास्तिकता को लेकर व्याप्त नकारात्मक छवि को बदला जा सकता है!

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जब परिवर्तन मित्रों के बीच नज़दीकियाँ कम कर देते हैं – 8 जून 2015

स्वामी बालेंदु अपने एक मित्र का ज़िक्र करते हुए बता रहे हैं कि कैसे उन्होंने महसूस किया कि मित्रता कम घनिष्ठ हो जाती है और उनके विचार की तब पुष्टि हो गई जब उनके दोस्त ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

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पुराने दोस्तों से दूरी पर दुखी न हों, आप इस विषय में कुछ नहीं कर सकते! 3 मई 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि बहुत करीबी मित्रों के बहुत दूर चले जाने पर कैसे कुछ लोग पुराने दिनों को याद करके अत्यंत दुखी हो जाते हैं। इस ब्लॉग में पढ़िए कि समय-समय पर होने वाले ऐसे परिवर्तनों पर वे क्यों दुखी नहीं होते?

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अगर मामूली से मामूली काम भी आपको कठिन लगता है तो कृपया इसे अवश्य पढ़ें – 15 अप्रैल 2015

स्वामी बालेन्दु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो ईमानदारी से सोचते हैं कि हर नई योजना और हर परिवर्तन कठिन ही होता है। ऐसे लोगों के साथ क्या किया जाए, उनसे कैसे व्यवहार करें, यहाँ पढ़िए।

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अपने वास्तविक मित्रों के साथ मिलकर बदलावों को अनुभव करने का सुखद एहसास – 29 मार्च 2015

स्वामी बालेन्दु आश्रम में आए हुए मेहमानों का ज़िक्र करते हुए बता रहे हैं कि कैसे न सिर्फ उनके साथ समय गुज़ारना बड़ा सुखद है बल्कि हर तरह के परिवर्तनों को साथ-साथ महसूस करना भी अत्यंत आनंददायक है!

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खुद अपने आप पर भरोसा करें: आप परिवर्तन ला सकते हैं और उनसे लाभ भी उठा सकते हैं – 25 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि बदलावों को स्वीकार करने के लिए अधिक विश्वास की जरूरत पड़ती है। अनजान रास्तों पर निकल पड़ने से न घबराएँ।

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बदलाव को स्वीकार करें और अपनी खुशी को महत्व दें – 24 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे लोग बाहरी परिवर्तनों को लेकर विचलित होते हैं और दुख में डूब जाते हैं। नई परिस्थितियों को स्वीकार करना सीखें और खुश रहें!

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पूरी तरह धर्म रहित अनुभव के लिए हमारे आश्रम में आपका स्वागत है – 10 फरवरी 2015

स्वामी बालेंदु अपने आश्रम और दूसरे धार्मिक आश्रमों के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए बता रहे हैं कि लोग क्यों उनके जैसे गैर-धार्मिक आश्रमों में आना पसंद करते हैं।

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क्या मैं पैसे कमाने के लिए नास्तिक हो गया – 8 फरवरी 2015

जब स्वामी बालेंदु को पता चला कि उनके एक पुराने दोस्त को यह शक हो रहा है कि वे पैसा कमाने के लिए नास्तिक हो गए हैं तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी? पूरी कहानी यहाँ पढ़िए!

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