चिंता, अवसाद और निष्क्रियता के लिए एक नास्तिक और भूतपूर्व गुरु के द्वारा बताई ध्यान की इस विधि का प्रयोग करें – 15 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु संत्रासग्रस्त, अवसादग्रस्त या चिंताग्रस्त लोगों की मदद के लिए योग की युक्तियाँ बता रहे हैं, जिन्हें एक के बाद एक क्रमशः अमल लाने पर लाभ हो सकता है। अगर आप भी उनमें से एक हैं तो इन्हें आजमाइए, अवश्य लाभ होगा!

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अपने अत्यल्प साधनों से भी योगदान करें क्योंकि छोटी चीज़ का भी असर होता है – 6 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु लोगों प्रोत्साहित करते हुए निवेदन कर रहे हैं कि दुनिया में हो रही बुरी बातों पर निराश और अवसादग्रस्त होने की जगह वे अपनी सीमा में रहते हुए अच्छे काम करते रहें।

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क्या आपके ‘जीवन का सबसे खराब समय’ चल रहा है? उससे बाहर निकलिए! 9 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे आप उन परिस्थितियों से बाहर निकल सकते हैं, जिसके कारण आपको वह समय जीवन का सबसे बुरा समय लग रही हैं।

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अगर आप बहुत व्यस्त होने के कारण मौज-मस्ती नहीं कर पाते तो आपके साथ कहीं न कहीं कोई गड़बड़ ज़रूर है – 2 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि ‘बहुत व्यस्त हूँ’, ‘बहुत थका हूँ’ या ‘अवसादग्रस्त हूँ’ जैसे बहाने बनाकर आपको होली जैसे मस्ती भरे त्योहार से दूर नहीं भागना चाहिए! वे ऐसा क्यों समझते हैं, यहाँ पढिए!

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धन-केन्द्रित समाज में अपने बच्चों को सभ्य इंसान बनाना – 1 अप्रैल 2014

स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं कि कैसे स्वतन्त्रता-विहीन, सारिणीबद्ध पढ़ाई बच्चों को वही काम करने की ओर प्रवृत्त करती है, जो उन्हें बाहर से सिखाया जाता है।

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मुख्य रूप से पश्चिमी (विदेशी) मेहमानों वाला एक आश्रम – 11 फरवरी 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों उनके आश्रम में ज़्यादातर मेहमान पश्चिमी देशों से आते हैं और यह भी कि भविष्य में उसमें किस तरह के परिवर्तन की संभावनाएं हैं।

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गहरे अवसाद और बर्न आउट के बाद वापस सामान्य होने की लम्बी और थका देने वाली प्रक्रिया- 22 अगस्त 2013

स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं, जो शारीरिक और मानसिक क्षय से पीड़ित हैं और अब उससे उबरना चाहते हैं। ऐसे लोगों को क्या चाहिए और उन्हें क्या करना चाहिए, इस विषय पर एक सलाह।

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सफलता और शिखर पर पहुँचने की महत्वाकांक्षा कहीं तनाव, अवसाद और पतन की राह पर न ले जाए! 21 अगस्त 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह कई लोग समय से पहले बूढ़े हो जाते हैं। हर तरह का तनाव और दबाव उन्हें ध्वस्त कर देता है-और अंत में जब जीवन का उन्हें कोई अर्थ नज़र नहीं आता तो अवसादग्रस्त हो जाते हैं।

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पूर्णकालिक स्कूल – क्या हम अपने बच्चों को रोबोट बना देना चाहते हैं? – 8 जुलाई 2013

जब स्वामी बालेंदु ने सुना कि जर्मनी के प्राथमिक स्कूल अब पूर्णकालिक स्कूल हो जाएंगे तो उन्हें दुखद आश्चर्य हुआ। इस विषय में उनके विचार यहाँ पढ़ें।

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