जब मुझे अछूत के पास बैठने पर आगाह किया गया – 4 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु उनके साथ हुई एक घटना की चर्चा कर रहे हैं, जो दर्शाती है कि किस तरह आज भी भारतीय समाज के दैनिक व्यवहार में जाति-समस्या पूरी तरह व्याप्त है!

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हमारे स्कूल में व्यावहारिक उदाहरणों की सहायता से समानता का सिद्धान्त की शिक्षा – 24 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि उनके स्कूल में बराबरी का सिद्धांत किस तरह सिखाया जाता है- खुद उसे व्यवहार में लाकर व्यावहारिक तरीके से भी और बातचीत के द्वारा भी।

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जब परिवार वाले अस्पृश्यता पर अमल करें तब उनके प्रति आप सहिष्णु नहीं रह सकते – 24 दिसंबर 2014

स्वामी बालेंदु उन परिस्थितियों का वर्णन कर रहे हैं, जहाँ आप सहिष्णु बने नहीं रह सकते, विशेषकर अपने करीबी रिश्तेदारों की आस्थाओं और अंधविश्वासों को लेकर: जैसे अस्पृश्यता के मामले में।

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विपरीत ध्रुव एक दूसरे को आकृष्ट करते हैं! फिर अपनी ही जाति या उपजाति में विवाह पर इतना आग्रह क्यों? 22 अक्टूबर 2013

स्वामी बालेंदु यह प्रश्न उठा रहे हैं कि भारतीय अपनी ही जाति या उपजाति में विवाह तय करने पर इतना ज़ोर क्यों देते हैं, जबकि भिन्न-भिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आए लोगों के बीच ज़्यादा सुखी और दीर्घजीवी दांपत्य-जीवन की संभावना हो सकती है।

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धर्म में विरोधाभास – पिछले जन्मों के कर्म आपके पास हैं या नहीं? – 4 फरवरी 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि धर्म ने अपना लचीलापन बनाए रखते हुए किस तरह दो विपरीत दार्शनिक मान्यताओं को अपने में समेट लिया है।

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