नास्तिक दूसरों की सहायता करने के लिए अच्छे काम करते हैं, पुण्य कमाने के लिए नहीं – 29 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि नास्तिक अच्छा काम इसलिए करते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि वह काम करना उचित है, इसलिए नहीं कि उससे उन्हें पुण्य मिलेगा या ईश्वर ने वैसा करने के लिए कहा है!

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कर्म सिद्धान्त के अनुसार नेपाल के भूकंप पीड़ित सहायता के पात्र नहीं हैं – 29 अप्रैल 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों कर्म-सिद्धान्त पर विश्वास करने वालों को अपने दर्शन पर पुनर्विचार करना चाहिए। अगर अपने कर्मों के कारण लोग मुसीबतों में फँसते हैं तो यह ईश्वर की इच्छा है- और इसलिए वे मदद के पात्र नहीं हैं!

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"’ईश्वर महज अपना काम कर रहा है" – धार्मिक आस्थावानों का नेपाल के भूकंप पर स्पष्टीकरण – 28 अप्रैल 2015

प्रार्थनाओं पर लिखे गए अपने ब्लॉग पर आई टिप्पणी पर स्वामी बालेन्दु प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। टिप्पणी करने वाले ने कहा कि ईश्वर अच्छी तरह जानता है कि वह क्या कर रहा है!

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अपनी जिम्मेदारियों से बचने का गुरु प्रदत्त सम्मोहक प्रस्ताव – 3 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि किस तरह हिन्दू धर्म में किस तरह गुरुवाद को बढ़ावा दिया गया है और उसके क्या दुष्परिणाम होते हैं|

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मंगलवार को भगवान आपकी रक्षा करते हैं – बेवकूफाना अंधविश्वास! – 5 मार्च 13

स्वामी बालेंदु बताते हैं कि कई लोग इस बात पर हैरान हैं कि उनके मित्र के साथ मंगलवार के दिन दुर्घटना क्यों घटी, यह तो एक मंगलकारी दिन होता है; और कैसे वे अपनी बात का औचित्य ठहराते हैं|

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कर्म का सिद्धांत लोगों को अपनी जिम्मेदारियों से भागने की सुविधा प्रदान करता है – 05 फरवरी 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह कर्म का सिद्धांत (धार्मिक) लोगों को धर्म की आड़ में वास्तविक प्रश्नों को अनदेखा करने और अपनी जिम्मेदारियों से बचने की सुहुलियत मुहैया कराता है।

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धर्म में विरोधाभास – पिछले जन्मों के कर्म आपके पास हैं या नहीं? – 4 फरवरी 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि धर्म ने अपना लचीलापन बनाए रखते हुए किस तरह दो विपरीत दार्शनिक मान्यताओं को अपने में समेट लिया है।

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मुक्ति या स्वर्ग? अपने कर्म के दर्शन से हिन्दू धर्म लोगों को भ्रमित करता है! – 1 फरवरी 2013

स्वामी बालेंदु कर्म के दर्शन के बारे में बता रहे हैं। साथ ही वे पूछना चाहे हैं कि जो लोग कुम्भ मेले के दौरान संगम में नहाने जाते हैं वे किसकी कामना करते हैं: मुक्ति की या स्वर्ग की

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कर्म के तीन प्रकार-संचित,प्रारब्ध एवं क्रियमाण – 14 May 08

Excerpt of Swami Ji?s lecture about the eastern philosophy of the three Karmas: Sanchit, Prarabhdh and Kriyman.

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कर्म अच्छा हो या बुरा बंधन का ही कारण है – 28 अप्रैल 08

Swami Ji talks about how good and bad Karma is both binding you. If it is with handcuffs of iron or of gold, both binds you.

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