बात करने के लिए कभी-कभी आपको किसी दूरस्थ मित्र की ज़रूरत पड़ती है – 8 सितंबर 2015

हाल ही में मैं अपने एक मित्र से बात कर रहा था। वह आस्ट्रिया में रहता है और उससे मेरी मुलाक़ात छह साल पहले अपने आस्ट्रिया दौरे के समय हुई थी। इस बीच हम लोग कभी-कभार बात करके एक-दूसरे के हालचाल ले लिया लिया करते थे, एक दूसरे की गतिविधियों के बारे में पूछ-ताछ कर लेते थे। पिछले हफ्ते उसका फोन आया, सिर्फ मौसम का हाल जानने के लिए नहीं बल्कि एक मित्र के रूप में, मुझसे मदद चाहता था।

हर व्यक्ति जानता है कि मित्र होते ही इसलिए हैं कि ज़रूरत पड़ने पर उनकी मदद ली जा सके। लेकिन ऐसे मौके भी आते हैं, जब आप अपनी कुछ बातें अपने करीबी मित्रों को नहीं बता सकते, आप कुछ बातें उनके साथ साझा करने में संकोच करते हैं। ऐसे वक़्त, आपका कोई ऐसा दूर रहने वाला मित्र हो, जो सारी परिस्थिति को कुछ दूर से देख-समझ सके, तो अच्छा होता है। मेरे आस्ट्रियाई मित्र के साथ कुछ ऐसा ही था।

जब पहले-पहल मेरा उससे परिचय हुआ था, तब, हाल ही में अपनी पत्नी और दो छोटे-छोटे बेटों के साथ वह अपने नए घर में रहने आया था। नई जगह में नए जीवन की शुरुआत करते हुए वे बहुत उल्लसित थे। उनका बड़ा बेटा उसी साल स्कूल जाना शुरू करने वाला था और सब कुछ बढ़िया चल रहा था।

फोन पर उसने मुझे बताया कि परिस्थितियों में बहुत सारी तब्दीलियाँ आ चुकी हैं। उसे पता चला है कि सालों से उसकी पत्नी उसके साथ छल कर रही थी और उनके साझा दोस्त के साथ उसके संबंध थे। इसलिए वह उससे अलग होकर तलाक लेना चाहता था। उसका दिल टूट चुका था और वह यह निर्णय ले भी चुका था: अर्थात, वह उसे भूल भी नहीं पा रहा था और उससे संबंध भी तोड़ना चाहता था।

यह समझने के लिए कि वह अपने स्थानीय मित्रों से इस बारे में बात क्यों नहीं कर सकता था, आपको दो और बातें जाननी आवश्यक हैं। मेरा दोस्त बहुत छोटे से गाँव में रहता था, जहाँ हर कोई अक्षरशः एक-दूसरे को जानता है। संबंध टूटने या संबंध में तनाव होने जैसी कोई भी खबर वहाँ छिपी नहीं रह सकती थी- बाज़ार-मुहल्लों में इसकी चर्चा होनी शुरू हो जाती और तुरंत हर कोई इसे जान सकता था।

दूसरा कारण यह था कि उसकी पत्नी कुछ समय से शराब की आदी हो चुकी थी। मेरे मित्र ने पत्नी की मदद की लेकिन इस बात का भी भरसक प्रयास किया कि गाँव में यह बात न फैले। वह अपनी पत्नी को, परिवार की प्रतिष्ठा को और बच्चों को इन सब परेशानियों से दूर रखना चाहता था और उन्हें बदनामी से बचाना चाहता था।

और अभी भी वह यही कर रहा था। वह अपना सिरदर्द अपने दोस्तों के साथ साझा नहीं करना चाहता था-वह अपनी वैवाहिक समस्याओं के बारे में उनसे कहना नहीं चाहता था सिर्फ इसलिए कि सारा गाँव तुरंत इस बात को जान जाएगा। दूसरी समस्या यह थी कि पत्नी की शराब की लत की वजह से वह अपने बेटों को उसके पास छोडना नहीं चाहता था! बिना पत्नी को तकलीफ पहुँचाए यह बात भी वह किसी से नहीं कह सकता था- कम से कम वह ऐसा समझता था! क्योंकि, हर कोई वह बात जान जाएगा, जिसे वह इतने समय से छिपाने की कोशिश कर रहा था!

तो इस तरह उसने मुझे यह पूछने के लिए फोन किया था कि क्या किया जाए।

सबसे पहले तो मैंने उससे कहा कि उसके और शीघ्र ही भूतपूर्व हो जाने वाली पत्नी के विषय में लोग क्या सोचेंगे, उसे इस बात की चिंता छोड़ देनी चाहिए! उससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। उसके दिल में मची हलचल, उसकी भावनाएँ और उसके बच्चे अधिक महत्वपूर्ण हैं! इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे क्या सोचते हैं और दूसरे क्या कहेंगे- उसके बच्चों को सुरक्षित होना चाहिए! उसे चिंता न करने की सलाह देने के अलावा मैंने उससे कहा कि किसी अच्छे वकील से मिलकर उससे सारी बातों की चर्चा करे।

फिर अपने दोस्त से मिले और बात करे। आपको चाहिए कि अपने अंदर की बात किसी न किसी को अवश्य बताएँ! उसकी पत्नी को शराब की लत के संबंध में मदद की ज़रूरत है और यह बात छिपाकर कोई लाभ नहीं है, उससे यह लत छूटने वाली नहीं है। उसे दबाने की कोशिश करके वह उसकी कोई मदद नहीं कर रहा होगा-और अंत में मैंने उससे कहा कि अब तुम्हारे बेटों को तुम्हारी ज़रूरत है!

मैंने उसे उससे कहा कि कैसे गाँव छोड़कर किसी दूसरे शहर में रहना भी एक विकल्प हो सकता है, फिर से एक नया जीवन शुरू करना- लोगों की बेकार चर्चाओं से, अफवाहों, कानाफूसियों से दूर किसी शांत जगह में। इस बीच एक दिन सब ठंडा पड़ जाएगा और सिर्फ वही, जो उसके सच्चे मित्र हैं, उसके साथ खड़े रहेंगे!

वह खुश हुआ, मुख्य रूप से इसलिए कि वह किसी से अपनी बात साझा कर सका। और मैं खुश हूँ कि मेरे ऐसे मित्र भी हैं, जो आवश्यकता पड़ने पर मुझे, इतनी दूरी के बावजूद, याद कर लेते हैं!

मानसिक शांति अधिक महत्व्पूर्ण है या धन-दौलत? 30 नवम्बर 2014

सन 2007 में मैं फिर से कुछ हफ्तों के लिए आस्ट्रेलिया यात्रा पर निकल गया था। जब एक साल पहले मैं वहाँ था तब एक दंपत्ति के साथ रहा था, जो हर वक्त लड़ते रहते थे। मुझे बड़ा आश्चर्य होता था कि जब वे पूरे समय लड़ते रहते हैं तो फिर एक साथ क्यों रहते हैं! जबकि दोनों मेरे आने से बड़े खुश थे, पुरुष के साथ मेरा संपर्क अधिक रहा और उनके आपसी संबंधों के बारे में मेरी उससे काफी बातचीत भी हुई। वह किसी भी हालत में उस महिला से अलग नहीं होना चाहता था और अपने इस दृढ निश्चय के उसने कुछ बहुत ठोस कारण भी बताए। लेकिन जब मैं 2007 में पुनः उससे मिला तो पता चला, उसने अपना इरादा बदल दिया है।

जब मुझे मित्र ने सम्बन्ध टूटने का कारण बताया तो वास्तव में मैं बहुत अचंभित हुआ। इस महिला के साथ वह पाँच साल से रह रहा था। उनके बीच सम्बन्ध की शुरुआत के साल भर बाद ही वह महिला उसके साथ रहने आ गई थी। जिस घर में वह रहता था वह उसी का घर था और घर के आसपास की काफी बड़ी और कीमती ज़मीन का मालिक भी वही था। आस्ट्रेलिया में मैंने खेतों और बाग़-बगीचों वाले ऐसे बहुत से घर देखे थे। अच्छी-खासी बहुत विशाल स्थान और निश्चित ही एक व्यक्ति के लिए आवश्यकता से बहुत बड़े। इसलिए जब उसकी गर्लफ्रेंड उसके साथ रहने आई तो स्वाभाविक ही वह बहुत खुश हुआ।

लेकिन लगभग दो साल बाद ही उनके बीच मुश्किलें पैदा होनी शुरू हो गईँ । छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगे। फिर वे लड़ाइयाँ बड़ी और महत्वपूर्ण बातों तक भी खिंचती चली गईँ। जब 2005 में मैं उनके यहाँ आया था तब उन्हें साथ रहते हुए चार साल हो चुके थे और वे लगभग रोज़ ही छोटी-मोटी बातों पर लड़ते-झगड़ते रहते थे और उनके झगड़े बड़े वाद-विवादों में परिणत हो जाते, जिनमें पिछले झगड़ों को याद कर-करके एक-दूसरे पर दोषारोपण किया जाता और इस तरह उनके बीच तनाव बढ़ता जा रहा था। दरअसल मुझे एहसास हो चुका था कि दोनों एक-दूसरे के प्रति इतने कटु हो चुके हैं कि उनके बीच प्रेम का कोई स्थान नहीं हो सकता था।

जब मैंने नपे-तुले शब्दों में इस बात को उसके सामने रखा तो मुझे लगा वह भी इस बात को अच्छी तरह जानता-समझता है। उसने कुछ भी छिपाया नहीं और तब मैंने उससे साफ़ शब्दों में कहा, ‘तो फिर तुम अलग क्यों नहीं हो जाते?’

तब मुझे पता चला कि आस्ट्रेलिया में एक क़ानून है, जिसके अनुसार साथ रहने वाले दो व्यक्तियों को एक-दूसरे की संपत्ति में हक़दार होने के लिए शादीशुदा होना आवश्यक नहीं है। मेरे मित्र ने मुझे बताया कि भले ही यह जगह उसकी मिल्कियत है, उसका एक हिस्सा अब उसकी भूतपूर्व साथी का हो चुका है क्योंकि वह उसके साथ दो साल से अधिक समय तक रह चुकी है। तो भले ही वे अलग हो जाएँ, भले ही वह छोड़कर चली जाए, कानूनन वह मित्र की संपत्ति के एक हिस्से की मालिक मानी जाएगी।

मेरे यह पूछने पर कि क्या पूरे समय लड़ते हुए साथ रहना और इस तरह अपनी मानसिक शान्ति खोना उचित है और वह भी सिर्फ संपत्ति के पीछे या पैसे के पीछे, तो वह कुछ देर के लिए खामोश हो गया कुछ कह नहीं पाया लेकिन अंत में, निर्णयात्मक स्वर में उसने कहा: नहीं, यह सिर्फ पैसे या धन-दौलत के लिए नहीं था-संभव है हमारे बीच यह छोटे से अंतराल के लिए हो और कुछ समय बाद हम फिर एक साथ रहने लगें!

जैसा कि मैंने बताया, जब 2007 में मैं दोबारा उनके घर पहुँचा, उसने यह प्रयास छोड़ दिया था। उनका सम्बन्ध-विच्छेद हो चुका था, वह उसे छोड़कर जा चुकी थी और मेरे मित्र ने अपनी ज़मीन का एक हिस्सा बेचकर उस महिला को उसकी कीमत अदा कर दी थी। अपनी मानसिक शान्ति के लिए अदा की गई एक छोटी सी कीमत-और वास्तव में उसके बाद वह बहुत खुश हुआ होगा!

इस बात ने मेरी इस धारणा को और भी दृढ़ कर दिया कि ख़ुशी और मानसिक शान्ति प्राप्त करने की राह में कोई भी चीज़ बाधा नहीं बननी चाहिए, धन-दौलत, ज़मीन-जायदाद, कुछ भी नहीं।

धोखेबाज़ी का नियम: आप दूसरों को धोखा दे सकते हैं, दूसरे आपको नहीं! 07 जुलाई 2014

हाल ही में आयोजित अपने व्यक्तिगत-सलाह-सत्रों के बारे में मैं आपको बताता रहा हूँ क्योंकि मेरे खयाल से उनमें आपकी भी दिलचस्पी हो सकती है कि खुदा न खास्ता आप भी वैसी ही किसी उलझन में पड़ जाएँ और तब ये कहानियाँ आपके किसी काम आ सकें। आशा करता हूँ कि आज मैं जिस समस्या का ज़िक्र कर रहा हूँ उसमें आप नहीं फँसेंगे और अगर फँस भी गए तो उस महिला की तरह परेशान नहीं होंगे जो मेरे एक ऐसे ही सत्र में आई थी। विशेष रूप से इसलिए कि मैं आपको सलाह दुँगा कि अपने साथी से धोखेबाज़ी कभी न करें! लेकिन मैं शुरुआत से बताता हूँ कि क्या हुआ।

अपने रिश्ते में आई खटास की समस्या लेकर एक महिला मेरे पास आई। आते ही सबसे पहले उसने मुझे आगाह किया कि उसकी समस्या कुछ जटिल है और पूरी बात समझाने में कुछ वक़्त लगेगा। अतीत में उसके बहुत से पुरुषों के साथ सम्बन्ध रहे हैं और ऐसे एक लम्बे चले रिश्ते से उसका बच्चा भी है। गनीमत यह कि वर्तमान साथी के साथ पिछले चार साल से उसके सम्बन्ध स्थिर और पर्याप्त कामयाब हैं-लेकिन समस्या यह है कि वह शादीशुदा है! अर्थात यह भी उसका कोई स्थाई सम्बन्ध नहीं है-सिर्फ कामचलाऊ सम्बन्ध ही है।

उसके प्रेमी ने-क्योंकि आप उसे ‘साथी’ तो कह नहीं सकते- उससे शुरू में ही कह दिया था कि वह अपनी पत्नी को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेगा। उसकी तरफ से यह स्पष्ट सन्देश था कि: हम हमबिस्तर होकर मज़े तो लूटेंगे, मैं अपनी पत्नी के साथ धोखा करते हुए तुम्हारे साथ अलग से भी सम्बन्ध रखता रहूँगा लेकिन तुम मुझसे यह अपेक्षा मत करना कि अपनी पत्नी को छोड़कर और दूसरी चीज़ें छोड़कर मैं तुम्हारे साथ रहने चला आऊँगा! यह मैं नहीं चाहता और न ही ऐसा करूँगा! और वह इस बात पर सहमत भी हो गई थी।

मैंने अपने ब्लॉगों में कई बार कहा है कि आप बहुत समय तक किसी के बहुत करीब रहें, उसके साथ कई बार हमबिस्तर हों, प्यार करें (‘मेक लव’, जैसा कि अंग्रेजी में सुन्दर शब्दों में कहा जाता है) और उसके बाद कहें कि अपने प्रेमी के साथ आपका कोई लगाव नहीं है तो यह संभव ही नहीं है। तो उस महिला ने कहा कि उसके अन्दर प्रेम जैसा कुछ पैदा हो गया था और जिस तरह समय गुज़र रहा था, उससे वह खुश भी थी। मगर फिर जो उसे पता चला उसने सब कुछ तहस-नहस कर दिया: उसके प्रेमी ने किसी दूसरी औरत से सम्बन्ध स्थापित कर लिए!

यह अजीबोगरीब लगता है मगर स्पष्ट ही अब उसके मन में यह भावना घर कर गई है कि उसके साथ धोखा हुआ है! जी हाँ! यह आदमी उसके साथ सम्बन्ध रखकर अपनी पत्नी के साथ धोखा कर रहा था, वह खुद उसके साथ मिलकर उसकी पत्नी के साथ धोखा कर रही थी लेकिन वह नहीं चाहती कि किसी दूसरी महिला के साथ मिलकर वह अपनी पत्नी और उसके साथ धोखा करे! उसे ईर्ष्या हो रही थी, वह उस दूसरी महिला से नाराज़ थी, जल-भुन रही थी और सबसे बड़ी बात, दुखी थी, जैसे अब उसका यह सम्बन्ध टूट चुका हो। वास्तव में था भी ऐसा ही, हालाँकि इस सम्बन्ध का, वैसे भी कोई भविष्य नही था।

यह किसी फिल्म की कहानी लगती है लेकिन इस फिल्म में जो सबसे अधिक लाभान्वित हुआ वह था वह आदमी जिसने अपनी प्रेमिकाओं को शुरू में ही स्पष्ट कर दिया था कि वह उनसे ज़िन्दगी भर के लिए जुड़े रहने का वादा नहीं कर सकता! इस तरह वह मज़े में उन तीन महिलाओं से सेक्स सम्बन्ध रखे हुए था और इसमें आज तक कोई समस्या भी पेश नहीं आई थी।

मैंने उससे कहा कि उसके लिए उस आदमी के प्रति, जिसके साथ उसने जीवन के चार कीमती साल बर्बाद किए, अपने क्रोध को निकालना बहुत आवश्यक है। यह स्पष्ट था कि वह उससे प्रेम नहीं करता था और वह भी शुरू से यह जानती थी कि इस सम्बन्ध से उसे कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। मैंने उससे साफ शब्दों में कहा: अब तुम्हें इस क्रोध के साथ कुछ समय गुज़ारना ही होगा और उसके बाद तुम इस व्यक्ति को अपने जीवन से निकाल बाहर करो और कोई ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ो जो तुमसे प्यार करता हो!

दूसरे नजरिए से देखा जाए तो समझ में आता है कि मनुष्य अनजाने में अपने दिमाग का उपयोग किस तरह खुद अपने आप को ठगने में करता है! आप यह कैसे मान सकते हैं कि जब आप दूसरों के साथ धोखा करते हैं तो वह ठीक होता है जबकि कोई दूसरा आपके साथ यही करे तो आपको तकलीफ होती है?

परस्पर विपरीत रुचियों के चलते रिश्तों में आने वाली दिक्कतें – 18 दिसंबर 2013

परसों मैंने बताया था कि यह संभव है कि आपके दोस्तों और परिवार वालों के विचार आपसे बिल्कुल विपरीत हों। कल मैंने लिखा था कि आपको इस तथ्य को हर हाल में स्वीकार करना ही पड़ता है भले ही इस कारण आपकी मित्रता उतनी अंतरंग न हो सके जितनी कि आप चाहते हैं। जब आप बदलते हैं तो आवश्यक नहीं कि आपके आसपास के लोग भी बदल ही जाएँ या बदलें तो किसी और ही रूप में बदलें। सबसे बुरा यह होता है कि आपका जीवन-संगी या आपकी जीवन-संगिनी ऐसे हों। तब क्या हो, जब वह व्यक्ति आपके अनुसार न बदल पाए, जिसके साथ आपको सारा जीवन बिताना है?

दुर्भाग्य से मैं बहुत से ऐसे लोगों को जानता हूँ जो इस परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। उनके विचार समय बीतने के साथ बदलते गए हैं लेकिन उनके जीवन साथी उस दिशा में उतना विकास नहीं कर सके। अब आपके साथ एक ऐसा व्यक्ति रह रहा है, जिसके साथ जीवन भर साथ रहने की आपने कसमें खाई हैं, जिसे आप दुनिया में सबसे ज़्यादा प्यार करना चाहते हैं, जिसके लिए आप सब कुछ छोड़ सकते हैं-लेकिन आप दोनों के विचार आपस में नहीं मिलते!

आप दोनों एक दूसरे से प्रेम करने का इरादा रखते हैं लेकिन इतने सारे विषय हैं, जिन पर आप बात ही नहीं कर सकते क्योंकि आप जानते हैं कि आपका साथी आपकी बात पसंद नहीं करेगा, आपके विचारों और आपके निर्णयों का प्रतिवाद करेगा और आपकी भावनाओं का समर्थन नहीं करेगा। आप उसके साथ बहुत सी बातों को साझा करने में हिचकते हैं और चिंतित होते हैं कि कैसे आप दिन-ब-दिन उससे दूर होते जा रहे हैं।

स्वाभाविक ही, इस मामले में आपका वह रवैया नहीं हो सकता जैसा एक मित्र के साथ संभव हो सकता है कि सप्ताह में एक बार फोन कर लिया या माह में एकाध बार मिल लिए। आपका 24 घंटे का साथ है और आप रहना भी चाहते हैं लेकिन फिर सवाल खड़ा हो जाता है कि अब, इसके बाद एक-दूसरे का क्या करें! आपके दिलों के बीच दूरी पैदा होने लगती है, आप लंबी और आत्मीय बातचीत नहीं कर सकते और सिर्फ मौसम और राजनीति पर बात करते हुए संबंध सामान्य नहीं बने रह सकते! उसके लिए कुछ अंतरंग वार्तालाप की ज़रूरत पड़ती है और जो नदारद है!

आप आने वाली समस्याओं की कल्पना कर सकते हैं। असहमतियाँ, झगड़े, निःशब्दता, मौन, यौनेच्छा की कमी या शायद कुछ समय बाद किसी दूसरे के साथ सेक्स संबंध की इच्छा, क्रोध, कुंठा और निराशा और उन लोगों के संदर्भ में, जो आपसी निकटता हासिल करने में असमर्थ होते हैं, दुर्भाग्यपूर्ण अलगाव।

अगर आप इस अवस्था में है तो मैं आपसे इतनी ही गुजारिश करूंगा कि अपने साथी से बात करें, चर्चा करें। लगातार चर्चा करते रहें। अपना दिल खोलकर रख दें कि आप क्या महसूस कर रहे हैं और क्यों वैसा महसूस कर रहे हैं। मैं आशा करता हूँ कि वह, जिसे आप प्यार करते हैं और जो आपसे प्यार करता है, दोनों एक-दूसरे को समझ सकेंगे। भले ही वह आपके जैसा ही महसूस न कर सके मगर इतना ही काफी होगा अगर वह आपके विचारों को स्वीकार कर ले और उन संवेदनाओं और प्रेरणाओं को जान ले, जिन पर आपके निर्णय आधारित होते हैं। दिल को सदा खुला रखें और कुछ भी छिपाएँ नहीं।

आपको भी यह समझने की कोशिश करनी होगी कि क्यों आपका साथी आपकी बात समझने में असमर्थ हो रहा है या क्यों वह उसे समझने का इच्छुक ही नहीं है। आपको भी दूसरे के विचारों का आदर करना होगा और अपने साथी की मदद करनी होगी भले ही इसका नतीजा कहीं बीच में किया गया समझौता ही क्यों न हो। कोई ऐसी बात खोजिये, जिसकी आप दोनों को चिंता है, जिसकी आप परवाह करते हैं और सम्बन्धों के उन आयामों को महत्व दीजिये, जिन पर आप दोनों एकमत हैं, एक जैसे विचार रखते हैं। परस्पर संबंध में आवेग पैदा कीजिए और आप पाएंगे कि आप पुनः एक-दूसरे के साथ वैसा ही उत्कट प्रेम महसूस कर रहे हैं।

हम सब भिन्न मिट्टी के बने हुए हैं और जब हम किसी से दिल की गहराइयों से प्रेम करते हैं तो हमें थोड़ी सी परस्पर समानता की आवश्यकता होती है और यह समानता सिर्फ इतनी-सी भी हो सकती है कि हम सब मनुष्य हैं!

उस मित्रता का अंत कर दें, जो आपको सिर्फ थकाने का काम करती है- 26 सितंबर 2013

जैसा कि मैंने कल लिखा था, आप अक्सर पाएंगे की आपकी मित्रताएँ जैसी हैं, वैसी ही ठीक हैं, भले ही वे वैसी नज़र नहीं आतीं, जैसी मुख्य धारा का मीडिया अच्छी मित्रता के बारे में प्रचारित करता है। लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि आपको लगे कि आपकी मित्रता गलत दिशा में जा रही है, कि आपका मित्र आपका अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है, या कोई और मामला, जो आपके मन में उस मित्र के प्रति संदेह पैदा कर दे और आप सोचने लगें कि उसके साथ आगे मित्रता जारी रखना ठीक नहीं होगा। ऐसे मामलों में अक्सर हम मित्रता समाप्त करने में हिचकिचाते हैं। लेकिन अगर वह आपको तकलीफ दे रही है तो आपको समझना चाहिए कि उसे समाप्त करना उचित ही होगा!

मित्रता समाप्त करने का निर्णय लेना आसान नहीं होता, खासकर तब जब ज़ाहिरा तौर पर आपकी उस मित्र के साथ कोई लड़ाई न हुई हो या कोई ऐसा बिन्दु न हो, जिससे आपको लगे कि मित्रता तोड़ना ही ठीक है। इस बात का ध्यान रखें कि मैं जहां तक हो सके, मित्रता जारी रखने का पक्षधर रहा हूँ लेकिन ऐसा करते हुए एक बात लोग अक्सर भूल जाते हैं: मित्रता हमेशा दोनों के लिए पुष्टिकारक और मजबूती प्रदान करने वाली होनी चाहिए, थका देने वाली नहीं। न ही ऐसी कि आपका मन इस बात से परेशान हो जाए कि मित्र आपका लाभ उठा रहा है। अगर उसके साथ होने वाली हर मुलाक़ात के बाद आप ठगा सा महसूस करते हैं या आपके मन में यह बात आती है कि आप हर बार देते ही चले आ रहे हैं और बदले में आपको कुछ भी प्राप्त नहीं हो रहा है तो निश्चित समझिए कि कुछ न कुछ गलत हो रहा है।

ऐसे वक़्त मैं हमेशा अपनी भावनाओं को मित्र के साथ साझा करके, मित्रता को बचाने की कोशिश करने की सलाह देता हूँ। अगर आपको लग रहा है कि आपका मित्र आपसे हमेशा कोई न कोई लाभ प्राप्त करता रहता है तो शालीनता के साथ, सीधे उससे बात करके, मामले को सुलझाने का प्रयास करें। अगर बात न बने और समस्या बनी ही रहती है तो उसे ओढ़े रहना व्यर्थ है। आपने सुलझाने का प्रयास किया लेकिन वह आपकी ऊर्जा और शक्ति नष्ट ही कर रही है, न कि उसमें इजाफा कर रही है, तो फिर उसे छोड़ देना ही उचित है।

लेकिन मित्रता तोड़ना एक चुनौती है! खासकर अगर वह लंबे समय से चली आ रही मित्रता है, साथ बिताए समय की बहुत सी सुखद स्मृतियाँ हैं और आप दोनों एक-दूसरे को बहुत करीब से जानते हैं। लेकिन अगर एक बार आपने मित्रता खत्म करने का निर्णय ले लिया है तो उसे परिणति तक पहुंचाएँ क्योंकि आपने अच्छी तरह से समझ लिया है कि वह आपके लिए लाभकारी नहीं है। आपको लगेगा कि इससे आपको बहुत दुख होगा लेकिन अक्सर आप पाएंगे कि अनुचित व्यवहार काफी समय चला और अच्छा हुआ कि अब मुक्ति मिल गई। शायद आप उन मित्रों के लिए पुलकित हो रहे थे, जो शुरू में थे न कि उनके लिए, जो अब आपके साथ हैं। इस दिशा में सोचने पर आप, इस घटना से अप्रभावित रहते हुए, बेहतर महसूस करेंगे।

जब मैं ऐसी मित्रता को समाप्त करने की बात करता हूँ तब मेरा मतलब यह नहीं होता कि आप वाद-विवाद शुरू कर दें या उसके साथ लड़े-झगड़ें या उसे इतना बड़ा मामला बना डालें कि ऐसा लगे जैसे आपके बीच कोई तीखा संघर्ष शुरू हो गया हो। यह आवश्यक नहीं है! मामले को बहुत तूल देने की ज़रूरत नहीं है-सिर्फ उस मित्र के साथ बिताए जाने वाले समय में धीरे-धीरे कटौती करते चले जाएँ और दूसरों के साथ ज़्यादा समय बिताएँ और अपने लिए भी अतिरिक्त समय निकालें। अपने आपको मुक्त छोड़ दें, कहीं जाकर पार्टी करें, थोड़ा सा अपने आप में रहें और महसूस करें कि उसके बगैर आपको कैसा लग रहा है-आप महसूस करेंगे कि दरअसल अच्छा ही लग रहा है।