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हर साल घर में पानी घुस जाता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 18 दिसंबर 2015

परोपकार

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के दो सबसे गरीब परिवार से आने वाले बच्चों का परिचय करवा रहे हैं। हर साल बारिश में यमुना की बाढ़ का पानी उनके घर में प्रवेश कर जाता है!

नाई, जिसके पास स्कूल की फीस भरने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं – हमारे स्कूल के बच्चे – 11 दिसंबर-2015

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स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के दो बच्चों का परिचय अपने पाठकों से करवा रहे हैं। उनका पिता नाई है और इतना नहीं कमा पाता कि उन्हें स्कूल भेज सके।

टायर मरम्मत के काम से इतनी कमाई नहीं होती कि स्कूल की फीस भरी जा सके – हमारे स्कूल के बच्चे – 4 दिसंबर 2015

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स्वामी बालेंदु अपने चैरिटी स्कूल की दो लड़कियों का परिचय अपने पाठकों से करवा रहे हैं, जिनके नाम सुनीता और कविता हैं। इन लड़कियों के बारे में पढ़िए और उनके घर और परिवार का वीडियो भी देखिए।

सिर्फ आधा माह काम करके परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 27 नवंबर 2015

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स्वामी बालेंदु अपने स्कूल की एक लड़की का परिचय अपने पाठकों से करवाते हुए उसके परिवार की व्यथा-कथा लिख रहे हैं और बता रहे हैं कि कैसे काम के अवसरों की कमी के चलते पिता के लिए परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता है और परिवार हर समय आर्थिक कठिनाइयों से जूझता रहता है।

जब पिता बनने की ज़िम्मेदारी सिर पर पड़ी तभी पैसे कमाना शुरू किया – हमारे स्कूल के बच्चे – 20 नवंबर 2015

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स्वामी बालेंदु अपने पाठकों से अपने स्कूल के एक लड़के का परिचय करवा रहे हैं, जिसका परिवार बिना बिजली के दो कमरों वाले किराए के मकान में गुज़र-बसर करता है। पिता पेंटर है-जिसकी कोई औपचरिक योग्यता उसने प्राप्त नहीं की है!

चाय बेचकर स्कूल का खर्च नहीं उठाया जाता – हमारे स्कूल के बच्चे – 13 नवंबर 2015

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स्वामी बालेंदु पाठकों से अपने स्कूल के तीन बच्चों का परिचय करवा रहे हैं। उनका पिता एक चाय की गुमटी लगाता है-लेकिन उससे होने वाली कमाई अब बच्चों की स्कूल-फीस अदा करने के लिए पर्याप्त नहीं होती।

अपने बच्चों के घर दोबारा जाने पर हमें सकारात्मक विकास दिखाई देता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 6 नवंबर 2015

परोपकार

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के एक बच्चे का परिचय करवा रहे हैं, जिसके सहोदर भाई-बहनों के बारे में वे पहले ही अपने ब्लॉग में लिख चुके हैं।

परिवार के साथ मगर संयुक्त परिवार का हिस्सा नहीं – हमारे स्कूल के बच्चे – 30 अक्टूबर 2015

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स्वामी बालेंदु अपने पाठकों से अपने स्कूल के एक लड़के का परिचय करवा रहे हैं, जो नाइयों के एक परिवार का सदस्य है और जो परिवार के दूसरे चार सदस्यों के साथ साझा रसोई वाले एक कमरे के घर में रहते हैं।

गरीबों को सिर्फ निम्न स्तरीय शिक्षा ही नसीब हो सकती है – हमारे स्कूल के बच्चे – 23 अक्टूबर 2015

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स्वामी बालेन्दु अपने स्कूल के दो बच्चों से आपका परिचय करवा रहे हैं, जिनके अभिभावक अपने सबसे बड़े बेटे को सिर्फ एक सस्ते निजी स्कूल में पढ़ाने की हैसियत रखते हैं-और वहाँ वह आज तक ज़्यादा कुछ नहीं सीख पाया!

एक और समारोह, जिसने बच्चों को आश्चर्य में डाल दिया – 19 अक्टूबर 2015

उत्सव

आज आश्रम में आयोजित एक और पार्टी का वर्णन करते हुए स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उनके स्कूल के बच्चों ने न सिर्फ उसमें हिस्सा लिया बल्कि एक सुखद आश्चर्य से भर उठे!

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