अपने बच्चों के घर दोबारा जाने पर हमें सकारात्मक विकास दिखाई देता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 6 नवंबर 2015

आज मैं आपका परिचय एक ऐसे लड़के से करवाना चाहता हूँ जिसके सहोदर भाई-बहनों को हम बहुत समय से जानते हैं। इसका नाम रवि है, जो योगमाया और नीरज का छोटा भाई है। योगमाया और नीरज का परिचय हम एक या डेढ़ साल पहले करवा चुके हैं। रवि अभी नौ साल का है और इसी साल से उसने हमारे स्कूल आना शुरू किया है।

सन 2014 में जब हम उनके घर गए थे तो उनका परिवार टिन की छत वाले एक कमरे के मकान में रहता था। कमरे के अलावा छत कुछ अतिरिक्त जगह भी घेरे हुए थी, जिसके कारण उन्हें थोड़ी सी अतिरिक्त जगह प्राप्त हो जाती है। उनके पास बिजली का पंखा नहीं था और इसलिए बच्चे ज़्यादातर अपने दादा-दादी के यहाँ सोते थे। वैसे भी उस एक कमरे में परिवार के छह सदस्य बड़ी मुश्किल से समा पाते थे।

उस समय हमें पता चला था कि बहुत पहले उन्होंने एक और प्लॉट खरीदा था जिस पर वे एक बड़ा सा मकान बनवाना चाहते थे। उस समय तक यह काम नहीं हो पाया था। इस साल जब हम उनसे मिलने गए तो हमें एक सुखद परिवर्तन देखने को मिला: किसी तरह वे उस प्लॉट पर नया मकान बनवाने में कामयाब हो गए थे, जिसमें अब उनके पास दो कमरे हैं! फिलहाल वह ईंटों से बनी दीवार से ही घिरा हुआ है और उस पर सिर्फ बड़ा सा टिन का शेड भर डाला है, जिससे कमरों के अलावा बरामदे के रूप में कुछ अतिरिक्त जगह भी निकल आई है। निश्चित ही नई जगह में उनके पास गुज़ारा करने के लिए थोड़ी अधिक जगह है!

उनके लिहाज से इतना बड़ा काम मजदूर पिता की मामूली आमदनी से कर पाना बड़ी सफलता मानी जानी चाहिए। पिता महीने में तीसों दिन हाड़तोड़ मेहनत करता है और उसे भाग्यशाली कहा जा सकता है कि उसे रोज़ काम मिल जाता है। बच्चों की माँ बताती है कि वह बहुत भरोसेमंद मजदूर है इसलिए ठेकेदार बिना किसी हीलोहुज्जत के खुशी-खुशी उसे काम पर रख लेते हैं। इससे घर के लिए हर माह थोड़े-थोड़े पैसे बचाना संभव हुआ और उसके बाद बच्चों के दादा-दादी से कुछ पैसे उधार लेकर और पड़ोसियों से कुछ ऋण लेकर परिवार घर बनवाने में सफल हुआ।

इन्हीं आर्थिक परेशानियों के चलते वे घर की नई दीवारों पर प्लास्टर या पेंट नहीं करवा पाए हैं:उनके पास इससे अधिक काम करवाने के लिए पैसे नहीं हैं। अब वे पहले अपना क़र्ज़ चुकाएँगे और पुनः बचत शुरू करेंगे और उसके बाद धीरे-धीरे घर में सुधार करते जाएँगे।

उनकी सबसे बड़ी बहन बहुत पहले हमारे स्कूल आती रही थी लेकिन तीसरी कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी। उसका मन पढाई में नहीं लगता। योगमाया, जिसने हमारे स्कूल की प्राथमिक कक्षाओं तक पढ़ाई की थी, अब किसी दूसरे स्कूल में आगे की पढ़ाई जारी रखे हुए है और नीरज अभी भी हमारे स्कूल में पढ़ रहा है। और अंत में रवि, जो पहले किसी दूसरे स्कूल में पढ़ने जाता था, अब हमारे स्कूल में पढ़ने आ रहा है।

स्कूल आना उसे बहुत पसंद है और उसने अब बहुत से यार-दोस्त बना लिए हैं। कक्षा में वह मन लगाकर पढाई करता है और स्कूल शुरू होने के बाद से कुछ ही महीनों में उसने काफी कुछ सीख लिया है!

किसी एक बच्चे को या बच्चों के दिन के भोजन को प्रायोजित करके आप भी रवि जैसे बच्चों की मदद कर सकते हैं! और इसके लिए हम अभी से आपका शुक्रिया अदा करते हैं।

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