आज मैं आपका परिचय सोनू और रसिक नामक दो भाइयों से करवाना चाहता हूँ जो क्रमशः दस और सात साल के हैं। वे हमारे स्कूल में पिछले तीन साल से पढ़ रहे हैं और अब पहली और दूसरी कक्षा के विद्यार्थी हैं।
पिछले एक साल से दोनों लड़के और उनके माता-पिता उसी घर में रहने लगे हैं जहाँ इशू रहता है, क्योंकि वे चचेरे भाई हैं। जब मैंने आपका परिचय इशू से करवाया था तब मैंने बताया था कि इस घर में कई ऐसे परिवार रहते हैं, जो आपस में रिश्तेदार हैं। उन सभी ने एक एक कमरा किराए पर लिया और इस तरह एक तरह का संयुक्त परिवार बना लिया है, जिसमें सब एक साथ रहते हैं लेकिन हर परिवार का अपना अलग रोजगार और आमदनी है और वैसे ही अलग-अलग खर्चे भी।
उनके पिता आपस में भाई-भाई हैं और दोनों ही नाई का काम करते हैं। इसके अलावा घर के सामने वाली सड़क पर दोनों के अपने-अपने कटिंग सेलून भी हैं-छोटी-छोटी पटरों की दुकानें, जिनमें सिर्फ एक-एक कुर्सी भर है।
इसके बावजूद कि दोनों में व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा रहती है, दोनों ही पर्याप्त कमाई कर लेते हैं और कमरे का किराया, परिवार के लिए राशन इत्यादि का खर्च उठा पाते हैं। समस्या तब आती है जब कोई अतिरिक्त खर्च सामने खड़ा हो जाता है। सोनू की माँ बताती है कि उन्हें अक्सर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे वक़्त में उन्हें अपनी माँ से, जो पास ही कहीं रहती है, मदद प्राप्त हो जाती है। कोई भी अतिरिक्त खर्च या कोई भी बड़ा खर्च उनके बूते के बाहर की बात है-जैसे बच्चों की पढ़ाई-स्कूल फीस, वर्दियाँ और नियमित शिक्षण के साथ जुड़े हुए दीगर खर्चे!
इस तरह ये बच्चे तीन साल पहले हमारे पास आए, स्कूल में भर्ती हुए और अब भी हमारे स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
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