एक और समारोह, जिसने बच्चों को आश्चर्य में डाल दिया – 19 अक्टूबर 2015

उत्सव

कल मैंने आपको शनिवार को संपन्न अपने जन्मदिन समारोह के बारे में बताया था। असल में पार्टी सुबह-सुबह बच्चों के भोजन और उनके लिए एक अनपेक्षित विस्मय के साथ शुरू होने वाली थी। लेकिन शनिवार को वृंदावन के एक इलाके में चुनाव होने वाले थे और क्योंकि हमारे स्कूल के कई बच्चे उसी इलाके से आते हैं, उनकी उस दिन की छुट्टी घोषित कर दी गई थी। लिहाजा वे उस दिन पार्टी में शामिल न हो सके और हमें एक बार और पार्टी आयोजित करने का मौका मिल गया-और इतना ही नहीं, इस समारोह में एक और सुयोग का आनंद भी सम्मिलित हो गया: थॉमस और आइरिस के भारतीय विवाह की दसवीं वर्षगाँठ के उत्सव का आनंद!

आज सुबह बच्चे आए तो यही सोच रहे होंगे कि रोज़ की तरह वह भी एक सामान्य दिन होगा लेकिन वे आश्चर्य में पड़ गए जब उन्हें भोजन के लिए पुकारा गया और उन्हें पता चला कि यह कोई सामान्य भोजन नहीं है, हम और हमारे मेहमान पहले से वहाँ मौजूद थे और उन लोगों का इंतज़ार कर रहे थे कि बच्चे आएँ और भोजन शुरू किया जाए! इस तरह हम सबने एक साथ दोपहर का भोजन किया और उसके बाद, जब सब खा-पीकर निपट गए और पुनः एकत्र हुए, बच्चों के लिए एक और आश्चर्य इंतज़ार कर रहा था: जी हाँ, सारे बच्चों को नए बस्ते प्राप्त हुए!

यह मेरे परिवार और मेरे मित्रों द्वारा मुझे दिया गया जन्मदिन का उपहार था! उन्होंने हर बच्चे के लिए पहले ही एक-एक बस्ता बनवाकर रख लिया था, जिन्हें अब हम वितरित कर सकते थे। लेकिन सबसे बड़ा उपहार तो मुझे मिला था बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कुराहटों के रूप में! जिस तरह वे अपने नए बस्तों को हाथ में लेकर उलट-पलट रहे थे, जाँच रहे थे कि नए बैग में क्या-क्या नई खूबियाँ हैं, हर ज़िप को खोलकर देखते थे कि नए बस्ते में पहले के मुकाबले कितनी जगह है, उसे देखकर मैं भाव विभोर हो गया!

लेकिन सिर्फ मेरे जन्मदिन के कारण ही हमने आज के दिन को इस तरह नहीं मनाया! असल में आज का दिन एक और संयोग के कारण खुशी और समारोह का एक ख़ास दिन बन गया था: आज थॉमस और आइरिस के भारतीय विवाह की दसवीं सालगिरह थी। विश्वास नहीं होता कि इतना समय गुज़र गया, मगर वास्तव में आज से दस साल पहले थॉमस और आइरिस पहली बार हमारे आश्रम आए थे। यह सन 2005 की बात है, जब जर्मनी में हम एक-दूसरे से मिले थे और हमें एक-दूसरे को जानने का सुअवसर प्राप्त हुआ था। फिर उन्होंने भारत की यात्रा की और हमारे यहाँ आए। और यहाँ उन्होंने भारतीय पद्धति से विवाह किया था-और, स्वाभाविक ही, हमें उस दिन को भी समारोह पूर्वक मनाना था!

इस प्रकार, एक तरह से वह बर्थडे और शादी की वर्षगाँठ की तीसरी सम्मिलित पार्टी थी जिसे हमने बच्चों के साथ साझा किया!

ऐसा शानदार परिवार और ऐसे खूबसूरत दोस्त पाकर मैं अभिभूत हूँ-और यह बड़ी ख़ुशी की बात है कि मैं इस ब्लॉग के ज़रिए आपके साथ भी इस ख़ुशी को साझा कर पा रहा हूँ! मुझे आशा है कि किसी दिन आप भी हमारे किसी समारोह में सम्मिलित होंगे!

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