भूखे रह सकते हैं मगर झाड़ू-पोछा नहीं करेंगे – भारतीय समाज में व्याप्त झूठी प्रतिष्ठा की धारणा – 16 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उनके स्कूली बच्चों के कुछ परिवार घरेलू काम वाली नौकरी नहीं करना चाहते क्योंकि वे समझते हैं कि ऐसे हल्के काम उनकी प्रतिष्ठा के अनुकूल नहीं हैं!

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माता-पिता आर्थिक रूप से असमर्थ हैं इसलिए वह नाना-नानी के साथ रहती है – हमारे स्कूल के बच्चे – 19 जून 2015

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों से अपने स्कूल में नई भर्ती हुई एक बच्ची का परिचय करवा रहे हैं, जो अपने नाना-नानी के साथ रहती है। उसकी माँ के और भी दो बच्चे हैं इसलिए वह उसका लालन-पालन करने में असमर्थ है।

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हमें शिकायत क्यों नहीं करना चाहिए? इसका उत्तर यहाँ है – 28 मई 2015

स्वामी बालेन्दु अपने पाठको से कह रहे हैं कि क्यों उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति, अपने स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन, आपसी सम्बन्ध या और किसी भी बात की शिकायत करना छोड़ देना चाहिए!

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भारत – जहाँ शिक्षा भ्रष्टाचार और पैसे वालों की शिकार हो गई है – 19 मई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि गरीबों और मध्य वर्ग के लोगों के लिए बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान कर पाना क्यों मुश्किल है-भ्रष्टाचार और शिक्षा के व्यावसायिक रूपान्तरण के कारण!

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कठिन निर्णय: कब कोई बच्चा हमारे स्कूल में भर्ती होने के लिहाज से ‘पर्याप्त गरीब नहीं’ होता? 18 मई 2015

स्वामी बालेन्दु अपनी एक उलझन के बारे में बता रहे हैं: स्कूल में भर्ती के लिए आने वाले हर नए बच्चे के बारे में सही-सही निर्णय लेना कठिन हो जाता है कि उसका परिवार 'पर्याप्त गरीब' है या नहीं।

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अपने आस-पास नज़र दौड़ाएँ और देखें कि कोई भूखा तो नहीं सो रहा! 4 मई 2015

स्वामी बालेंदु कुछ तथ्य रख रहे हैं: दुनिया में और भारत में व्याप्त भूख के आँकड़े। दुनिया की खौफनाक हालत के बारे में यहाँ पढिए!

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"मैं ईश्वर की इच्छा से गरीब हूँ और इस बारे में कुछ नहीं किया जा सकता" – धर्म का बुरा प्रभाव – 26 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि न जाने कितने लोग अपनी बुरी हालत को सहजता से स्वीकार कर लेते है और उसे बदलने के लिए कुछ भी नहीं करते-क्योंकि वे ईश्वर की इच्छा के विचार पर विश्वास करते हैं!

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अपने प्रथम विश्व के बच्चों को भारत जैसे कम विकसित देशों का दर्शन क्यों करवाना चाहिए? 12 मार्च 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि क्यों वे सोचते हैं कि विकसित देशों के बच्चों के परिवारों को भारत जैसे देशों में छुट्टियाँ बिताना चाहिए!

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एक प्रश्न और उसका उत्तर: गरीबी के बीचोंबीच लगातार इतने समय हम कैसे रह सकते हैं? 11 मार्च 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि वे एक बहुत सामान्य से प्रश्न का उत्तर किस तरह देते हैं। भारत में हर तरफ, हर वक़्त मौजूद गरीबी के बारे में यहाँ पढ़िए और यह भी कि जब आप उसे देखकर दुखी होते हैं तो क्या करें!

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हमारे स्कूल के बच्चों के घरों का दौरा करने वाले पश्चिमी मेहमानों की प्रतिक्रियाएँ – 10 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि उनके मेहमान उनके साथ स्कूल के बच्चों के घरों का दौरा भी करते हैं-और उनकी प्रतिक्रियाएँ कई प्रकार की होती हैं!

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