कुत्ते चॉकलेट के साथ ही योनि पसंद करते हैं! 11 अगस्त 2014

जर्मनी में मेरा एक दोस्त है, जिसने मुझे एक जबरदस्त कहानी सुनाई, जिसे सुनकर मैं हँसते-हँसते लोट-पोट हो गया। सालों बीत गए, जब भी वह कहानी हम लोग आपस में और दूसरों के साथ साझा करते हैं तो हँसी रोकना असंभव होता है-कभी उस कहानी की याद आती है तो पागलों की तरह अकेले भी हँस लेते हैं। कहानी की सबसे अच्छी बात यह है कि वह पूरी तरह सत्य और यथार्थ घटना है!

उस दिन मेरे दोस्त के एक दोस्त का जन्मदिन था। वह खुद शहर में उपस्थित नहीं था लेकिन उनके साझा दोस्तों ने 'बर्थडे गर्ल' से पूछा कि उसके जन्मदिन पर क्या आयोजन किया जाए। वह किसी को घर नहीं बुलाना चाहती थी और न कहीं पार्टी में बाहर जाना चाहती थी इसलिए उसने कहा कि वह घर में रहकर एक सामान्य, सुकून से भरी शाम बिताना चाहती है। लेकिन उसके दोस्त उत्सव मनाना चाहते थे! लिहाजा उन्होंने गुप्त रूप से एक पार्टी रखी, जिससे उसे चौंकाकर खुश कर सकें। दोस्तों में से एक के पास उसके फ़्लैट की चाभी थी-योजना की सफलता के लिए यह अनुकूल ही था!

वह एक सामान्य कामकाजी दिन था और सभी दोस्त जानते थे कि वह अपने काम से कब घर लौटती है। इसलिए उसके वे आठ दोस्त-पुरुष और महिलाएँ-कुछ मिठाइयाँ आदि और पीने-पिलाने की कुछ चीज़े लेकर उसके घर में घुसकर बैठ गए। उसके छोटे से कुत्ते के लिए भी, जो लगभग हर जगह उसके साथ हुआ करता था, कुछ खाने की चीज़ें लाना वे नहीं भूले!

वह एक बेडरूम वाले फ्लैट में रहती थी, जिसमें एक बैठक और रसोईघर भी था। सभी आठ लोग छिपने की जगह ढूँढ़कर छिपकर बैठ गए और पार्टी के लिए साथ लाई खाने-पीने की चीजों को भी छिपाकर रख दिया! वे पर्दों के पीछे, आलमारी के भीतर, खाने की मेज़ के नीचे और सजावटी पेड़ों में छिपे बैठे थे। वह घर आती तो उसे उनकी उपस्थिति का आभास होना संभव नहीं था!

और यही हुआ! जब दरवाज़ा खोलने की आवाज़ आई, सब लोग बेआवाज़ और स्थिर हो गए। उस कुत्ते की हाँफने की आवाज़ को छोड़कर, सारे घर में निस्तब्धता छाई थी। कुत्ता दौड़कर आया और उसके क़दमों में लिपट गया जबकि वह अपना पर्स एक तरफ रखकर जैकेट के बटन खोल रही थी। दोस्त इस बात के इंतज़ार में थे कि वह एक जगह आकर सुकून के साथ बैठ जाए तो वे बाहर निकलें। लेकिन उसने जो किया उससे सारे दोस्त हतप्रभ रह गए: जैकेट उतारने के बाद भी वह नहीं रुकी! जैकेट के बाद उसने बेल्ट खोला और एक-एक कर उसके कपड़े फर्श पर गिरते चले गए, यहाँ तक कि उसके बदन पर एक भी कपड़ा न रहा।

जैसे बिजली का झटका लगा हो, उसके मित्र जड़ होकर यह नज़ारा देख रहे थे: वह उठी और रसोई में आकर न्यूटेला का डिब्बा उठा लाई, जिसमें यहाँ का लोकप्रिय चोकलेट का गाढ़ा मिश्रित-खाद्य (chocolate-hazelnut spread) था। आराम से सोफे पर बैठकर उसने उँगलियों से काफी सारा चोकलेट निकाला। मगर यह क्या? उसे उसने अपने मुँह में नहीं डाला बल्कि पैरों को चौड़ा करके अपनी योनि पर चुपड़ दिया! और कुत्ता, जो अब तक उसके पैरों के आसपास लगातार कुलबुला रहा था, अब अपने दोनों पैर सोफे पर रखकर योनि में लगा चोकलेट चाटने लगा!

गज़ब! अपनी छिपने की जगहों पर बर्फ की शिला बने वे दोस्त कुत्ते की ज़बान से उसे सेक्स का आनंद लेता देखकर पता नहीं क्या महसूस कर रहे होंगे! और इसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है कि पता नहीं कब वे बिचारे अटपटे ढंग से, गिरते-पड़ते, आँख बचाते, अपने गुप्त स्थानों से बाहर निकले होंगे, पर्दों के पीछे से, टेबल के नीचे से घिसटते हुए!

हाँ, इस घटना के बाद बर्थडे गर्ल ने न सिर्फ वह फ्लैट और वह शहर छोड़ दिया बल्कि वह देश और वह महाद्वीप भी छोड़कर चली गई। मैंने सुना कि वह आस्ट्रेलिया में जाकर बस गई है-मगर मैं नहीं जानता कि वह अपने कुत्ते को साथ ले गई या नहीं! 🙂

नोट: इस पोस्ट का उद्देश्य किसी का मजाक उड़ाना नहीं केवल परिस्थितिजन्य हास्य का मजा लेना है. मैं उस प्रकार की सेक्स फैंटेसी को गलत नहीं समझता जिसमें कि किसी के ऊपर कोई अत्याचार न हो!

भारत में हिंसा: अपने कुत्ते से अपने बच्चों की तरह प्रेम करना और उसी तरह पीटना! 12 मार्च 2014

हर शुक्रवार लिखे जाने वाले मेरे ब्लॉग के लिए हम नियमपूर्वक अपने स्कूल के बच्चों के घरों का दौरा करते हैं, जहां उनके परिवार के बारे में जानकारियाँ इकट्ठी की जाती हैं और उनके वीडियो बनाए जाते हैं। हाल ही में हमारी एक मित्र आश्रम आई हुई थी और स्वयं हमारे साथ चलकर देखना चाहती थी कि ये बच्चे अपने घरों में किस तरह रहते हैं। ऐसे दौरों पर हमें पता नहीं होता कि वहाँ जाकर हमें क्या अनुभव हो सकता है और यह बात हमने अपने मित्र को भी बताई। हमें ऐसे परिवार भी मिल सकते थे, जहां आर्थिक विपन्नता के बावजूद घर को साफ-सुथरा रखा जाता है और परिवार में सुख-शांति का एहसास होता है। या हम ऐसे टूटे-बिखरे परिवार का सामना भी कर सकते हैं, जहां पिता शराबी है, परिवार के सदस्य आपस में लड़-झगड़ रहे हैं, आदि आदि। इस बार जब हम अपने मित्र के साथ निकले तो हमें वह दृश्य देखने को मिला, जिसकी हमें भी अपेक्षा नहीं थी-अपने पालतू कुत्ते के साथ हिंसक व्यवहार।

भारत में भी कुछ लोग हैं, जो घर में पालतू कुत्ते रखते हैं और वे उनसे बहुत प्यार करते हैं। वे उनके साथ अपने बच्चों जैसा प्रेम करते हैं, वैसा ही जैसा प्रेम पश्चिम में लोग अपने पालतू कुत्तों के साथ करते हैं। और वे अपने कुत्तों को मारते हैं, उसी तरह जैसे वे अपने बच्चों को मारते हैं।

रमोना, पूर्णेन्दु और हमारी मित्र को हमारे स्कूल की एक बच्ची अपने घर ले जाती है और एक कुत्ता भागता हुआ आता है और उन पर बेतहाशा भौंकने लगता है। माँ उस पर ‘नहीं!’ कहते हुए चीख पड़ती है और वह आठ साल की बच्ची, जिसके साथ हम उनके यहाँ आए थे, एक छड़ी फटकारते हुए उस कुत्ते की तरफ लपकती है। बेचारा कुत्ता अपने पिछले पैरों के बीच दुम दबाए पीछे हटकर एक तरफ बैठ जाता है। अब माँ बच्ची से छड़ी ले लेती है और बातचीत के दौरान जब भी कुत्ता भौंकने को होता, एक छड़ी कुत्ते की पीठ पर जमाती जाती है, जिससे कुत्ता और पीछे, एक कोने में चला जाता है और आखिर वहाँ चुपचाप मुर्दे की तरह पसर जाता है।

चौंक गए ना? मुझे लगता है मेरी मित्र भी स्तब्ध रह गई होगी। लेकिन तब तक ही जब तक उसे यह नहीं बताया गया होगा कि जिस कुत्ते को वे लोग इस तरह मार-पीट रहे हैं वह उनका पाला हुआ कुत्ता है! जब हमने उसे यह बताया तो वह हैरान-परेशान हो गई! जब उनके पास एक जानवर है और वे उसे खाना खिलाते हैं, खुद उनके पास ज़्यादा कुछ नहीं है मगर उस कुत्ते को पाल-पोस रहे हैं तो इसका तो यही मतलब है कि वे उससे बहुत प्यार करते हैं! और जब वे उससे प्यार करते हैं तो फिर उसे मारते क्यों हैं, वह भी छड़ी से?

इसे समझना बहुत आसान है: वे अपने बच्चों की तरह कुत्तों से भी प्यार करते हैं। बिल्कुल उसी तरह जैसा पश्चिमी देशों में भी देखा जाता है।

जी हाँ! आप अपने कुत्ते या बिल्ली को अपने बच्चों की तरह गले से लगा लेते हैं, पुचकारते है, उससे बातें करते हैं, उसके साथ खेलते हैं, अच्छे से अच्छा खाना खिलाते हैं। वे भी यही करते हैं: खाना खिलाते हैं, खेलते हैं, पुचकारते हैं, बातें करते हैं-और मारते-पीटते भी हैं, उसी तरह जैसे वे अपने बच्चों को मारते-पीटते हैं।

कुछ समय पहले रमोना और मैं अपने कुछ मित्रों के यहाँ गए थे। उनके घरों में कुत्ते पाले हुए थे। भारत में कुत्ते पालना बहुत आम नहीं है और इसलिए यह हमारे लिए कुतूहल का विषय होता रहा है कि वे अपने पालतू कुत्तों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। और वहाँ हमारी बात की पुष्टि होती रही है: वे अपने बच्चों की तरह अपने कुत्तों से बातें करते हैं और उन बातों में मारने-पीटने की धमकियाँ भी होती हैं: "शांत बैठो नहीं तो मारेंगे", "उधर जाकर बैठो नहीं तो डंडे से पिटाई होगी"

तो इस तरह आप देखते हैं कि बच्चे हों या पालतू कुत्ते, हिंसा को भारत में गलत बात नहीं माना जाता। जैसे अपने बच्चों के साथ बलप्रयोग अनुचित है उसी तरह अपने कुत्ते या बिल्ली या किसी भी दूसरे जानवर को मारना अनुचित है। जरा सोचिए, उन निरुपाय जीवों के साथ, जो आपके विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते, आप कितना क्रूर व्यवहार करते हैं।

अमन और शांति की तरफ कदम बढ़ाइए और यह काम अपने घर से शुरू कीजिये!