अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016

कल अपरा का चौथा जन्मदिन था! हर साल की तरह स्कूल के बच्चों और बहुत सारे दोस्तों के साथ इस साल भी शानदार पार्टी आयोजित की गई, जिसमें स्वादिष्ट खाने का लुत्फ भी लिया गया!

दिन की शुरुआत हुई आश्रम की सजावट के साथ। हमारा इरादा सिर्फ फुग्गे लगाने का था-लेकिन हजारों की संख्या में! इस इरादे से हमने फुग्गे और फुग्गे फुलाने की मशीन खरीदी, जो बिजली से चलती है और पल भर में फुग्गे फुला देती है। अन्यथा हमें कई दिन पहले से मुँह से फुग्गे फुलाने पड़ते! कुछ अनुभवी लोगों ने तड़के सबेरे से फुग्गे फुलाने शुरू किए और फिर उनसे रंगीन तोरणद्वार बनाए और बड़ी-बड़ी सुंदर मालाएँ भी बनाईं।

हमारी अपेक्षा से कुछ देर से रसोइयों ने अपना काम शुरू किया। मेरे खयाल से गलती उनकी नहीं थी, हमारी थी कि हम कुछ ज्यादा उम्मीद कर गए। रसोइयों ने सफाई पेश की: “इतनी ठंड है, कोई भी इतनी जल्दी सबेरे नहीं उठना चाहता!” खैर, आखिर किसी तरह वे जागे और फिर योजना के अनुसार एक से एक स्वादिष्ट खाने की वस्तुएँ बनाने की तैयारी शुरू कर दी।

दस बजे लगभग सारे खास मेहमान पधार चुके थे: यानी हमारे स्कूल के बच्चे! उनके अलावा हमारे कुछ सबसे प्यारे मित्र भी धीरे-धीरे आने लगे-और उसके बाद नाच-गाने के साथ तुरंत ही हमने पार्टी शुरू कर दी। बच्चे जब झूम-झूमकर नाचने-गाने लगते हैं, तो वह समय सबसे खूबसूरत होता है और बड़ों सहित दूसरे सब भी अपनी झिझक और शर्म भूलकर उसमें शामिल हो जाते हैं!

इसी बीच अपरा को भूख लग गई-आखिर जब से उठी थी उसने कुछ नहीं खाया था, क्योंकि वह भी तो सारी तैयारियों में लगी हुई थी और बाद में उपहार ले रही थी, चॉकलेट खा रही थी! तो जब सब लोग गानों की धुनों पर थिरक रहे थे, रमोना उसे लेकर खाने के स्टाल्स की तरफ चली गई, जहाँ नूडल्स थे, पैनकेक थे और कुछ दूसरे नाश्ते और मिठाइयाँ रखी थी और अब भी तैयार किए जा रहे थे, जिससे मेहमानों को गरमागरम नाश्ता प्राप्त हो सके। वहाँ रमोना ने एक प्लेट में अपरा के लिए सबसे पहले नूडल्स निकाले और उसके जर्मन नाना के लिए आलू की टिकिया। धींगामस्ती और होहल्ले के सबसे पीछे बैठकर दोनों ने पार्टी के पहले स्वादिष्ट कौर का स्वाद लिया!

अपरा को पहले ही खिलाकर रमोना ने अच्छा किया क्योंकि जब औपचारिक रूप से नाश्ते का दौर शुरू हुआ तो स्कूल के बच्चे उन पर टूट पड़े और बहुत देर तक कोई दूसरा खानों तक पहुँच ही नहीं सकता था क्योंकि सामने अपनी बारी का इंतज़ार करता हुआ बच्चों का विशाल हुजूम होता था! काफी समय बाद तक वे लोग अपने मुँह में एक से एक स्वादिष्ट नाश्ते लिए फिरते रहे और पेट भरने तक खाते रहे। उनके लिए यह पार्टी का सबसे शानदार दौर होता है और वे उस अत्यंत सुस्वादु नाश्ते को भोजन की तरह खाते हुए बेहद खुश और रोमांचित थे।

केक काटने से पहले कुछ और नाच-गाना हुआ। अपरा ने पहला कट लगाया और बाद में सबको उस अत्यंत स्वादिष्ट केक का एक-एक टुकड़ा प्राप्त हुआ। जब अपरा ने अपना हिस्सा खा लिया, वह भी डांस फ्लोर पर नाच रहे लोगों में शामिल हो गई और अपना खुद का प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया-एक डांस जिसे पिछले हफ्ते ही उसने सीखा था।

अंत में, जब बच्चे और हमारे कुछ मेहमान चले गए, अपरा ने अपने उपहार खोलना शुरू किया: सुंदर वस्त्र, रंगीन पेंसिलें और दूसरे खेल-खिलौने!

अंत में हमने आराम से बैठकर सुस्वादु डिनर के साथ पार्टी का समापन किया और शाम का बाकी का समय उन दोस्तों के साथ बढ़िया गपशप में गुज़ारा, जो रात को रुकने वाले थे।

पार्टी बहुत शानदार रही: अपरा के जन्म का चौथा स्मरण और पुराने मित्रों के साथ दोबारा एकत्र होने का सुअवसर!

एक और समारोह, जिसने बच्चों को आश्चर्य में डाल दिया – 19 अक्टूबर 2015

कल मैंने आपको शनिवार को संपन्न अपने जन्मदिन समारोह के बारे में बताया था। असल में पार्टी सुबह-सुबह बच्चों के भोजन और उनके लिए एक अनपेक्षित विस्मय के साथ शुरू होने वाली थी। लेकिन शनिवार को वृंदावन के एक इलाके में चुनाव होने वाले थे और क्योंकि हमारे स्कूल के कई बच्चे उसी इलाके से आते हैं, उनकी उस दिन की छुट्टी घोषित कर दी गई थी। लिहाजा वे उस दिन पार्टी में शामिल न हो सके और हमें एक बार और पार्टी आयोजित करने का मौका मिल गया-और इतना ही नहीं, इस समारोह में एक और सुयोग का आनंद भी सम्मिलित हो गया: थॉमस और आइरिस के भारतीय विवाह की दसवीं वर्षगाँठ के उत्सव का आनंद!

आज सुबह बच्चे आए तो यही सोच रहे होंगे कि रोज़ की तरह वह भी एक सामान्य दिन होगा लेकिन वे आश्चर्य में पड़ गए जब उन्हें भोजन के लिए पुकारा गया और उन्हें पता चला कि यह कोई सामान्य भोजन नहीं है, हम और हमारे मेहमान पहले से वहाँ मौजूद थे और उन लोगों का इंतज़ार कर रहे थे कि बच्चे आएँ और भोजन शुरू किया जाए! इस तरह हम सबने एक साथ दोपहर का भोजन किया और उसके बाद, जब सब खा-पीकर निपट गए और पुनः एकत्र हुए, बच्चों के लिए एक और आश्चर्य इंतज़ार कर रहा था: जी हाँ, सारे बच्चों को नए बस्ते प्राप्त हुए!

यह मेरे परिवार और मेरे मित्रों द्वारा मुझे दिया गया जन्मदिन का उपहार था! उन्होंने हर बच्चे के लिए पहले ही एक-एक बस्ता बनवाकर रख लिया था, जिन्हें अब हम वितरित कर सकते थे। लेकिन सबसे बड़ा उपहार तो मुझे मिला था बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कुराहटों के रूप में! जिस तरह वे अपने नए बस्तों को हाथ में लेकर उलट-पलट रहे थे, जाँच रहे थे कि नए बैग में क्या-क्या नई खूबियाँ हैं, हर ज़िप को खोलकर देखते थे कि नए बस्ते में पहले के मुकाबले कितनी जगह है, उसे देखकर मैं भाव विभोर हो गया!

लेकिन सिर्फ मेरे जन्मदिन के कारण ही हमने आज के दिन को इस तरह नहीं मनाया! असल में आज का दिन एक और संयोग के कारण खुशी और समारोह का एक ख़ास दिन बन गया था: आज थॉमस और आइरिस के भारतीय विवाह की दसवीं सालगिरह थी। विश्वास नहीं होता कि इतना समय गुज़र गया, मगर वास्तव में आज से दस साल पहले थॉमस और आइरिस पहली बार हमारे आश्रम आए थे। यह सन 2005 की बात है, जब जर्मनी में हम एक-दूसरे से मिले थे और हमें एक-दूसरे को जानने का सुअवसर प्राप्त हुआ था। फिर उन्होंने भारत की यात्रा की और हमारे यहाँ आए। और यहाँ उन्होंने भारतीय पद्धति से विवाह किया था-और, स्वाभाविक ही, हमें उस दिन को भी समारोह पूर्वक मनाना था!

इस प्रकार, एक तरह से वह बर्थडे और शादी की वर्षगाँठ की तीसरी सम्मिलित पार्टी थी जिसे हमने बच्चों के साथ साझा किया!

ऐसा शानदार परिवार और ऐसे खूबसूरत दोस्त पाकर मैं अभिभूत हूँ-और यह बड़ी ख़ुशी की बात है कि मैं इस ब्लॉग के ज़रिए आपके साथ भी इस ख़ुशी को साझा कर पा रहा हूँ! मुझे आशा है कि किसी दिन आप भी हमारे किसी समारोह में सम्मिलित होंगे!

दोस्तों के साथ मौजमस्ती से भरपूर समय बिताना – 18 अक्टूबर 2015

गज़ब! कितना मज़ेदार, सुखद समय! जी हाँ, वाकई शानदार-हम सब बहुत व्यस्त हैं, लोग आ रहे हैं, जा रहे हैं, रोज़ एक नया समारोह चल रहा है और इस वक़्त हमारे यहाँ, आश्रम में हमारे बहुत करीबी और बेहद शानदार मित्र आए हुए हैं और हम उनके साथ अपना सर्वश्रेष्ठ समय गुज़ार रहे हैं!

शुक्रवार को थॉमस और आइरिस हमारे साझा मित्र, पीटर और हाइके, उनके बेटे और अपने दो और मित्रों के साथ आए। एक दिन आराम करने के बाद कल हमारे यहाँ शानदार बर्थडे पार्टी हुई! हमने कोई बहुत बड़ा आयोजन नहीं किया था कि बहुत सारी तैयारियों की ज़रूरत हो, लेकिन फिर भी वह वाकई बहुत ख़ास पार्टी रही: शाम को सुस्वादु भोजन की व्यवस्था की गई थी और उसके बाद थोड़ा नाच-गाना हुआ! फिर सबके लिए चॉकलेट केक और फिर से थोड़ा सा नृत्य वगैरह! अपरा, प्रांशु और गुड्डू, हमारे सबसे छोटे बच्चों ने अपने-अपने नृत्य प्रस्तुत किए-दिखाया कि उन्होंने इस बीच क्या-क्या नया सीखा है-और उसके बाद फ़्रांस से आई हमारी मित्र, मेलनी ने अपना फायर डांस प्रदर्शित किया। अंत में जर्मन मित्रों द्वारा लाए गए विभिन्न वाद्ययंत्रों पर निबद्ध संगीत कार्यक्रम के साथ शाम के कार्यक्रम का समापन हुआ।

वह बहुत खूबसूरत शाम थी और हम सबने उसका भरपूर आनंद लिया-परिवार के सदस्यों ने, दोस्तों और हमारे अतिथियों ने! हमारी तीन महिलाओं के लिए राजस्थान यात्रा पर निकलने से पूर्व आश्रम में वह अंतिम शाम थी। हमने उनकी राजस्थान यात्रा का इंतज़ाम किया था और आज तड़के वे तीनों जयपुर के लिए रवाना हो गईं, जहाँ से वे जैसलमेर जाएँगी और फिर अंत में दिल्ली लौटेंगी, जहाँ से उनमें से एक घर चली जाएगी और दो यहाँ, वृंदावन वापस आएँगी।

इस तरह आज हमारे यहाँ मेहमानों और मित्रों की संख्या कुछ कम है लेकिन हम सब साथ बैठकर इस दौरान एक-दूसरे के जीवनों में घटित घटनाओं का जायज़ा ले रहे हैं, पुराने समय को याद कर रहे हैं और निकट भविष्य में कुछ रोमांचक कार्यक्रमों की योजना तैयार करते हुए समय का पूरा आनंद उठा रहे हैं।

थॉमस यहाँ आए हुए हैं इसलिए अपरा ख़ुशी से फूली नहीं समा रही है और वह सारा दिन उनके साथ खेलती-कूदती रहती है। कभी वह हमें बताती है कि उन दोनों ने मिलकर दिन भर क्या-क्या किया तो कभी बताती है कि आगे क्या-क्या करने वाले हैं। जब घर लोगों से भरा-पूरा होता है तब वह बहुत खुश रहती है और विशेष रूप से तब, जब अनजान लोगों के साथ बहुत से वे दोस्त भी होते हैं, जिनके साथ वह लगभग हर हफ्ते स्काइप पर रूबरू बात करती है!

इन सब बातों के अलावा हमारे सभी जर्मन मित्र अपरा और आश्रम के दूसरे बच्चों के लिए बहुत सारे उपहार भी लेकर आए हैं। हर बच्चा नए-नए खिलौनों को आजमाकर देखने और उनसे खेलने में व्यस्त हैं और साथ ही एक से एक बढ़कर स्वादिष्ट जर्मन मिठाइयों का आस्वाद भी ले रहे हैं! वास्तव में हम सब बहुत सुखद और शानदार समय बिता रहे हैं!

वाकई जीवन बहुत सुंदर है!

साल गिनना भूल कर, जीवन से प्यार करते हुए जन्मदिन मनाना! 14 अक्टूबर 2015

आज फिर वह दिन आ गया है जब मैं अपनी उम्र के सालों की गिनती बदलता हूँ। आज मेरा जन्मदिन है-14 अक्टूबर। और आपके पूछने से पहले ही बता दूँ कि मैं कल से एक दिन भी अधिक बड़ा महसूस नहीं कर रहा हूँ!

मैं जानता हूँ कि मैं पहले भी इस बात का ज़िक्र कर चुका हूँ, और शायद किसी जन्मदिन के दिन ही, कि यह संख्या, जो आप किसी को अपनी उम्र की जानकारी देते हुए बताते हैं, मेरे लिए विशेष महत्व की नहीं है। कुछ दिन पहले रमोना ने हमारे किसी मेहमान को हँसते हुए बताया, ‘आप उनसे उनकी उम्र पूछेंगे तो वे कम से कम 2 मिनट सोचेंगे कि वे वास्तव में कितने साल के हैं!’

वास्तव में, जितना व्यस्त मैं रहता हूँ, उतना व्यस्त रहने लायक युवा मैं आज भी महसूस करता हूँ और अपने अनुभवों के अनुरूप पर्याप्त उम्रदराज भी महसूस करता हूँ। मैं उम्र की इस संख्या को मुझे निर्देश देने की आज़ादी क्यों दूँ कि मुझे कैसा महसूस करना चाहिए या कैसा व्यवहार करना चाहिए? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उम्र के हिसाब से मैं दूसरों से अपनी तुलना भी नहीं करता। अगर मैं यह करने लगूँ तो यह बड़ा पेचीदा मामला हो जाएगा: मेरे कुछ पुराने सहपाठी आज दादा-दादी या नाना-नानी बन चुके हैं जब कि मेरे कुछ मित्र हैं जो अभी भी पढ़ाई कर रहे हैं, अभी किसी संबंध में मुब्तिला ही हो रहे हैं या समय के ऐसे ही किसी पड़ाव पर हैं जिसे मैं पहले ही पार कर चुका हूँ! इसलिए तुलना करना ही बेमानी हो जाता है?

नहीं, जीवन के इस पड़ाव पर मैं बहुत खुश हूँ। मैं अक्सर रहता ही हूँ। मेरे पास मेरा परिवार है, शानदार दोस्त हैं, मैं अपने काम में पर्याप्त व्यस्त भी रहता हूँ, मेरा काम भी अच्छी तरह तरक्की कर रहा है और मैं अपने अच्छे स्वास्थ्य का पूरा आनंद भी ले रहा हूँ। फिलहाल, जब कि रमोना और मैं यह लिख रहे हैं, मुझे हँसी आ रही है क्योंकि मेरी बच्ची मेरे पीछे खड़ी अपने चाचा के साथ ठिठोली करते हुए हँस रही है। अब जीवन की इस सुनहरी धूप में मैं अपने आपको बूढ़ा महसूस करने की सोच भी नहीं सकता!

आज सबेरे वह बड़ी खुश और उल्लसित थी, उसने मुझे जगाकर कहा कि आज मेरा जन्मदिन है। उसने रमोना को बताया कि वह बहुत सारा केक खाएगी-लेकिन फिर रमोना से उसने सुना कि पार्टी का आयोजन थॉमस और आइरिस के आने के बाद, सप्ताहांत में किया जाएगा! बाप रे! यह सुनकर अपरा बहुत गुस्सा हो गई और शिकायती स्वर में तुरंत उसने कहा कि नहीं, पार्टी आज ही होनी चाहिए, शनिवार को नहीं। रमोना ने समझाने की बहुत कोशिश की कि पार्टी का मज़ा लेने हमारे दोस्त भी आ रहे हैं लेकिन अपरा का तर्क था कि वे उसकी बर्थडे-पार्टी में आ सकते हैं!

रमोना ने हाथ डाल दिए: ‘ओके ओके, हम आज भी एक छोटी सी पार्टी रख लेते हैं और…शनिवार को बड़ी वाली रख लेंगे!’ यह गलत रणनीति सिद्ध हुई! इसका बड़ा तगड़ा विरोध हुआ: ‘नहीं! बड़ी पार्टी आज ही होगी, बड़ा केक भी आज ही आएगा क्योंकि बर्थ डे भी आज है!’ खैर, तो हम आज भी एक पार्टी रख रहे हैं और एक शनिवार को भी रख लेंगे!

पार्टी के लिए हम वैसे भी कभी मना नहीं करते! और मैं अभी से बहुत सारी पार्टियों का इंतज़ार करने लगा हूँ!

अपरा के जन्मदिन वाला सप्ताह कार्यक्रमों से भरा रहा – 12 जनवरी 2015

हमारा पिछला सप्ताह बेहद व्यस्त रहा मगर वह बहुत सुखद और शानदार भी रहा। अपरा का जन्मदिन था और उसके नाना यहाँ आए थे; तो हफ्ते भर हमारे पास कुछ न कुछ करने को था और सारे हफ्ते मौज-मस्ती होती रही, होनी ही थी!

मैंने आपको बताया था कि रविवार को सुबह हम मेरे ससुर साहब को लेने विमानतल गए थे। वृन्दावन आते हुए वापसी में बहुत कोहरा था और हम बहुत धीमी रफ़्तार में सफ़र का आनंद लेते हुए आश्रम आए। और उसके बाद पूरा रविवार बहुत आनंददायक रहा। और बाद में तो चीजें अपने आप घटित होती रहीं, सारे दिन व्यस्तता रहती और हमें पता ही नहीं चला, पूरा सप्ताह कैसे निकल गया!

एक बड़ी घटना यह हुई कि रेस्तराँ की दीवारों और दरवाजों के काँच आ गए और उन्हें फिट करवाने का काम पूरा हुआ। जिस तरह वे दीवारों में विशाल काँच के फ़लक फिट करते हैं और अचानक वह खुला ढाँचा एक कमरे में, बल्कि विशाल रेस्तराँ-हाल में तब्दील हो जाता है, वह देखना भी अपने आप में अद्भुत अनुभव था! उनके पास टेबलों के ढाँचे थे, जिन पर खड़े होकर वे अपना काम कर रहे थे, जिसे देखकर हम प्रभावित हुए बगैर न रह सके क्योंकि एक बार भी वे न तो गिरे, न लड़खड़ाए। हम बीच-बीच में काम की प्रगति देखने जाते रहते थे और अंत में, रमोना के पिता की विदाई वाले दिन सारा काम संपन्न हुआ!

लेकिन काँच के काम को होते हुए देखने का आनंद लेना और उसकी प्रशंसा करना ही हमारा काम नहीं था! आश्रम में बहुत मेहमान आए हुए थे, जिनके विश्राम-सत्र जारी थे और हमने उनके साथ काफी समय व्यतीत किया-लेकिन साथ ही अपरा के तीसरे जन्मदिन, जिसका अपरा बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी, की तैयारियों में भी काफी समय व्यतीत हुआ!

हमने किसी को ख़ास तौर पर नहीं बुलाया था लेकिन हमारे निकटस्थ मित्र जानते थे और वे आए थे और हम लोगों ने आश्रम के अपने विशाल परिवार के साथ मिलकर फिर से एक बार अच्छी-खासी पार्टी आयोजित कर ली! जब सजावट होने लगी तो अपरा इतनी उल्लसित हो उठी कि देखते ही बनता था! उसने खुद पसंद करके लाए हुए कपड़े पहनने से इनकार कर दिया और वह कुछ सादे कपड़े पहनने की ज़िद करने लगी: "नहीं तो मैं डांस कैसे कर पाऊँगी", उसका कहना था! तब हमने उसके दीवाली वाले कपड़े निकाले और ठण्ड के गर्म कपड़ों के ऊपर उन्हें पहना दिया। तब भी वह बड़ी प्यारी लग रही थी!

और जर्मनी से आए एक मेहमान की मदद से, जो पेशे से रसोइये हैं और हमारे साथ बेकिंग करते रहे हैं, हमने शाम को शानदार पिज्जा और उसके बाद जन्मदिन के लिए एक बेहद स्वादिष्ट और बड़ा सा केक तैयार किया! वह इतना स्वादिष्ट था कि बहुत से लोगों ने अपने पेट की क्षमता से बहुत ज़्यादा खा लिया! 🙂

उसके बाद एक के बाद एक ढेर सारे उपहार आने शुरू हो गए-उस दिन और दूसरे दिन भी-और जब हम दिल्ली रवाना होने लगे तब तक भी जन्मदिन वाले मूड में ही थे! हमें मोनिका के लिए गुड़गाँव जाना था और हमने सारा दिन उसके साथ बिताया और शाम को मेरे ससुर को विमानतल पर विदा करके वापस आए। एक भावपूर्ण और लंबा विदाई कार्यक्रम सम्पन्न हुआ और मैंने कहा, समय कैसे फुर्र से उड़ जाता है, लेकिन हमने बेहद शानदार समय गुज़ारा!

कल मैं आपको मोनिका के बारे में बताऊँगा। फिलहाल इतना ही कि उसकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है।

आज 43 साल का हो गया और खुश हूँ कि पूरी तरह व्यस्त हूँ! 14 अक्टूबर 2014

एक बार फिर आज 14 अक्टूबर है और इसी दिन, 43 साल पहले मेरा जन्म हुआ था। अगर कोई पूछे तो बताना चाहूँगा कि मुझे आज का दिन बीते हुए कल से बिल्कुल अलग नहीं लग रहा है लेकिन मैं जानता हूँ कि आज मेरे जीवन का एक और महत्वपूर्ण वर्ष शुरू हो रहा है!

जो हम अक्सर करते हैं, उसके अलावा हम कोई बड़ी पार्टी नहीं रख रहे हैं। बच्चों को आज शानदार दोपहर का भोजन प्राप्त हुआ और उन्होंने मुझे शुभकामनाएं दीं और कुछ बच्चों ने हाथ से बनाकर जन्मदिन के बधाई संदेश मुझे दिए। लेकिन शाम को हमने कोई कार्यक्रम नहीं रखा-क्योंकि हम सब आजकल बहुत व्यस्त हैं और हमारा दिमाग एक दूसरी बड़ी योजना के क्रियान्वयन में लगा हुआ है।

इस साल की शुरुआत से ही मैं एक बड़ी परियोजना को कार्यान्वित करने में लगा हुआ हूँ। कहना चाहिए कि यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी परियोजना है। इसमें बहुत विचार मंथन और प्रयासों की ज़रूरत पड़ती है और इसका अर्थ यह है कि पिछले कुछ महीनों से मुझे कंप्यूटर पर भी बैठने का पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है कि वहाँ कुछ लिख सकूँ या वैबसाइट पर ज़्यादा कोई काम कर सकूँ।

जब कोई काम आपको इस कदर आबद्ध कर लेता है और आपका दिमाग पूरी तरह उसी काम पर केन्द्रित हो जाता है तो आपको पता ही नहीं चलता कि सुबह कब हुई और दिन कब बीत गया-और यह मुझे अच्छा भी लगता है कि मैं किसी काम में दिलोदिमाग से पूरी तरह डूब जाऊँ, उसके पीछे होशोहवास खो बैठूँ।

जीवन में पीछे मुड़कर देखने पर- जी हाँ, लग सकता है कि कोई बूढ़ा व्यक्ति यह बात कह रहा है लेकिन जन्मदिन के अवसर पर अक्सर आप पुराने दिनों को ही याद करते हैं- मैं पाता हूँ कि मैं सदा से ऐसे ही काम करता आया हूँ और हमेशा ही पूरी लगन से, उसके हर क्षण का पूरा-पूरा आनंद उठाते हुए अपने काम में मुब्तिला हो जाता रहा हूँ।

वास्तव में मैं आपको विस्तार से बताना चाहता हूँ कि आखिर मैं किस काम में लगा हुआ हूँ मगर वह इतना लंबा हो जाएगा कि आज उसका पूरा विवरण लिखना संभव नहीं हो पाएगा। इसलिए मैं चाहता हूँ कि आप कल तक उसका इंतज़ार करें।

तब तक आज के सुंदर दिन का पूरा आनंद उठाएँ। मैं आप सभी को मेरे जन्मदिन पर शुभकामनायें व्यक्त करने के लिए धन्यवाद प्रेषित करता हूँ।

पार्टी, जिसके लिए मैं खास तौर पर भारत से जर्मनी आया – 15 सितम्बर 2014

लुनेबर्ग में शानदार सप्ताहांत के बाद अपने मित्रों, माइकल और आंद्रिया, के साथ हम वापस वीज़बादेन आ गए हैं। वहाँ गुज़ारे कुछ सुखद और शानदार पलों के बारे में संक्षेप में आपको बताना चाहता हूँ!

अपने निश्चित कार्यक्रम के अनुसार हम शनिवार को सुबह तड़के ही लुनेबर्ग के लिए निकल पड़े और दोपहर के आसपास वहाँ पहुँच गए। वहाँ सारी तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही थीं: बगीचे में एक टेंट लगाया जा चुका था, भोजन और नाश्ते आदि का इंतज़ाम करने वाले कैटरर गिलास-प्लेटें आदि और चाय नाश्ते का शुरूआती सामान ले आए थे और बगीचा समारोह हेतु सजाया और तैयार किया जा रहा था।

लेकिन पार्टी से पहले ही हम लोग यानी हम दोनों के परिवार एक दूसरे के साथ शाम का समय आनंदपूर्वक बिता पाए। हम एक रेस्तराँ में गए और अपने मित्र के साथ, जो तब तक 59 साल का ही था, पुरानी बातों को याद करते रहे और आने वाले आकर्षक समय की योजनाएँ बनाते हुए वर्त्तमान का लुत्फ़ उठाते रहे।

पिछले दो सप्ताह से हम सभी रविवार के लिए की जाने वाली मौसम की भविष्यवाणियों पर नज़र गड़ाए हुए थे। कुछ तो इसलिए कि कौन से कपड़े लेकर चला जाए इस बारे में हम सुनिश्चित होना चाहते थे और कुछ इसलिए कि लगभग 100 लोग निमंत्रित थे और अगर बारिश हो जाती तो इतने लोग वहाँ समा ही नहीं पाते! बगीचे में ताने गए टेंट के बावजूद सबका वहाँ समाना मुश्किल ही था। इसलिए हम आशा कर रहे थे कि बारिश नहीं होगी मगर शनिवार की शाम को बारिश की 80% संभावना जताई जा रही थी और भविष्यवाणी की गई थी कि रविवार को सूरज दिखाई ही नहीं देगा।

आप हमारी ख़ुशी की कल्पना कर सकते हैं जब हम सुबह उठे और खिड़की से हमें चमकता हुआ सूरज दिखाई दिया! सारा दिन सूरज आँख-मिचौली खेलता रहा मगर अधिकतर समय वह खूब चमकता रहा और इसलिए तापमान भी बड़ा सुखद रहा और अंततः मौसम पार्टी के लिए बहुत आदर्श और सुखदायी रहा आया क्योंकि पार्टी का कुछ हिस्सा बगीचे में ही आयोजित किया गया था!

और सभी ने पार्टी का भरपूर मज़ा लिया! मैं बहुत से लोगों से मिला, माइकल और आंद्रिया के मित्र और रिश्तेदार, जिन्हें मैं कई सालों से जानता था और दूसरे लोग, जिनके सिर्फ नाम ही मैंने सुन रखे थे, दोस्तों के मुख से उनकी कहानियाँ सुनी थीं। हमने खूब बातें की, एक-दूसरे की कहानियाँ सुनी-सुनाईं और अनुभव साझा किए।

मेरी सबसे बड़ी ख़ुशी तो यही थी कि मेरे मित्र बहुत खुश थे! न जाने कितने लोग माइकल का जन्मदिन मनाने आए थे और फिर उसने एक छोटा सा भाषण दिया, जिसमें एक के बाद एक, हर एक का ज़िक्र किया, हर एक से उसके पास जाकर हाथ मिलाया, उन्हें छुआ और इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों से आए वे सब लोग आपस में परिचित हो सके, एक-दूसरे के साथ घनिष्ठ हो सके!

अपरा का समय भी बड़ा शानदार गुज़रा! माइकल के एक बहुत पुराने दोस्त ने एक घंटे के लिए एक कोलंबियन गायक और गिटार बजाने वाली को बुला लिया था, जिसने स्पेनिश संगीत से पार्टी में एक अलग ही समां बाँधा। अपरा उस महिला के पीछे लग गई और उसके गिटार के स्वरों की नक़ल उतारती रही, नाचती-गाती रही, रोमांचित होकर तालियाँ बजा-बजाकर पार्टी का मज़ा लेती रही! कुछ दूसरे बच्चे भी वहाँ आए थे और जब संगीत समाप्त हुआ वह उनके साथ खेलने लगी, पूरी तरह अपरिचित लोगों के साथ निःसंकोच घुल-मिल जाना कोई उससे सीखे!

शाम को लोग धीरे-धीरे बिदा हुए। तीन-चार दम्पति को वहाँ इतना आनंद आ रहा था कि वे देर रात तक रुके रहे! लेकिन अंत में हम परिवार वाले, एक और दम्पति, जो माइकल के नज़दीकी मित्र थे और जिन्हें हम भी बहुत पहले से जानते थे तथा उनकी एक युवा बेटी, और बस, इतने ही लोग रह गए। इस लड़की का पिता माइकल का वही मित्र था, जो उसके 50वें जन्मदिन पर उसके साथ भारत आया था!

इस तरह हमारा वह शानदार दिन समापन को आया, दोस्तों के बीच, सुकून के साथ। समारोह के बारे में माइकल ने हमसे जो सबसे अच्छी बात कही वह यह थी कि उसे महसूस हो रहा था कि हमारी उपस्थिति ने समारोह को कुछ अधिक ख़ास बना दिया था। एक सामान्य पार्टी नहीं बल्कि एक मील का पत्थर, जीवन का एक यादगार अवसर, जिसमें शामिल होने के लिए भारत तक से लोग आए थे! मेरा, रमोना का और अपरा का वहाँ होना उसके और उसके मित्रों के लिए समारोह को सदा-सदा के लिए यादगार बना गया। और हमारे लिए भी वहाँ मौजूद रहना उतना ही ख़ास और यादगार था।

हमने तय किया है कि अपने 70वें जन्मदिन पर माइकल फिर से भारत आएगा-और मैंने भी जोड़ दिया है कि उसके 80वें जन्मदिन पर मैं भी हर हाल में जर्मनी पहुँच जाऊँगा!

एक बार फिर, मेरे दोस्त, मैं तुम्हारे अगले 60 सालों के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त करता हूँ। तुम्हारे अगले साठ साल भी इसी तरह शानदार, सुखद और हँसी-ख़ुशी से भरपूर हों!

रमोना का जन्मदिवस समारोह – 20 मार्च 2014

कल रमोना के जन्मदिन का समारोह शानदार रहा! अभी भी नाच-गाने, पेटपूजा और मौज-मस्ती का खुमार उतरा नहीं है! वाकई कल की शाम असाधारण रूप से सुखद और यादगार शाम थी और क्या आप बता सकते हैं कि उसकी सबसे बड़ी खासियत क्या रही-यानी मेरी पत्नी के जन्मदिन को छोड़कर? वह थी बच्चों की ख़ुशी, जिसे कल मैंने पुनः एक बार महसूस किया.

जब भी हमारे यहाँ पार्टी होती है तो हमें एक बात का लाभ हमेशा मिल जाता है: हम अपने स्कूल के बच्चों को आमंत्रित कर पाते हैं. कितने मेहमान आते हैं इस बात की हमें चिंता नहीं करनी पड़ती. हमारे पास हमारे स्कूल के बच्चे होते हैं. हमारी पार्टियां कभी भी बोरिंग नहीं होतीं और उनमें हमेशा जीवंतता और उल्लास नज़र आता है. हमारे स्कूल के बच्चों की बदौलत.

हमने उन्हें एक दिन पहले ही आमंत्रित कर लिया था और इसलिए रमोना के जन्मदिन के पर उन्होंने अपनी शिक्षिकाओं से चित्र बनाने, लिखने और बर्थडे पेंटिंग्स बनाने के लिए थोड़े समय का अवकाश मांग लिया. उनके पास कागज़, रंगीन पेंसिलें और अब अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए समय भी था और जब वे दोपहर में, समय से काफी पहले, एक के बाद एक आना शुरू हुए तो सबके हाथों में रमोना के लिए अपने हाथों से बनाए गए सुन्दर-सुन्दर कार्ड्स थे!

जब बच्चे आने शुरू हुए तब आश्रम परिवार और हमारे मेहमान आश्रम को सजाने में पूरी तरह व्यस्त थे. मेरी सुन्दर पत्नी परिवार द्वारा उसे उपहार में मिले वस्त्रों में सुसज्जित थी: एक बहुत सुन्दर ड्रेस में, जिसे देखकर हमारे कई मित्र आश्चर्यचकित रह गए क्योंकि ड्रेस उसके सामान्य वस्त्रों से असाधारण रूप से भिन्न था! हमने कुछ फ़ोटो लिए और फिर उल्लसित बच्चों को एक के बाद एक आश्रम की ओर आता हुआ देखते रहे.

फिर संगीत शुरू हो गया और लीजिए, बच्चों को एक बार भी कहना नहीं पड़ा और वे नाच-गाने में शामिल हो गए! मिनटों में उनकी झिझक ख़त्म हो गई और वे पागलों की तरह नाचने-गाने लगे, लगता था सीधे नृत्य-विद्यालय से चले आ रहे हों! वे मित्र जो हमारे साथ आश्रम में रह रहे थे, वे भी तैयार होकर आ गए और फिर बाहर से आने वाले मेहमानों का आना शुरू हुआ. बच्चे, जो अब तक अपना संकोच और झिझक त्याग चुके थे, उनके साथ बातचीत करने लगे और हाथ खींच-खींचकर उन्हें डांस-फ्लोर पर ले आए और सबके साथ नाचने-गाने और खेलने-कूदने लगे. रंगबिरंगे वस्त्र पहने, उल्लास में दमकती एक दस साल की बच्ची के साथ कौन नृत्य करना नहीं चाहेगा?

हाँ, ये बच्चे गरीब हैं, परन्तु सभी के पास चमकती हुई कम से कम एक ऐसी ड्रेस भी है जिसे वे सभी उत्सवों में पहनते हैं! हमने उनकी यही ड्रेस कई अवसरों पर देखी है और हम जानते हैं कि हमारी सभी जन्मदिन की पार्टियों में पहनने के लिए उनके पास यही एक इकलौती ड्रेस है मगर उसे पहनकर वे अपने आपको विशिष्ट और खूबसूरत महसूस करते हैं! और मेरे लिए खुशी से उछलते इन बच्चों को देखना एक अद्भुत नज़ारा होता है.

नाच-गाने के बाद आश्रम की रसोई में तैयार सुस्वादु भोजन पेश किया गया. उसके बाद केक काटा गया, आखिर उसके बगैर जन्मदिन समारोह अधूरा नहीं रह जाता! और जब सब लोग केक का अपने हिस्से का आखिरी टुकड़ा मुंह के हवाले कर चुके तब फूलों की वर्षा होने लगी! बच्चे सुबह से ही उमंग में भरे स्वेच्छा से करीब 70 किलो गुलाब और गेंदा जैसे रंग-बिरंगे फूलों की डंठल को बड़ी मेहनत से अलग करने में लगे थे शाम को फूलों की होली खेलने के लिए! और फिर हम सब एक-दूसरे पर फूलों की वर्षा करते हुए आनंद-निमग्न हो गए!

सभी आनंद विभोर हो रहे थे! हमारे मेहमान, हम खुद, स्थानीय और बाहर से आए हमारे सभी मित्र और सबसे अधिक बच्चे मस्ती में पागल हो उठे थे! और सबसे ऊपर, हम एक बार फिर इस विचार पर बहुत खुश हुए कि हमारे बच्चों के लिए यह एक बहुत खास मौका था. एक ऐसी पार्टी जिसमें शामिल होने का मौक़ा उन्हें बार-बार नहीं मिलता। उनकी शादियों तक में इतने मेहमान नहीं जुटते होंगे और न ही ऐसा ज़ायकेदार खाना परोसा जाता होगा. लेकिन हम सदा ऐसे समारोह आयोजित करते रहेंगे-क्योंकि उनसे इन बच्चों को और हम सभी को ख़ुशी प्राप्त होती है!

 

जन्मदिन मुबारक हो रमोना! तुम्हारे बगैर मैं जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता! 19 मार्च 2014

आज, 19 मार्च को रमोना का जन्मदिन है. रोज की तरह हर साल इस दिन भी मैं अपनी डायरी अवश्य लिखता हूँ और हर साल हम दोनों मिलकर सोचते हैं कि आज क्या लिखा जाए. आज मैंने तय किया है कि अपनी पत्नी के लिए एक छोटा सा प्रेमपत्र लिखूं, जिसमें साथ बिताए बीते दिनों की यादों का आज तक का ब्योरा हो:

मुझे मार्च 2007 का वह दिन अच्छी तरह याद है, जब सात साल पहले पहली बार मेरी तुमसे बात हुई थी. 19 मार्च को तुम्हारे जन्मदिन पर मैंने सबसे पहली बार बधाई सन्देश भेजा था. उस वक़्त तक मैं तुमसे मिला तक नहीं था और सोच भी नहीं सकता था कि आगे आने वाले तुम्हारे सभी जन्मदिन हम लोग साथ मनाएंगे. आखिर जब हम 2 अप्रैल 2007 के दिन पहली बार रूबरू हुए तो मैंने कहा था कि मुझे हमेशा से मौन आनंदित करता रहा है, कि मैं बात कम करता हूँ. फिर मैंने तुमसे बहुत बातें की और इंतज़ार करता रहा कि तुम भी बातें करो.

कैसे हम राइन नदी के किनारे टहलते रहे. हम फ़ोटो खींचने उस सुन्दर बगीचे की तरफ निकल गए. एक-साथ के हमारे सबसे पहले फ़ोटो, और फिर नदी किनारे आइसक्रीम!

पहली ही मुलाक़ात के बाद बिछड़ना हमारे लिए कितना मुश्किल हो गया था, और आंसू भरी आँखों से तुम्हें विदा करना कितना मुश्किल हो गया था!

फिर अप्रैल, मई और जून में हम सिर्फ तीन बार और मिले और फिर जुलाई से तो साथ-साथ ही हैं और मुझे इस बात का गर्व है कि वह दिन है और आज का दिन, हम एक दिन के लिए भी अलग नहीं हुए हैं.

मुझे याद है कि फोन पर अपने माता-पिता को तुम्हारे बारे में बताते हुए मैं कितना खुश था. जब मैंने उन्हें बताया कि तुम्हीं मेरा प्यार हो और यह कि मैं तुम्हें अपने साथ लेकर ही भारत लौट रहा हूँ.

तुम्हें स्पेन याद है, वह फ्लैट जहाँ सिर्फ तुम और मैं अकेले रहे थे, ग्रीष्म के वे दिन, साथ-साथ खाना बनाना और खाना? तुम्हें याद है कि हम आपस में बात कर रहे थे कि हम दोनों ही खाने के शौकीन हैं. वह दिन मेरी यादों में अब भी ताज़ा है जब लातविया में अपने बिस्तर पर बैठे हुए हम लोग स्त्री-पुरुषों के बारे में, परस्पर सम्बन्धों और सांस्कृतिक भिन्नताओं के बारे में चर्चा कर रहे थे. और यह भी कि कैसे हम कोलोन की सड़कों पर घूमते हुए एक-दूसरे से कह रहे थे कि हम बच्चा नहीं चाहते.

कैसे हम सितम्बर के महीने में दिल्ली के गर्म और उमस भरे मौसम में भारत आए थे, तुमने भारत की धरती पर पहली बार कदम रखा था. मेरे परिवार ने आश्रम में तुम्हारा कैसा स्वागत किया था और कैसे तुरंत ही तुम उनके घर में और उनके दिल में भी बस गई थी.

उन सारे परिवर्तनों को मैं याद करता हूँ, जिनसे होकर हम गुज़रे. कितना कुछ हमने देखा और अनुभव किया. कई बार हम साथ रोए और उससे कई गुना बार हम हँसे भी.

मैं सोच रहा था कि मैं तुम्हें बताऊँ कि तुम दिन पर दिन, सार दर साल और अधिक सुन्दर होती जा रही हो. हालांकि यह है तो सच, मगर मुझे लगता है कि आखिर यह इतना महत्वपूर्ण भी नहीं है. महत्वपूर्ण यह है कि कैसे हमारा प्रेम दिनोदिन प्रगाढ़ होता गया, कैसे हर वह पल, जो हमने साथ गुज़ारा, हमारे प्रेम को गहरा करता गया.

पीछे देखते हुए मैं यह सोचना भी नहीं चाहता कि अब अगर तुम मेरे साथ न हो तो मैं कहाँ जाऊंगा, क्या करूंगा। मैं जीवन में हमेशा सुखी, सफल और संतुष्ट रहा हूँ लेकिन वैसा कभी नहीं जैसा आज हूँ. यह मेरे सुख का एक और पहलू है और यह मुझे तुम्हारे ज़रिये मिला है.

मैं तुम्हारे बगैर अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकता.

मैं तुमसे प्यार करता हूँ."

रमोना के जन्मदिन की पार्टी के चित्र यहाँ देखें.

अपरा के जन्मदिन की दूसरी बड़ी पार्टी – 13 जनवरी 2014

क्योंकि सप्ताहांत में मेरे ब्लॉग हमेशा नए-नए पकवान्नों और अपनी आत्मकथा के पृष्ठों से भरे रहते हैं इसलिए आज मैं आपको अपरा के जन्मदिन की पार्टी का संक्षिप्त विवरण देने जा रहा हूँ। एक शब्द में कहा जाए तो उसे ‘भव्य’ या ‘अतुलनीय’ कहा जा सकता है!

सबसे पहले, मौसम: आयोजन की तारीख 9 जनवरी से बदलकर 11 जनवरी करना हमारा बहुत अच्छा निर्णय सिद्ध हुआ क्योंकि मेघाच्छन्न, कुहरीले गुरुवार के विपरीत शनिवार सूरज की रोशनी में चमचमा रहा था और सारा दिन बादलों का नामोनिशान नहीं था।

ऐसे खुशनुमा मौसम में गुब्बारों से सजे पूरे आश्रम को देखना बहुत सुखद था। आश्रम के पैदल रास्ते को जोड़ने वाले प्रवेश-द्वार और निकास द्वार को भी गुब्बारों से सजाया गया था। आयोजन में सबसे पहले पहुँचने वालों में आश्रम और दूसरी जगहों में ठहरे हुए मेहमानों के अलावा हमारे स्कूल के बच्चे शामिल थे। वे गुब्बारों और फुग्गों को देखकर अचंभित हो रहे थे, टेबल और कुर्सियों से व्यवस्थित रूप से सजे बगीचे को देखकर उन्हें बड़ा मज़ा आ रहा था और जब गाने-बजाने के साज-सामान के साथ डी जे का आगमन हुआ तो वे चीखते-पुकारते उसका स्वागत करने दौड़ पड़े।

लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा आकर्षण बाउन्सिंग-कैसल और बाउन्सिंग-बाल टेंट रहे, जिन्हें हमने बगीचे में स्थापित करवाया था। पार्टी की शुरुआत इन्हीं चीजों से हुई और यही चीज़ें थीं, जो सबसे आखिर में बटोरी गईं क्योंकि जब भी उसमें हवा भरी होती, बच्चे उस पर कूद-फांद कर रहे होते और हँसते-खिलखिलाते हुए धमा-चौकड़ी मचाते रहते! हम यार-दोस्तों के साथ गप-शप में लग गए और किसी ने कहा कि बच्चों को बाउन्सिंग कैसल में प्रवेश के लिए लाइन में लगाना सबसे मुश्किल काम है और उन्हें एक साथ उस पर उछल-कूद मचाने से रोकना और भी कठिन। उनका वह हुजूम वहाँ से तभी हिला जब भोजन के लिए उन्हें पुकारा गया!

पिछली रात से ही रसोइये खाने की तैयारी में लगे हुए थे कि कैसे लज़ीज़ से लज़ीज़ व्यंजन पेश किए जाएँ। खाने की शुरुआत हमने कुछ भारतीय नाश्तों से की और जब बच्चों ने देखा कि हमने खाना शुरू कर दिया है, वे खाने के स्टालों की तरफ दौड़ पड़े और स्टालों के आसपास भोजन करने वालों की इतनी भीड़ हो गई उनके बीच से निकलकर वहाँ तक पहुँचना मुश्किल हो गया! बच्चों को खाते हुए देखना भी अपने आपमें बड़ा सुखद अनुभव था। यह खुशी सिर्फ नाश्ते के वक़्त ही नहीं, बाद में भी बनी रही, जब चावल, छोले-भटूरे, दाल-सब्जियों और मिठाइयों से युक्त उनका मुख्य खाना शुरू हुआ!

लेकिन सिर्फ बच्चों ने ही नहीं, हमारे मेहमानों ने भी भोजन का भरपूर आनंद उठाया! विदेश से भी कई मेहमान आए हुए थे, जिनमें अपरा के नाना भी थे। वृन्दावन के हमारे बहुत से पुराने मित्र और भारत के कई शहरों से दूसरे कई मित्र भी हमारे निमंत्रण का मान रखते हुए यहाँ पधारे। यहाँ तक कि दिल्ली का मेरा एक जर्मन सहपाठी भी आया था। स्वाभाविक ही हमारे कर्मचारी तो थे ही और वे भी परिवार सहित पधारे थे। इसके अलावा मेरे फेसबुक मित्र भी थे, जिन्होंने समारोह में आकर हमें पहली बार उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने का सुअवसर उपलब्ध कराया। आभासी दुनिया के उन मित्रों से यथार्थ में मिलकर बड़ी प्रसन्नता हुई। उनसे इंटरनेट पर हमेशा बातें हुआ करती थीं और उनसे रूबरू मुलाक़ात करना अद्भुत अनुभव था!

अपरा ने अपनी बर्थडे पार्टी का भरपूर आनंद उठाया! बाउंसिंग कैसल पर उसने कई बार उछल-कूद की, विभिन्न अनजान मेहमानों के साथ नाची भी, फिर एक विशाल केक काटकर सबको वितरित किया, गुब्बारों के साथ खेली और आखिर में पेट भर नूडल्स खाए! सारा दिन उसे उपहार मिलते रहे और कल ही हमें फुरसत मिल पाई कि अपरा के लिए लोगों द्वारा इतने प्रेम से लाए गए शानदार उपहारों को खोलकर देख पाएँ!

कुल मिलाकर यह एक शानदार दिन था लेकिन सबसे सुखद बात थी अपने स्कूल के बच्चों को इस आयोजन का पूरा लुत्फ उठाते हुए देखना। जैसा कि आप जानते हैं वे सभी गरीब परिवारों से आते हैं और उनके लिए किसी मित्र को घर पर भोजन के लिए बुलाना भी आर्थिक रूप से तकलीफदेह हो जाता है। सामान्यतया उन्हें इतने सारे व्यंजन खाने को नहीं मिलते और न ही वे अपना भोजन अपनी इच्छानुसार तय कर पाते हैं। और फिर उन्हें बाउंसिंग कैसल पर उछल-कूद करने का मौका भी निश्चित ही नहीं मिल पाता होगा! यह देखना बहुत आनंददायक था कि वे इस आयोजन का कितना मज़ा ले पा रहे थे। वे इस आयोजन की जान थे और यही हम हमेशा करना चाहते रहे थे: इन बच्चों के लिए किस तरह ऐसे मौके जुटाए जाएँ कि वे दूसरे सम्पन्न बच्चों की तरह संसार की सुंदर वस्तुओं का मज़ा ले सकें। हम हमेशा चाहते रहे हैं कि वे हमारी पार्टियों में (आयोजनों में) आएँ और सब कुछ भूल-भालकर कुछ ऐसे अविस्मरणीय पल यहाँ बिताएँ, जिन्हें वे जब भी याद करें आनंदविभोर हो उठें!

इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक शानदार दिन के रूप में हम इस पार्टी को हमेशा हमेशा याद रखेंगे!

आप इस जन्मदिन के आयोजन के कुछ चित्र यहाँ देख सकते हैं