मुझे बदलाव पसंद हैं और मैं अपनी गलतियाँ भी स्वीकार करता हूँ! 10 नवंबर 2014

मैंने अपने जीवन में परिवर्तन की लंबी यात्रा तय की है और इसमें मेरे दस साल से अधिक खर्च हुए हैं। इस लंबी प्रक्रिया मे बाद मैं आध्यात्मिक गुरु से एक नास्तिक में तब्दील हुआ हूँ। अपनी भावनाओं और वक़्त के तकाजे के अनुसार मैंने सदा से ईमानदारी का दामन थामा है। मैं जड़ नहीं होना चाहता और अपनी जिद पर अड़ा नहीं रहना चाहता और न ही बचपन में जानी-समझी हुई बातों से चिपककर रहना चाहता हूँ। मैंने अपना दिमाग खुला रखा, दुनिया भर में खूब घूम-फिरा, उसे गौर से देखा-समझा है और नतीजतन आज मैं वह हूँ जैसा आपको दिखाई दे रहा हूँ।

इस वेबसाइट पर आप मेरे अतीत के बारे में पढ़ सकते हैं। अगर आप फ़ोटो गैलरी पर नज़र दौड़ाएँ तो उससे भी आपको पता चलेगा और अगर 7 साल से चल रहे मेरे ब्लॉग के पुराने ब्लॉग आपने पढ़े हैं तो भी आपको मुझमें क्रमशः होते रहे परिवर्तनों के प्रमाण मिल जाएँगे। मैंने कुछ भी छिपाया नहीं और स्वाभाविक ही, आज भी आपको मेरे अतीत के चिह्न दिखाई देते होंगे। मैं खुली घोषणा करता हूँ और स्वीकार करता हूँ कि यह मैं हूँ और यही मेरा इतिहास है।

मैं बहुत भावुक व्यक्ति भी हूँ तथा बदलावों से घबड़ाता नहीं बल्कि उन्हें पसंद करता हूँ और कभी जल्दबाजी में भी निर्णय ले लेता हूँ! अधिकांशतः मैं अपने निर्णयों से प्रसन्न रहता हूँ परन्तु कभी-कभार मैं उन पर पछताता भी हूँ. मुझे लगता है कि ये वो क्षण होते हैं जबकि मुझे उनसे अपने अहम को नहीं जोड़ना चाहिए! यदि मुझसे कोई गलती हुई तो उसे स्वीकार भी करना चाहिए।

मैं अपनी गलतियों को स्वीकार करता हूँ और यदि संभव है तो अपने निर्णयों को वापिस लेता हूँ और इस तरह जिन्दगी चलती रहती है।

लेखकों: जब कोई आपकी रचना की नक़ल करे तो सम्मान महसूस करें! 1 सितम्बर 2014

क्या आप लेखक हैं? भले आपकी कोई पुस्तक प्रकाशित न हुई हो, हो सकता है आप ब्लॉग-राइटर भी न हों, सिर्फ आपकी लिखने में रुचि भर हो-और अपना लिखा कभी-कभार लोगों तक पहुँचा भर देते हों? हाँ? तब आपने इसका अनुभव अवश्य किया होगा, जिसके बारे में आज मैं यहाँ लिखने जा रहा हूँ: अर्थात आपके अत्यंत कुशल, मजेदार और आज तक न देखे गए सर्वथा मौलिक लेखन की शर्मनाक चोरी।

जी हाँ, यह अक्सर होता है। अतीत में भी यह होता रहा है और यह हमेशा होता रहेगा-लेकिन इसके तरीके बदलते रहेंगे! इस दौरान मुझे इसका पर्याप्त अनुभव हो चुका है!

जब मैं भारत में प्रवचन करता था, उस समय भी लोग मेरे व्याख्यानों की सफलता देखकर वैसे ही प्रवचन करना चाहते थे। लेकिन किस तरह? उसका सबसे अच्छा तरीका था- नोट्स बनाइये और खुद वैसा ही कीजिए! पुराने समय में- ऐसा कहते हुए लग रहा है जैसे मैं काफी वृद्ध हो चुका हूँ लेकिन दरअसल इस बीच तकनीक ने बहुत अधिक विकास कर लिया है! टेप-रिकॉर्डर हुआ करते थे, जिसमें व्याख्यान रिकॉर्ड करके लोग उसके टेप बेचते थे। और बहुत से कथावाचक कैसेट से सुनकर, घर बैठकर उस व्याख्यान को उसके लहजे और भावनात्मक उतार-चढ़ाव सहित शब्दशः याद कर लेते थे। उसके बाद, निश्चित ही, कई लोग हो सकते थे, जो हूबहू मेरी तरह प्रवचन कर सकते थे। परन्तु अवश्य ही वे प्रवचन समाप्त करते ही तुरत-फुरत स्टेज से भाग खड़े होते होंगे, जिससे कोई उनसे उस विषय पर कोई प्रश्न न कर सके! क्योंकि वे एक का भी उत्तर नहीं दे सकते थे!

उस वक़्त भी नहीं जानता था- और अब भी नहीं जानता कि कौन मेरे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन ऑनलाइन आपको कभी-कभी शब्दों के ऐसे टुकड़े या समूह या पूरे के पूरे वाक्य पढ़ने को मिल जाते हैं, जिनसे आपको एहसास होता है कि आपने उन्हें पहले भी कहीं देखा या पढ़ा है। आप उन्हें पढ़ते हैं और आपको लगता है, 'मैं पूरे मन से इनसे शब्दशः सहमत हूँ!' और जब आप कुछ आगे बढ़ते हैं तो कह उठते हैं, 'अरे वाह! यह तो ऐसा है जैसे मैंने ही लिखा हो!' और कुछ पलों बाद ही आपकी समझ में आ जाता है, 'अरे भई, यह तो मेरा ही लिखा हुआ है!' सिर्फ एक पंक्ति नहीं, दो नहीं, पूरा ब्लॉग ही, 600 या उससे ज़्यादा शब्द!

कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि क्या मुझे इस बात पर खुश होना चाहिए कि वे मेरा लिखा जस का तस मार ले गए- कि सावधानी पूर्वक रचे वाक्यों के साथ उन्होंने कोई छेड़छाड़ नहीं की, यह दावा करते हुए कि यह उनका खुद का लिखा हुआ है, बिना जाने-बूझे बीच-बीच में अपना कुछ जोड़ा नहीं!

एक बार अमेरिका में किसी ने मुझसे एक किताब की भूमिका लिखने को कहा। मैंने लिख दिया। जब मुझे उसकी प्रति मिली तो मैंने देखा, नाम तो मेरा है मगर नीचे लिखे शब्द मेरे नहीं हैं! शायद मुझे गर्व होना चाहिए कि मैं इतना लोकप्रिय हो गया हूँ कि दुनिया भर की उक्तियों को मेरे नाम से छाप दिया जाए। उसने मेरे द्वारा लिखा प्रस्तावना बदल दिया था और उसमें अपनी तरफ से भी काफी कुछ जोड़ दिया था! और किताब में अन्दर बहुत से मेरे वक्तव्य जैसे के तैसे अथवा थोड़ी छेड़छाड़ के साथ उसने अपने नाम से छाप दिए थे! अब किताब के साथ साथ मेरे भावों का रचयिता भी वही बन बैठा था!

खैर, किसी भी लेखक की यह कड़ुवी त्रासदी है। लेकिन फिर मुझे लगता है कि इसे मुझे एक चैरिटी का ही काम मानकर भूल जाना चाहिए: हाल ही में एक फेसबुक मित्र से मेरी झड़प हो गई, जिसके प्रोफाइल पर बिना मेरे नाम के या मेरे पृष्ठ या मेरी वेबसाइट की लिंक के लगातार मेरी टिप्पणियाँ दिखाई दे रही थीं। पहले तो पकड़े जाने पर वह शर्मिंदा हुआ और बदलने के लिए राज़ी हो गया। दूसरी बार उसने माफ़ी मांगी और बोला, 'यह मेरी आदत बन चुकी है'। लेकिन तीसरी बार उसने वास्तविकता बता ही दी:

"स्वामी जी जबसे मैं आपका लिखा अपनी प्रोफाइल पर पोस्ट करने लगा हूँ तबसे लोग मुझे भी समझदार समझने लगे हैं!" अपने साथी की अच्छी इमेज बनाने के लिए थोड़ी सी चैरिटी? 🙂

विशेष छूट: सभी विश्रांति कार्यक्रमों पर 20% की छूट! 31 जुलाई 2014

आज हमने एक आकर्षक पेशकश के बारे में सूचना-पत्र जारी किया है, जिसे आपके साथ यहाँ साझा करते हुए मुझे बड़ी प्रसन्नता हो रही है:

हमारे सभी विश्रांति कार्यक्रमों में 20% की छूट!

जैसा कि किसी भी विशेष प्रस्ताव के साथ होता है, इस पेशकश के साथ भी कुछ नियम और शर्तें रखी गई हैं। लेकिन वे बहुत स्पष्ट हैं, उनमें कोई झमेला नहीं है: 20% की इस छूट का लाभ प्राप्त करने के लिए आपको 1 अगस्त से 31 अगस्त 2014 से पहले कुल खर्च की 80% पूरी रकम अग्रिम जमा करते हुए विश्रांति-स्थलों की बुकिंग करनी होगी। उसके बाद अपने पसंदीदा कार्यक्रम में आप 31 दिसंबर 2015 से पहले कभी भी आ सकते हैं।

तो अपने आयुर्वेद और योग विश्रांति-स्थलों की बुकिंग हेतु 50% अग्रिम जमा करके बाद में यात्रा से चार सप्ताह पहले 50% बकाया खर्च जमा करने की जगह अब आपको कुल मिलाकर लागत का सिर्फ 80% एकमुश्त जमा कराना होगा!

मुझे लगता है, यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए ज़्यादा उपयोगी होगी, जो अक्टूबर या नवम्बर की छुट्टियों में हमारे लोकप्रिय आयुर्वेदिक या योग सत्रों में शामिल होना चाहते हैं! और उनके लिए भी, जो साल के सबसे बेहतरीन मौके पर हमारे विश्रांति-स्थलों पर आयोजित वज़न कम करने की आयुर्वेदिक और योग कार्यशालाओं में सहभागी होना चाहते हैं। वे सभी लोग, जो इन विश्रांति-स्थलों की बुकिंग करना चाहते हैं उनके लिए पैसे की बचत का यह एक सुनहरा मौका है-अभी और इसी वक़्त!

स्वाभाविक ही हमारे और भी कई विश्रांति कार्यक्रम हैं- जैसे हमारे सभी योग-विश्रांति कार्यक्रम, जो विभिन्न विषयों पर केन्द्रित होते हैं या हमारा आयुर्वेदिक खाद्य-विश्रांति-कार्यक्रम। यहाँ तक कि 2015 में आयोजित होने वाला होली उत्सव भी इसी प्रस्ताव योजना में सम्मिलित है!

आपमें से वे सभी लोग जो भारत आकर हमारे आश्रम का दौरा करना चाहते हैं, योग का आनंद लेना चाहते है या आयुर्वेद के विभिन्न प्रयोगों का लाभ उठाना चाहते हैं-जल्दी करें, तुरंत बुकिंग कराएँ और अपनी इरादे को कामयाब बनाएँ!

हम आशा करते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग हमारे इस विशेष छूट प्रस्ताव का लाभ उठाएँगे!

अब जबकि मैंने आप सबको हमारे प्यारे शहर वृन्दावन में आने का इच्छुक बना दिया है, मैं उस ज्वलंत प्रश्न का उत्तर देना चाहता हूँ, जो इस वक़्त आपके मन में आ रहा होगा: हमारे इन विश्रांति-स्थलों के खर्च में हम इतनी आकर्षक छूट कैसे दे पा रहे हैं जबकि ये लोकप्रिय विश्रांति-कार्यक्रम वैसे ही अच्छे चल रहे हैं?

सब कुछ न बताते हुए मैं आपको संक्षेप में बताता हूँ-हम एक शानदार परियोजना पर काम कर रहे हैं और अगर इस समय कुछ अतिरिक्त बुकिंग हो जाती हैं तो हमारे इस प्रकल्प का कार्य सुचारू रूप से और अधिक तेज़ी के साथ चल निकलेगा-और फिर आपके सामने होगा एक और खुशनुमा आश्चर्य! तो हमारे विश्रांति-स्थलों की यात्रा के खर्च में एक पंचमांश की छूट की हमारी इस प्रस्ताव-योजना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ और इंतज़ार करें, आपके सामने आने वाले एक विस्मयकारी तोहफे का! और हाँ, अगर आप इससे पहले हमारे आश्रम आते हैं तो मेरे बताने से पहले ही यह रहस्य खुल जाएगा क्योंकि तोहफा पहले ही आपकी आँखों के सामने होगा!

भारत में जल्द ही आपसे मुलाक़ात की आशा है!

Friendshiplog.com – अपने मित्रों की याद को साझा कीजिए- 28 अक्तूबर 2013

मुझे लोकप्रिय होने का अनुभव रहा है। मैंने उस चमक-दमक और ऐश्वर्य को नजदीक से देखा है, जो लोकप्रिय होने के नतीजे में स्वतः प्राप्त हो जाते हैं। मेरे सामने लोगों का हुजूम होता था और सभी मेरे करीब आना चाहते थे। वह सब बड़ा उत्तेजक है, जीवंत और शानदार है-लेकिन मैंने इससे एक चीज़ सीखी है: आप भीड़ के करीब नहीं हो सकते। भले ही ख्यातिप्राप्त यशस्वी व्यक्ति दिन में अपनी जयजयकार के बीच हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार करते हुए गर्व से भर उठते हों मगर को शाम को उन्हें भी किसी कंधे की ज़रूरत पड़ती है, जिस पर अपना थका हुआ सिर रखकर वे सुकून पा सकें। ऐसा कोई व्यक्ति, जिसके साथ वे दिल से हंस सकें या रो सकें, अपनी भावनाओं को साझा कर सकें। ऐसा एक मित्र!

जिन लोगों को अपनी परेशानियों के वक़्त मित्र की ज़रुरत पड़ी है वे जानते हैं कि जीवन में इस संबंध (व्यक्ति) की क्या महत्ता है! इन सम्बन्धों को हर वक़्त तरोताजा बनाए रखना आवश्यक है-और इसी उद्देश्य को सामने रखते हुए हमने एक वैबसाइट शुरू की है: Friendshiplog.com!

यह एक अलग तरह का सोशल मीडिया पेज है। बहुत से परिचितों, या अपरिचितों को जोड़ने के स्थान पर इसमें व्यक्तिगत संबंध स्थापित करने की सुविधा है। फेसबुक पर बहुत सारे लोग नए सम्बन्धों, नए मित्रों और यहाँ तक कि नए कारोबार आदि की तलाश में रहते हैं। बहुत से लोग समझ नहीं पाते कि इतने सारे अनजान लोगों की रोज़ आने वाली फ्रेंड्ज़ रेक्वेस्ट्स का क्या करें? Friendshiplog पर आप अपने वास्तविक मित्रों से मिलते हैं, जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, उनसे प्रेम करते हैं और जिनके साथ बिताए समय की आपके पास बहुत सी साझा स्मृतियाँ हैं!

आप उन स्मृतियों को लिखकर उनका रिकॉर्ड रख सकते हैं, समझ लीजिए, डायरी के रूप में उन यादों का अभिलेख तैयार कर सकते हैं-और आप उन्हें कई भाषाओं में लिख सकते हैं! पेज के फुटर पर आप अंग्रेज़ी, हिन्दी, जर्मन, स्पेनिश और फ्रेंच भाषाओं को सिलैक्ट कर सकते हैं। अपने मित्र को उन पुराने वक़्तों की याद दिलाइए जब आपने एक साथ सुखद समय गुज़ारा था या उनकी मदद के लिए धन्यवाद दीजिए। आपके बारे में पढ़कर और यादों में बसे उन संस्मरणों को पढ़कर आपके मित्र बहुत खुश होंगे। अपने अनुभवों की कहानी लिखकर अपने मित्रों को आभासी आलिंगन में भर लीजिए।

एक छोटी सी कथा लिखने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगता-दोस्ती की शुरुआत से अब तक का पूरा विवरण देने की आवश्यकता नहीं है! एक छोटी सी घटना चुनिए, कोई मज़ेदार दिन, कोई रोचक बातचीत, कोई दुखद लमहा, जब मित्र ने आपकी मदद की हो, और उसे अपने मित्र के साथ यहाँ साझा कीजिए। जब आपका मित्र उसे पढ़ेगा तो वह यादों में खो-सा जाएगा! आप उसकी खुशी की कल्पना नहीं कर सकते!

आपके संस्मरण पढ़कर दूसरे भी अपनी मित्रताओं को लेकर प्रेरित होते हैं, उन पर हंस सकते हैं या आपकी कहानी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ सकते हैं। आज की दुनिया में, जहां टीवी, अखबार और इंटरनेट नकारात्मक खबरों से भरे हुए हैं, यह वैबसाइट एक नखलिस्तान की तरह हो सकती है, जहां इन नकारात्मक खबरों के चलते अवसादग्रस्त होने पर आप अपनी और दूसरों की मित्रताओं के विषय में सकारात्मक बातें साझा करके सुकून का अनुभव कर सकते हैं। लोगों द्वारा साझा की गईं मित्रता के अटूट बंधन की कहानियाँ पढ़कर मानवता में अपनी आस्था को पुनर्जीवित कीजिए।

तो आइए, अपने मित्रों तथा मित्रताओं की कहानियों के जरिये हमसे जुड़िये!

फेसबुक पर भी आप Friendshiplog.com से यहाँ जुड़ सकते हैं!

मेरा पूरा ब्लॉग, विषयानुसार वर्गीकृत, डाउनलोड के लिए उपलब्ध- 10 अक्टूबर 2013

अभी आप जो पढ़ रहे हैं वह मेरे ब्लॉग के अंग्रेज़ी संस्करण की 2117वीं प्रविष्टि है। उनके हिन्दी अनुवाद का कार्य जारी है। मैंने 1 जनवरी 2008 से रोज़ यह ब्लॉग लिखना शुरू किया था और इस बीच एक दिन का भी अवकाश नहीं लिया है। ये सभी प्रविष्टियाँ विषयानुसार 97 अलग-अलग समूहों में विभक्त की गई हैं। ब्लॉग के विकास की ओर अब हमने एक और कदम बढ़ाया है: अब आप इन अलग-अलग समूहों को खरीदकर अपने ई-बुक रीडर, मोबाइल या कंप्यूटर पर डाउन लोड भी कर सकते हैं!

अपने काम के बारे में सामूहिक रूप से अपने मित्रों को बताने के उद्देश्य से शुरू की गई यह आलेख-श्रंखला अब मेरे विचारों की दैनिक अभिव्यक्ति का माध्यम बन चुकी है-और जिसे लोग रोज़ पढ़ते भी हैं। मैं खुश हूँ कि इस दौरान मुझे इन आलेखों पर उत्साहजनक प्रतिक्रियाएँ और फीडबैक मिलते रहे। मैं इस बात पर भी खुश हूँ कि इतने अधिक लोग मेरे विचारों को पढ़ना पसंद करते हैं, भले ही कई बार मेरे विचार उनके विचारों और धारणाओं से मेल नहीं खाते।

कुछ लोग मेरे जीवन के बारे में विस्तार से जानना चाहते थे इसलिए 2011 से प्रति रविवार मैंने आत्मकथात्मक टिप्पणियाँ लिखनी शुरू कीं। 144 ब्लॉग प्रविष्टियों में फैली ये टिप्पणियाँ ‘मेरा जीवन’ नाम से वर्गीकृत की गई हैं और मेरी जीवन-कथा कहती हैं।

कुछ दिन बाद ही हमने हर शनिवार, एक और नियमित ब्लॉग शुरू किया, जो स्वादिष्ट व्यंजनों को पकाने की विधियां पाठकों तक पहुंचाता है। अगर आप खाना पकाना पसंद करते हैं तो यह ब्लॉग समूह आपके लिए ही है! परंपरागत भारतीय व्यंजनों से लेकर विभिन्न नाश्ते और मिठाइयाँ बनाने की विधियाँ इन 146 ब्लोगों में आपको पढ़ने को मिल सकती हैं, जिनमें उन्हें पकाने की विधियाँ बहुत विस्तार से समझाई गई हैं! आप इन ब्लोगों को डाउनलोड करके घर में ही, जब आपका जी चाहे, एक से एक बढ़कर स्वादिष्ट व्यंजन तैयार कर सकते हैं!

कुछ ब्लॉग प्रविष्टियाँ नियमित नहीं दी जातीं लेकिन उन्हें भी आप डाउनलोड कर सकते हैं। जैसे एक लोकप्रिय विषय है धर्म, जिस पर 107 आलेख उपलब्ध हैं। सेक्स, भारतीय संस्कृति, पश्चिमी संस्कृति, रिश्ते, बच्चों की परवरिश, गुरु आदि बहुत से विषय हैं जिनमें आपकी रुचि हो सकती है और आप उन्हें डाउनलोड करके अपनी सुविधानुसार पढ़ सकते हैं!

शुरू से ही लोगों की मांग थी कि इन ब्लोगों को पुस्तकाकार में छपा जाए लेकिन हमेशा कोई न कोई महत्वपूर्ण योजना और अन्य खर्चे आड़े आ जाते थे इसलिए आज भी हमारे पास इन आलेखों की कोई लिखित प्रति नहीं है। फिर भी, कम से कम अब आप अपने पसंदीदा ब्लॉग-समूहों को ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं। सिर्फ 5 यूरो अदा करके आप किसी एक समूह के सभी आलेखों को पीडीएफ़ फ़ारमैट में डाउनलोड कर सकते हैं! उसे आप ई-बुक रीडर, मोबाइल या कम्प्यूटर में ट्रांसफर कर सकते हैं और जब मर्ज़ी हो, पढ़ सकते हैं। अपनी रसोई में व्यंजन बनाने की विधि सीख लीजिए या बिस्तर पर आराम फरमाते हुए या बगीचे में बेंच पर बैठकर विभिन्न समाजों के बीच मौजूद सांस्कृतिक विभिन्नता के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिये!

आप या तो हमारी शॉपिंग-कार्ट पर चले जाएँ और पसंदीदा कैटेगिरी पर पहुँचकर उसे डाउनलोड कर लीजिये। या अगर आप कोई ब्लॉग पढ़ रहे हैं तो स्क्रॉल करके नीचे पहुंचिए और मेरे हस्ताक्षर के बाईं तरफ आपको लिंक मिल जाएगा। हर कैटेगिरी के पृष्ठ के ऊपरी सिरे पर भी लिंक दिया हुआ है।

सबसे अच्छी बात यह है कि जब आप कोई कैटेगिरी खरीद लेते हैं तो उस कैटेगिरी के भविष्य में लिखे जाने वाले ब्लॉग्ज़ भी आप मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं! जब भी मैं उस कैटेगिरी का कोई ब्लॉग लिखूंगा, आप उसका अपडेटेड पीडीएफ़ भविष्य में कभी भी फ्री डाउनलोड कर सकते हैं!

इन ब्लॉग-कैटेगिरी की बिक्री से होने वाली आय से, स्वाभाविक ही, हमारे बच्चों के लिए जारी चैरिटी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी-क्योंकि सब कुछ हम उन्हीं के लिए कर रहे हैं! मेरे लिए लिखने का एक दूसरा कारण यही है कि आपको कुछ अच्छा पढ़ने को मिले और हमारे बच्चों को कुछ बेहतर खाने को! 🙂

नोट: हिंदी के ब्लॉग का अनुवाद कार्य जारी है अतः यह सुविधा अभी केवल ब्लॉग के मूल अंग्रेजी संस्करण के लिए ही उपलब्ध है!