जब चुनाव, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धर्म सीमित करता है – 16 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह धर्म स्वतंत्रता की उनकी परिकल्पना से बहुत अलग है: वह लोगों पर पाबंदी लगाता है, उनका मत-परिवर्तन करना चाहता है और यहाँ तक कि, जो प्रतिरोध करते हैं, उनकी हत्या करता है।

Continue Readingजब चुनाव, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धर्म सीमित करता है – 16 सितंबर 2015

यह कहना कि इस्लाम शांति का धर्म नहीं है, क्यों इस्लाम के विरुद्ध पूर्वग्रह नहीं है – 15 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु स्पष्ट कर रहे हैं कि बिना घृणा के भी आप इस्लाम और उसके प्रसार को लेकर अपनी चिंताएँ व्यक्त कर सकते हैं क्योंकि हिंसा उसके धर्मग्रंथ का हिस्सा है।

Continue Readingयह कहना कि इस्लाम शांति का धर्म नहीं है, क्यों इस्लाम के विरुद्ध पूर्वग्रह नहीं है – 15 सितंबर 2015

यूरोपियन सरकारों से अपील – शरणार्थियों की मदद करें लेकिन मजहब और मस्जिदों पर सख्त पाबंदी लगाएँ – 14 सितंबर 2015

जर्मनी में 200 मस्जिदें तामीर करने के सऊदी अरब के प्रस्ताव पर स्वामी बालेंदु अपने विचार लिख रहे हैं। उनके अनुसार उन्हें चाहिए कि वे इस प्रस्ताव को सिरे से नामंज़ूर कर दें। क्यों? यहाँ पढ़ें।

Continue Readingयूरोपियन सरकारों से अपील – शरणार्थियों की मदद करें लेकिन मजहब और मस्जिदों पर सख्त पाबंदी लगाएँ – 14 सितंबर 2015

क्या बुर्का न पहनकर महिलाएं पुरुषों को बलात्कार करने का आमंत्रण देती हैं? 5 फरवरी 2014

स्वामी बालेंदु इस प्रश्न पर चर्चा कर रहे हैं कि महिलाओं को यौन उत्पीड़न और बलात्कार से बचाने के लिए बनाई गई बुर्का प्रथा क्या अपने उद्देश्य की पूर्ति कर पा रही है।

Continue Readingक्या बुर्का न पहनकर महिलाएं पुरुषों को बलात्कार करने का आमंत्रण देती हैं? 5 फरवरी 2014