हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सारे आश्रम ने एक कैनेडियन दल के साथ बेहद सुखद और व्यस्त समय गुज़ारा। उनके योग विश्रांति शिविर के अनुभवों के विषय में यहाँ पढ़िए।

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आपके हवाई जहाज़ पर एक बच्चा रो रहा है? क्या करना चाहिए और क्या नहीं? 17 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु एक ऐसी स्थिति के बारे में लिख रहे हैं, जिससे हर हवाई यात्री घबराता है: आपके हवाई जहाज़ पर बहुत से बच्चे भी यात्रा कर रहे हैं और उनमें से कम से कम एक बेतहाशा रो-चीख रहा है! क्या किया जाए?

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जर्मनी जाने की तैयारियाँ – 12 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु परिवार सहित जर्मनी प्रस्थान से पहले के आखिरी एक दिन का विवरण लिख रहे हैं।

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जीवन का आनंद लेते हुए खुद को अपराधी महसूस न करें! 5 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों बिना किसी अपराधबोध के आपको वही काम करना चाहिए जिसे आप वास्तव में करना चाहते हैं।

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भारत के विभिन्न इलाकों में एक सप्ताह का सफर – 19 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु पिछले हफ्ते की अपनी यात्रा के बारे में बता रहे हैं, जिसमें उन्होंने भारत के विभिन्न इलाकों की 5000 किलोमीटर लंबी यात्रा संपन्न की।

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अपरा की पहली यात्रा, जिसमें माँ और पा उसके साथ नहीं थे – 13 जुलाई 2015

स्वामी बालेन्दु अपनी साढ़े तीन साल की बेटी, अपरा के विषय में बता रहे हैं, जो अपने चाचा और अपनी परनानी के साथ तीन दिन की यात्रा पर चली गई-जबकि उसके माता-पिता साथ नहीं थे!

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कृपया इसे अवश्य पढ़ें यदि आप रोजमर्रा की जिन्दगी से बचने के लिए छुट्टियाँ मनाने जाते हैं! 2 फरवरी 2015

जब आपका सारा साल अवकाश के उन चार सप्ताहों पर केन्द्रित होता है तो फिर आप उनके साथ क्या गलत कर रहे होते हैं? स्वामी बालेंदु से जानिए!

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सही और गलत की पहचान करने और अपनी धारणाओं पर पुनर्विचार करने में यात्राएँ किस तरह मददगार होती हैं? 6 नवंबर 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों अपना दिमाग खुला रखना महत्वपूर्ण है और किस तरह यात्राएँ सही और गलत के बारे में दूसरों के बोध और अनुभवों को जानने-समझने का मौका प्रदान करती हैं।

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किसी अकेली विदेशी महिला का भारत में सुरक्षित रूप से सफर करना! 20 अक्टूबर 2014

Swami Balendu describes their Ashram's offer to accompany single women on their journeys through India.

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माता-पिता की सबसे बड़ी ख़ुशी: अपने बच्चे को अधिक से अधिक खुश देखना – 11 सितम्बर 2014

इतने छोटे अन्तराल के बाद पुनः जर्मनी जाने की बात सुनकर अपरा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और यहाँ स्वामी बालेन्दु उसकी ख़ुशी का वर्णन कर रहे हैं। लेकिन उसे इतना रोमांचित और प्रसन्न देखकर खुद अपनी ख़ुशी व्यक्त करने योग्य शब्द ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं!

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