आश्रम के मेहमानों के साथ हुए पाँच मज़ेदार अनुभव – 23 मई 2013

आश्रम

पिछले दिनों मैंने कुछ मज़ेदार और विचित्र घटनाओं के बारे में बताया था जो आश्रम में आए मेहमानों के साथ हमने अनुभव कीं। जिन महिलाओं के बारे में मैंने बताया था, वे इतनी यादगार थीं कि उनके लिए पूरा ब्लॉग ज़रूरी था मगर आश्रम के कुछ और भी मेहमान हैं जिनके साथ छोटे-छोटे मगर उतने ही मज़ेदार वाकयात पेश आए। उनमें से 5 घटनाएँ यहाँ पेश हैं।

  1. फ्रांस की एक युवा महिला ने आयुर्वेद योग अवकाश के सत्र की बुकिंग की और आश्रम के दूसरे मज़े लेने के लिए कुछ दिन पहले आ गई। पहले ही दिन उसने पूछा कि क्या आयुर्वेदिक मालिश में सिर की मालिश भी होती है। हाँ, बिल्कुल, हमने कहा। दो दिन बाद वह आई और पूछने लगी कि जूएँ खत्म करने का शैम्पू कहाँ मिलेगा। कुछ शर्म और खेद के साथ उसने कहा: "क्या बताऊँ, फ्रांस में मेरे रूममेट के बड़े-बड़े लच्छेदार बाल हैं इसलिए मेरे सिर में भी हमेशा जूएँ बनी रहती हैं। अब क्योंकि मैं छुट्टियाँ बिता रही हूँ और मुझे सिर की मालिश भी करानी है तो सोचती हूँ पहले जूएँ दूर कर लूँ!"
  2. पूर्वी यूरोप की एक महिला एक बार आश्रम में मेहमान थी और संयोग से मेरे छोटे भाई के लिए उनके मन में प्रेम पैदा हो गया। भाई की तरफ से इस प्रेम का कोई प्रतिदान उन्हें नहीं मिल रहा था इसके बावजूद उन्हें लगा कि भाई उस रात उनके कमरे में आएगा। वह नहीं गया तो उन्हें लगा कि शायद वह दरवाजा खटखटाकर भीतर आने में संकोच कर रहा होगा इसलिए उसने न सिर्फ दरवाजे पर ताला नहीं लगाया बल्कि उसे पूरा खोल दिया। भारत जैसे देश में मच्छरदानी के अंदर सोना या सोते समय कमरा बंद करके मासकीटो रिपलेंट का उपयोग करना आम बात है। अगर नहीं तो आपकी वैसी ही हालत होती है जो उस महिला की हुई थी: सारे शरीर में मच्छर काटने के लाल निशान! प्रेमदंश निश्चय ही नहीं, जैसा कि उस महिला ने अपेक्षा की थी!
  3. एक महिला एक या दो हफ्ते के लिए आश्रम में आई और हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि वह खाना कितना कम खाती है। दरअसल वह काफी विशालकाय महिला थी मगर चिड़िया जितना उसका खाना होता था! लेकिन वह भोजन की प्रशंसा ज़रूर करती थी! बहरहाल हमने समझा कि उसे कोई स्वास्थ्य संबंधी व्याधि है जिसके कारण इतना कम खाकर भी वह इतना मोटी है। लेकिन एक दिन रमोना को उससे कुछ बात करनी थी इसलिए उसने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया और 'खुला है' सुनकर भीतर दाखिल हो गई। उसने वहाँ जो देखा उससे हमारे प्रश्न का जवाब मिल गया: बीमारी नहीं बल्कि बहुत सारी अटरम-सटरम नाश्ते की चीज़ें, मीठे बिस्किट, वैफर्स वगैरह उसके बिस्तर पर पड़े थे! उसकी सिर्फ एक परेशानी थी: बेचारी संकोचवश कह नहीं पा रही थी कि उसे भारतीय भोजन पसंद नहीं आ रहा है।
  4. एक बार एक जापानी महिला हमारी मेहमान बनीं जो सबको बताती रहती थी कि वह एक तरह की उपचारक है और एक ऐसी विधि से इलाज करती हैं जिसके बारे में मैंने न कभी सुना था न देखा था। एक दूसरे मेहमान ने उसकी बात सुनकर उससे कहा कि उसकी आँख में कुछ शिकायत है और उसे अपने दृश्यपटल के किनारों पर कुछ काली बिंदियाँ हमेशा दिखाई देती हैं। कई डॉक्टरों से इलाज करवाया मगर समस्या बरकरार है। जब इस जापानी महिला ने उसकी बात सुनी तो कहा कि वह इसका इलाज कर सकती है। उस व्यक्ति ने भी सहमति दे दी। बाद में इलाज यह हुआ कि उस महिला ने उस व्यक्ति की आँख में अपना अंगूठा डालकर इतनी ज़ोर से दबाया कि उसकी आँखों की न सिर्फ काली बिंदियाँ गायब हो गईं बल्कि आँखों से कुछ भी ठीक से दिखाई देना बंद हो गया! कुछ अजीब से रंग भर दिखाई देते थे। इस इलाज से उबरने में उसे कई घंटे लगे-और दुर्भाग्य से काली बिंदियाँ फिर उभर आईं!
  5. एक बार एक महिला मेहमान आश्रम आई और थोड़े से परिचय के बाद सबसे पहले रमोना से पूछा: यहाँ से समुद्र और बीच कितनी दूर है? रमोना आश्चर्य चकित रह गई मगर हंसी में कहा: मेरे ख्याल से यहाँ से लगभग 1 हजार किलोमीटर तो होगा। रमोना उस महिला की आश्चर्य से फटी स्तब्ध आँखें देखती ही रह गई। उसने वाकई न तो कोई नक्शा देखा था न ही गूगल पर खोज करने की ज़हमत उठाई थी कि आखिर भारत के किस स्थान पर उसका मुकाम होगा! उसने पूछा नहीं, नहीं तो हम उसे बताते कि आप अभी भारत के बीचोंबीच खड़ी हैं! स्वाभाविक ही वह बहुत निराश हुई और आश्रम में सिर्फ दो दिन ही रुकी। फिर उसने गोवा के लिए हवाई जहाज़ पकड़ा और बीच का सौंदर्य लूटने चल दी।
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