संगीत, योग, नृत्य और सेक्स का अद्भुत समन्वय! 24 अगस्त 2014

स्वामी बालेंदु ऐंग्सबका में 2006 में सम्पन्न ‘नो माइंड फेस्टिवल’ के बारे में बता रहे हैं कि कैसे वहाँ लोग तरह-तरह की गतिविधियों के साथ आनंद मनाते रहे और हाँ, एक-दूसरे के साथ अंतरंग होकर भी।

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एक भारतीय संगीतकार को साथ ले जाकर पश्चिमी देशों में कार्यक्रम प्रस्तुत करने का सुनहरा मौक़ा देना- 8 दिसंबर 2013

स्वामी बालेंदु एक संगीतकार की अपनी खोज के बारे में बताते हुए स्पष्ट कर रहे हैं कि उस संगीतकार के लिए यह जीवन में एक बार आने वाला सुनहरा मौका था। कैसे, यहाँ पढ़िये।

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जब मेरे संगीतकारों को मेरे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वीजा नहीं मिला-28 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु जुलाई 2005 की एक घटना लिखते हैं जब कि उनके संगीतकारों को डबलिन में कार्यक्रम करने के लिए वीजा नहीं मिला|

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जब मेरे भारतीय वादक को पश्चिमी शौचालय इस्तेमाल करने का तरीक़ा सीखना पड़ा – 6 जनवरी 13

स्वामी बालेन्दु 2005 का एक मजाकिया किस्सा सुनते हैं जब वो एक संगीतकार को भारत से जर्मनी ले गए|

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