भारत में शिक्षा व्यवसाय को बंद कराने में अम्माजी’ज़ आयुर्वेदिक रेस्तराँ किस तरह सहायक होगा? 21 मई 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि क्यों वे सोचते हैं कि धनी और गरीब दोनों वर्गों से आने वाले बच्चों को अच्छी, स्तरीय निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के अपने स्वप्न को साकार करने में वे सफल होंगे!

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धनवान और गरीब सभी के लिए एक जैसी उच्च स्तरीय मुफ्त शिक्षा का सपना – 20 मई 2015

स्वामी बालेंदु अपने इस स्वप्न का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसके अनुसार वे एक ऐसा स्कूल खड़ा करना चाहते हैं, जो धनी और गरीब सभी बच्चों को बढ़िया से बढ़िया शिक्षा मुफ्त मुहैया करेगा! यह योजना कैसे काम करेगी, यहाँ पढ़िए!

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भारत – जहाँ शिक्षा भ्रष्टाचार और पैसे वालों की शिकार हो गई है – 19 मई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि गरीबों और मध्य वर्ग के लोगों के लिए बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान कर पाना क्यों मुश्किल है-भ्रष्टाचार और शिक्षा के व्यावसायिक रूपान्तरण के कारण!

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भारत का पैसा कमाने का स्कूली धंधा: शिक्षा की बिक्री – 13 मई 2015

स्वामी बालेंदु अपने शहर के स्कूलों का उदाहरण देते हुए बता रहे हैं कि भारत में शिक्षा का व्यवसाय एक बड़े धंधे की तरह उभर चुका है।

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व्यापार में भी सिर्फ पैसा ही सब कुछ नहीं है – 2 सितम्बर 2014

स्वामी बालेन्दु एक महिला की चर्चा कर रहे हैं, जो लोगों की सेवा करके अपनी आजीविका चलाती थी मगर लोग उससे कहते कि उसे अपने काम से ज़्यादा से ज़्यादा धन कमाना चाहिए: महिला समझ नहीं पाती थी कि वह क्या करे!

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वैश्वीकरण के खतरे – जब सारी अच्छी चीज़ें निर्यात कर दी जाती हैं! 10 जुलाई 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे भारत में अच्छी गुणवत्ता वाले सामान, जैसे चावल, चाय, कॉफ़ी या आम मिलना दूभर होता है, जबकि ये सारी वस्तुएँ भारत में खूब पैदा होती हैं। कैसे इस मसले का संबंध वैश्वीकरण से है, यहाँ पढ़िए!

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भारत के निजी स्कूल किस तरह शिक्षा को भ्रष्ट व्यापार में तब्दील किए दे रहे हैं! – 26 मार्च 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे भारत के निजी स्कूल अनाप-शनाप फीस और चंदे के रूप में वसूले जा रहे बेनामी रुपयों से अपनी झोली भरते चले जा रहे हैं.

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ध्यान में विचारशून्यता की बात महज भ्रम है या व्यापार कौशल! 11 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि उनके अनुसार जनसाधारण में प्रचारित ध्यान का ‘लक्ष्य’ अर्थात सम्पूर्ण विचारशून्यता, एक बकवास बात है!

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व्यावसायिक हितों के चक्कर में मुमकिन हुआ धर्म-परिवर्तन कर हिन्दु बनना – 31 जनवरी 13

स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि क्यूं हिन्दु गुरुओं ने गैर-हिंदुओं को अपना अनुयायी बनाना शुरू किया जबकि हिन्दुत्व में धर्म-परिवर्तन संभव ही नहीं है|

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ग़ैर-हिन्दुओं के पास ऊंची हिन्दु पदवियां – उस धर्म में जो अपनाने से नहीं जन्म से मिलता है – 30 जनवरी 13

स्वामी बालेन्दु कुंभ मेले में अपनी चमक-दमक दिखा रहे उन विदेशी साधुओं के बारे में बता रहे हैं जो हिन्दु गुरू के रूप में स्वीकार्य हैं, जबकि हिन्दु धर्म में बाहरियों के लिए कोई स्थान ही नहीं|

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