आपके विवाह के बाद जब आपकी सास आपकी माहवारी का हिसाब रखने लगती है – 11 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु भारतीय समाज, भारतीय परिवार और सास-ससुर द्वारा डाले जाने वाले दबाव के बारे में लिख रहे हैं, जो वे नव विवाहित जोड़ों पर और ख़ास कर नई नवेली बहू पर डालते हैं: जितना जल्दी हो सके बच्चा पैदा करो!

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भारत में परंपरागत आयोजित विवाह – सस्ती नौकरानी ढूँढ़ने का एक तरीका? 3 फरवरी 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कभी-कभी कैसे भारत के पारंपरिक आयोजित विवाह घर में एक अतिरिक्त सहायक प्राप्त करने का ज़रिया नज़र आते हैं। वे इस नतीजे पर क्यों पहुँचे, यहाँ पढ़िए।

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साथ समय गुज़ारना प्यार की गारंटी नहीं है – 19 अगस्त 2014

स्वामी बालेन्दु नहीं मानते कि साथ में पर्याप्त समय गुज़ारना दो व्यक्तियों के प्रेम में इज़ाफा करता है। क्यों? यहाँ पढ़िए।

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बाल विवाह, बाल मजदूरी और शराबखोरी की समस्या – हमारे स्कूल के बच्चे – 24 जनवरी 2014

स्वामी बालेंदु एक लड़के का परिचय आपसे करवा रहे हैं, जिसका पिता शराब पीता है, जिसकी बहन 15 साल की उम्र में ब्याह दी गई और जिसका 14 साल का भाई परिवार का खर्च पूरा करने के लिए मजदूरी करता है।

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अपने अरेंज्ड मैरेज के विषय में वर और वधु कैसा अनुभव करते हैं? 2 दिसंबर 2013

स्वामी बालेंदु अरेंज्ड विवाहों के अनभ्यस्त (विदेशी) लोगों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले एक और सवाल का उत्तर दे रहे हैं: (ऐसे विवाहों के विषय में) नए दंपति कैसा महसूस करते हैं?

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भारतीय विवाह समारोहों में अक्सर पूछा जाने वाला सवाल: क्या विवाह करने वाले एक दूसरे को नहीं जानते? 28 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु पश्चिमी लोगों की इस उत्सुकता के विषय में बता रहे हैं कि जिस विवाह समारोह में वे शामिल हो रहे हैं वह अरेंज्ड है या प्रेम विवाह है।

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एक गरीब भारतीय व्यक्ति के लिए बेटी के विवाह का क्या अर्थ होता है – हमारे स्कूल के बच्चे-15 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के दो बच्चों का परिचय अपने पाठकों से करा रहे हैं। उनका परिवार सिर्फ एक लक्ष्य के लिए धन की बचत कर रहा है:बहन की शादी!

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विपरीत ध्रुव एक दूसरे को आकृष्ट करते हैं! फिर अपनी ही जाति या उपजाति में विवाह पर इतना आग्रह क्यों? 22 अक्टूबर 2013

स्वामी बालेंदु यह प्रश्न उठा रहे हैं कि भारतीय अपनी ही जाति या उपजाति में विवाह तय करने पर इतना ज़ोर क्यों देते हैं, जबकि भिन्न-भिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आए लोगों के बीच ज़्यादा सुखी और दीर्घजीवी दांपत्य-जीवन की संभावना हो सकती है।

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क्या आप आपनी परंपराओं को बचाए रखने के लिए अपने बच्चों की आहुती देने के लिए तैयार हैं?-15 मई 2013

स्वामी बालेंदु बच्चों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं के बारे में लिख रहे हैं जो वे इस डर से करने के लिए मजबूर होते हैं कि उनके माता-पिता उनके प्रेम को अस्वीकार कर देंगे।

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कई प्राचीन परंपराएँ आपके सम्मान की हकदार नहीं हैं! – 13 मई 2013

स्वामी बालेंदु उन लोगों को जवाब दे रहे हैं जो उन पर आरोप लगाते हैं कि भारतीय परंपराओं पर उनकी कोई आस्था नहीं है और वे उनका निरादर करते हैं। अपनी बात को पुनः रेखांकित करते हुए वे बता रहे हैं कि किस आधार पर वे ऐसा करते हैं।

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