स्कूलों में बच्चों को ईश्वर और धर्म से क्यों प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए – 25 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे उन्होंने अपने स्कूल की पाठ्य पुस्तकों में परिवर्तन करके उन्हें अधार्मिक बनाया और किन तरीकों से वे धार्मिक प्रभावों को अपने स्कूल से बाहर रखते हैं।

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माफ कीजिए, मैं नास्तिक गुरु नहीं हो सकता – 6 अगस्त 2015

स्वामी बालेंदु इस बात का एक और कारण बता रहे हैं कि वे क्यों कभी भी एक नास्तिक संगठन की स्थापना नहीं करेंगे: किसी भी संगठन को एक ढाँचे की और परंपरा से चले आ रहे एक पुरोहिताधिपत्य की जरूरत होती है, जिसका वे हिस्सा नहीं बनना चाहते।

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मैं नास्तिकों का कोई संगठन या धर्म क्यों नहीं बनाउंगा! 5 अगस्त 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों, उनके मुताबिक, नास्तिकों का संगठन नहीं होना चाहिए। नास्तिकता को किस प्रकार जिया जाना चाहिए, इस विषय में उनके विचार यहाँ पढ़ें।

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नास्तिकता का प्रसार करके क्या हम दुनिया को बेहतर जगह बना सकते हैं? 4 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि वास्तव में वे क्यों इस बात की परवाह नहीं करते कि आप नास्तिक हैं या नहीं? क्योंकि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता!

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लोगों के जीवन पर धर्म और ईश्वर का प्रभाव – भारत और पश्चिमी देशों के बीच तुलना – 3 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु ईश्वर और धर्म के प्रभाव के मामले में भारत और पश्चिमी देशों में हुए अपने अनुभवों के अंतर के बारे में विस्तार से लिख रहे हैं।

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भविष्य की योजनाओं को लेकर मैं परेशान क्यों नहीं होता: मुझे भरोसा है, मगर ईश्वर पर नहीं – 14 जून 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों वे भविष्य की योजनाएँ बनाते हुए ज़रा भी परेशान नहीं होते। धर्म रहित सकारात्मकता और विश्वास के बारे में यहाँ पढ़ें।

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बेतुका और हास्यास्पद विश्वास कि ईश्वर ने मंदिर तो बचा लिया जबकि हजारों लोगों की जान ले ली – 5 मई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों उनके मुताबिक काठमांडू का मुख्य मंदिर तहस-नहस नहीं हुआ, यह ईश्वर का प्रताप नहीं है!

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अगर आप ईश्वर या धर्म पर कोई आस्था नहीं रखते तो फिर अपनी शुभकामनाओं को ‘प्रार्थना’ क्यों कहते हैं? 30 अप्रैल 2015

स्वामी बालेंदु उन लोगों की बातों पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो कहते हैं कि वे ईश्वर या धर्म पर तो कोई आस्था नहीं रखते मगर प्रार्थना करते हैं। वे बता रहे हैं कि क्यों इन शुभकामनाओं को ‘प्रार्थना’ नहीं कहा जाना चाहिए!

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कर्म सिद्धान्त के अनुसार नेपाल के भूकंप पीड़ित सहायता के पात्र नहीं हैं – 29 अप्रैल 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों कर्म-सिद्धान्त पर विश्वास करने वालों को अपने दर्शन पर पुनर्विचार करना चाहिए। अगर अपने कर्मों के कारण लोग मुसीबतों में फँसते हैं तो यह ईश्वर की इच्छा है- और इसलिए वे मदद के पात्र नहीं हैं!

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"’ईश्वर महज अपना काम कर रहा है" – धार्मिक आस्थावानों का नेपाल के भूकंप पर स्पष्टीकरण – 28 अप्रैल 2015

प्रार्थनाओं पर लिखे गए अपने ब्लॉग पर आई टिप्पणी पर स्वामी बालेन्दु प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। टिप्पणी करने वाले ने कहा कि ईश्वर अच्छी तरह जानता है कि वह क्या कर रहा है!

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