बेतुका और हास्यास्पद विश्वास कि ईश्वर ने मंदिर तो बचा लिया जबकि हजारों लोगों की जान ले ली – 5 मई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों उनके मुताबिक काठमांडू का मुख्य मंदिर तहस-नहस नहीं हुआ, यह ईश्वर का प्रताप नहीं है!

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जब ईश्वर अपने सबसे गरीब श्रद्धालुओं की कोई मदद नहीं करता – हमारे स्कूल के बच्चे – 11 अप्रैल 2014

स्वामी बालेन्दु अपने पाठकों से अपने स्कूल के एक और बच्चे का परिचय करवा रहे हैं, जो बहुत श्रद्धालु अभिभावकों का पुत्र है।

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श्रद्धा से नहीं, पैसे के लिए मंत्र-जाप और कीर्तन – 7 अप्रैल 2014

स्वामी बालेंदु अपने स्कूली बच्चों के कुछ अभिभावकों के काम के बारे में जानकारी दे रहे हैं: वे पैसों के लिए मंदिरों में भजन गाते हैं और पुजारी की मदद करते हैं। बालेंदु जी इस विषय में क्या सोचते हैं, यहाँ पढ़िये।

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गुरु से दीक्षा लेने से मना करना यानी मुसीबत मोल लेना!- 21 जुलाई 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उनके मित्र 2005 में भारत आए और एक गुरु से मिले, जिनके पास कोई काम नहीं था-बिना नाराजी मोल लिए वे कैसे उसे मना करें और उससे पीछा छुड़ाएँ?

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आस्था और अंधविश्वास में कोई फर्क नहीं – अपनी आस्था पर विश्वास करना बंद करें! 5 जुलाई 2013

स्वामी बालेंदु यह प्रश्न कर रहे हैं कि ऐसी बहुत सी बातों को, जिन्हें धर्मभीरु लोग आस्था कहते हैं, हम अंधविश्वास क्यों न कहें। जितना हम समझते हैं, ये दोनों बातें एक दूसरे से उतना अलग नहीं हैं! कैसे, यहाँ पढ़ें।

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