मेरी पत्नी और उसकी तत्क्षण और सहज-स्वाभाविक पहनावे की आदत – 31 मई 2015

मेरा जीवन

आजकल हर रविवार को मैं अपने आश्रम में, अपने मन में या अपने जीवन में हो रही गतिविधियों को आपके साथ साझा करता हूँ। आज अपने जीवन के बहुत ही व्यक्तिगत पहलू को परखते हुए उसे आपके सामने रख रहा हूँ। लेकिन, रुकिए-मेरे नहीं बल्कि मेरी पत्नी के जीवन के पहलू के बारे में! या मेरे और मेरी पत्नी के संयुक्त जीवन के पहलू के बारे में-जैसा आप चाहें, इसे समझ सकते हैं!

आप सभी जानते हैं कि रमोना मूलतः जर्मनी की है। जर्मन लोग व्यवस्थित रहने और हर काम योजनाबद्ध तरीके से करने में माहिर होते हैं और अपने इन गुणों के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। मेरी पत्नी भी अपवाद नहीं है। हालाँकि मैं इतना कह सकता हूँ कि वह टिपिकल, पारंपरिक जर्मन व्यक्ति नहीं है फिर भी किसी काम को योजना बनाकर पूरा करना उसे प्रिय है। एक व्यवस्था, एक सोची-समझी कार्य-योजना के तहत वह किसी भी काम को करना पसंद करती है। इसके अलावा अगर प्लान 'अ' असफल रहता है तो उसके पास उसके विकल्प के रूप में प्लान 'ब' भी उपलब्ध होता है।

नतीजतन, किसी कार्य-योजना में तत्क्षण परिवर्तन करना हो तो उसमें एक तरह की… कहा जाए, दृढ़ता आ जाती है। 🙂

मैं स्वयं बहुत तत्क्षण, त्वरित निर्णय लेने वाला व्यक्ति हूँ। वास्तव में कोई काम करने से पहले मैं अक्सर कोई कार्य-योजना नहीं बनाता। आप उनके नतीजों की कल्पना कर सकते हैं: मेरे विचार मेरे मुँह से झर रहे होते हैं, जिनमें जल्दी-जल्दी प्लान बदलते रहते हैं और हर बार पूर्वनिर्धारित कार्य योजना से अलग कुछ करने की बात होती है-और तब रमोना विचलित हो उठती है।

लेकिन अगर उसे कुछ देर सोचने-विचारने का समय मिल जाए तो सब कुछ ठीक हो जाता है क्योंकि तब उसे समझ में आ जाता है कि वास्तव में यह एक काबिले गौर, तर्कसंगत सलाह है, उसे आजमाना भी मज़ेदार हो सकता है या उससे पूर्वनिर्धारित कार्य-योजना में, जितने का अंदेशा हो रहा था, उतना व्यवधान उपस्थित नहीं होगा!

आठ साल साथ रहने के बाद किसी भी गैर योजनाबद्ध अनोखी बात पर उसकी पहली प्रतिक्रिया के रूप में, मैं उसके मुँह से काफी प्रचंड ‘नहीं’ सुनने का आदी हो चुका हूँ भले ही अक्सर बाद में यह सुनने को मिलता है कि उस पर विचार किया जा सकता है! 🙂

आज सबेरे एक परिस्थिति ने मुझे विचारमग्न कर दिया, जिसमें कि वह मेरे विचार से केवल जर्मन लोगों से ही नहीं बल्कि सभी महिलाओं की स्वभावगत आदत से भी बहुत भिन्न है: और वह है उसके कपड़े पहनने के चुनाव के विषय में।

रोज़मर्रा ज़िन्दगी का यह वह क्षेत्र है, जहाँ मेरी पत्नी चुटकियों में तुरत-फुरत निर्णय लेती है और इस मामले में वह बहुत लचीली भी है! सुना है, महिलाएँ योजना बनाकर काम करती हैं, बिल्कुल जर्मनों की तरह और जैसे मेरी पत्नी जीवन के हर क्षेत्र में करती है, कि किसी ख़ास समारोह में वे ठीक-ठीक क्या पहनना चाहती हैं। एक प्लान कि उस खास मौके पर क्या पहनना है।

लेकिन वास्तव में जब कपड़े पहनने का मौका आता है तो उसे इससे कोई मतलब नहीं होता कि किसी सामान्य दिन की बात है या किसी विशेष समारोह की- यह इस तरह घटित होता है: वह पहले से तय कपड़े पहन लेगी। लेकिन वे उसे पसंद नहीं आएँगे। पहनने के बाद दो मिनट के अंदर वह सारे कपड़े उतार फेंकेगी और कुछ दूसरे कपड़े पहन लेगी। और फिर यही प्रक्रिया एक बार, दो बार या तीन बार या उससे भी अधिक बार दोहराई जाती रहेगी।

जी हाँ, चाहे कोई सामान्य दिन हो या कोई विशेष समारोह हो, वह एक या दो बार अवश्य कपड़े बदलेगी, भले ही काफी समय पहले वह किसी एक कपड़े को पहनने का निश्चय कर चुकी थी, चाहे वह नया हो या पुराना, पहले आजमाया जा चुका हो, लोगों की ओर से उस पर सकारात्मक टिप्पणियाँ प्राप्त हो चुकी हों। इसका कारण इनमें से कोई भी हो सकता है, वह उसे उस दिन दर्शनीय न लग रहा हो या उसे पहनकर उसे अच्छा न लग रहा हो!

योजना हो सकती है लेकिन जब उसके क्रियान्वयन का वक़्त आता है तब वह बेहद तात्कालिक और तत्क्षण व्यवहार करती है, तुरत-फुरत निर्णय लेती है! 🙂

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