क्या सकारात्मक नज़रिया आपको फूड पॉयज़निंग से बचा सकता है? 1 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि भारत में कहीं भी बाहर खाते-पीते समय आपको क्यों बहुत सतर्क रहना चाहिए-और इस मामले में आपका सकारात्मक नज़रिया भी आपको बैक्टेरिया-संक्रमण के खतरे से नहीं बचा सकता।

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अपने आस-पास नज़र दौड़ाएँ और देखें कि कोई भूखा तो नहीं सो रहा! 4 मई 2015

स्वामी बालेंदु कुछ तथ्य रख रहे हैं: दुनिया में और भारत में व्याप्त भूख के आँकड़े। दुनिया की खौफनाक हालत के बारे में यहाँ पढिए!

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क्या आप अपने शरीर से नाखुश हैं, मनपसंद खाना खाने के बाद क्या आप पछताते या ग्लानि महसूस करते हैं? 23 फरवरी 2015

अक्सर लोगों के मन में स्वस्थ और सुंदर शरीर की एक काल्पनिक तस्वीर जड़ जमाकर बैठी होती है। स्वामी बालेंदु इस बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि यह एकमात्र आदर्श नहीं है, जो मीडिया आपको दिखाता है।

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आयुर्वेदिक रेस्तराँ की परियोजना का स्वप्न साकार होना – 15 अक्टूबर 2014

स्वामी बालेन्दु अपने जीवन की सबसे बड़ी परियोजना के बारे में बता रहे हैं: आगामी महीनों में आयुर्वेदिक रेस्तराँ का शुभारम्भ, जहाँ ऑर्गेनिक भोजन तो उपलब्ध होगा ही, साथ ही स्वास्थ्य की दृष्टि से कौन सा भोजन आपके लिए मुफीद होगा इस पर विशेषज्ञों की सलाह भी मुफ्त उपलब्ध होगी।

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वैश्वीकरण के खतरे – जब सारी अच्छी चीज़ें निर्यात कर दी जाती हैं! 10 जुलाई 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे भारत में अच्छी गुणवत्ता वाले सामान, जैसे चावल, चाय, कॉफ़ी या आम मिलना दूभर होता है, जबकि ये सारी वस्तुएँ भारत में खूब पैदा होती हैं। कैसे इस मसले का संबंध वैश्वीकरण से है, यहाँ पढ़िए!

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शामनिज्म (ओझागिरी) और योग के बीच संघर्ष – 8 जून 2014

स्वामी बालेन्दु समझा रहे हैं कि सन 2006 में क्यों उनके कुछ मित्र आत्मसंघर्ष के दौर से गुज़र रहे थे: वे शाकाहारी थे लेकिन उन्हें शामनवाद भी पसंद था, जो मांसाहार को प्रोत्साहित करता है।

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एक पश्चिमी व्यक्ति की नज़र में भारतीय विवाह-समारोह – 26 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु जी की पत्नी जिस तरह एक आधुनिक भारतीय विवाह को देखती हैं, बालेंदु जी की कलम के माध्यम से, शादी हाल, भोजन और मेहमानों सहित, उसका प्रत्यक्ष वर्णन यहाँ पढ़िये।

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बच्चों का मनोहारी खेल अगर धार्मिक वयस्कों द्वारा खेला जाए तो हास्यास्पद तमाशा लगता है- 19 सितम्बर 2013

स्वामी बालेंदु अपनी बच्ची द्वारा खिलौने के जानवरों को भोजन कराने के खेल की तुलना धार्मिक व्यक्तियों द्वारा भगवान की मूर्तियों को भोजन का प्रसाद चढ़ाने के प्रयास से कर रहे हैं।

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तीन बार भोजन – क्या यह बच्चों के लिए विलासिता है? – 11 जून 2013

स्वामी बालेंदु यूनिसेफ द्वारा गरीब बच्चों के विषय में किए गए अध्ययन के पहले पाँच बिन्दुओं पर चर्चा कर रहे हैं। भोजन, किताबें, खेल के साधन और सुविधाएं-विलासिता या आवश्यक अनिवार्यता?

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जब मैं भोजन और शौच का समय निर्धारित नहीं कर पाया – 3 मार्च 13

स्वामी बालेंदु जर्मनों की सुनियोजित जीवनचर्या के साथ अपने अनुभव के बारे में लिखते हैं और बताते हैं कि किस प्रकार एक जर्मन महिला निर्धारित दिनचर्या के अनुसार चलती थी|

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