आयुर्वेद संबंधी हमारी कार्यशालाओं में अदृश्य शक्तियों से सम्बंधित कोई काम नहीं होता – 29 सितंबर 2014

हमने हाल ही में अपना आयुर्वेदिक मालिश प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। वह काफी सफल रहा, सहभागियों ने बहुत कुछ सीखा और हम अपने ज्ञान को और सबसे बढ़कर, आयुर्वेदिक मालिश और उपचार के अपने सालों के अनुभव को दूसरों के साथ साझा करके बहुत खुश हुए। लेकिन एक बिंदु था, जिसमें हमें असुविधा महसूस हुई: जब सहभागियों ने हमसे इन मालिशों के अलौकिक शक्तियों से सम्बंधित पहलुओं को जानना चाहा।

आयुर्वेद का शब्दशः अर्थ है जीवन का विज्ञान। आयुर्वेद विश्रांति सत्रों में हम आपकी शारीरिक और मानसिक समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करते हैं और उन्हें आराम पहुँचाने की या संभव हो तो उनका उपचार करने की कोशिश करते हैं। मालिश शरीर को आराम पहुँचाती है और उससे आपके मस्तिष्क को भी आराम मिलता है। पीठ, कंधे, घुटने और शरीर के दूसरे अंगों में होने वाले दर्द के लिए उपचार उपलब्ध हैं। तनाव, अवसाद और अनिद्रा रोग का इलाज भी संभव है।

लेकिन हम मायावी ताकतों जैसा कोई काम नहीं करते।

वास्तव में हम इस प्रकार की किन्हीं अदृश्य शक्तियों जैसी किसी चीज़ पर विश्वास ही नहीं करते! हम जानते हैं कि कुछ लोग इस विज्ञान को, जिसका शरीर पर एक परिमेय, वास्तविक असर होता है, अदृश्य शक्ति जैसी चीज़ से, जिसे छुआ नहीं जा सकता, जिसे नापा नहीं जा सकता और न ही जिसकी कोई व्याख्या की जा सकती है, जोड़ने की कोशिश करते हैं। जिसके बारे में यह भी कहा जा सकता है कि उसका अस्तित्व ही नहीं है। मैं यह भी जानता हूँ कि मालिश से इलाज करने वाले (massage therapists), अपने धार्मिक विश्वासों के चलते इस तरह मालिश करते हैं, जो पूरी तरह अंधविश्वास से भरी हुई प्रतीत होती है: जैसे वे पूजा की वेदी पर मोमबत्ती जलाते हैं, वे उस टेबल को हाथों और अपने सिर से छूकर प्रार्थना करते हैं- शायद मदद हेतु या मरीज के इलाज हेतु या पता नहीं किसलिए। हम इस तरह का कोई कर्मकांड नहीं करते।

धार्मिक उपचारकों के इन कामों से और बहुत हद तक धार्मिक आयुर्वेद शिक्षकों के व्याख्यानों के कारण भी ऐसे व्यक्ति को, जो आयुर्वेद से जुड़ा हुआ नहीं है, यह गलतफहमी हो सकती है कि यह सब भी आयुर्वेद के हिस्से हैं, कि आयुर्वेद का संबंध ऊर्जा से भी है। लेकिन यह मूलतः ऐसा विज्ञान है, जिसका असर प्रमाणित किया जा सकता है।

एक्यूप्रेशर पॉइंट्स आप स्वयं दबाते हें, खिंची हुई मांसपेशियों पर आप स्वयं अपने हाथ फेरते हैं और आप खुद ही जानते हैं कि तकलीफदेह जोड़ों पर किस तरह हाथ चलाया जाए! स्वाभाविक ही आप सामने वाले की मदद कर रहे होते हैं, स्वाभाविक ही वहाँ एक शांत वातावरण होता है और एक भीतरी नीरवता का एहसास होता है, जो आपको अपना काम बेहतर तरीके से अंजाम देने में मदद करता है। हमारा विचार है कि यह सब आपसे संबन्धित है, आपकी भीतरी स्थिति और आपके काम से संबन्धित है न कि किसी बाहरी शक्ति से। इसके मनोवैज्ञानिक असर के अलावा हम नहीं मानते कि वे सब धार्मिक और अंधविश्वास से पूर्ण कर्मकांड आपके लिए या आपके सामने पड़े व्यक्ति के लिए किसी भी तरह उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

यह स्पष्ट है कि अगर आप यह अपेक्षा करते हैं कि हमारी प्रशिक्षण कार्यशालाओं में ये सब चीज़ें सिखाई जाएँगी तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी। हम आपको किसी भी तरह का अनुष्ठान, कर्मकांड या पूजा करने का तरीका नहीं बता सकते और न ही किसी बाहरी उपचारक शक्ति से प्रार्थना ही कर सकते हैं कि वह आकर आपके सामने पड़े व्यक्ति का इलाज कर दे। आप खुद यह सब करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन हम यह सब आपको सिखाने में असमर्थ हैं। सिर्फ इसलिए कि हमारा इन चीजों में विश्वास ही नहीं है।

हमारे सहभागी आश्रम से आयुर्वेदिक मालिश के ज्ञान और अभ्यास का प्रशिक्षण लेकर प्रसन्नचित्त और संतुष्ट होकर ही वापस लौटे। संभव है वे ऊर्जा संबंधी बिन्दुओं को न समझ पाए हों मगर हम इस संबंध में अपना दृष्टिकोण उनके सामने रखने में सफल हुए। लेकिन इस घटना से हमें एक बात समझ में आई और वह यह कि हमें अपनी वेबसाइट पर यह नोट लगाना चाहिए कि हमारे कार्यक्रमों और कार्यशालाओं में अदृश्य शक्तियों संबंधी कोई बात शामिल नहीं होती। बिल्कुल भी नहीं। इससे हमें प्रशिक्षण हेतु उपयुक्त व्यक्तियों का चुनाव करने में मदद मिलेगी और उन्हें भी यहाँ आकार निराशा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

क्या सम्भोग के दौरान सम्पूर्ण संतुष्टि प्राप्त हो जाने पर पुरुषों की ऊर्जा क्षरित होती है? इस प्रश्न पर मेरा जवाब: 17 जून 2014

हमें ग्रान कनारिया में रहते हुए अब एक हफ्ता हो चुका है और हम इस बीच कुछ बहुत ही अच्छे कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं! इनमें से सबसे पहला एक व्याख्यान था, जो एक बहुत लोकप्रिय विषय से सम्बंधित था: सेक्स और स्वतंत्रता। मैं इसे लोकप्रिय विषय कह रहा हूँ क्योंकि, जैसा इस विषय के साथ हमेशा होता रहा है, हॉल श्रोताओं से पूरा भरा हुआ था और हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक था कि इस विषय पर मैं क्या कहने जा रहा हूँ। व्याख्यान के पश्चात् इतना समय था कि श्रोताओं के कुछ प्रतिप्रश्नों का समाधान किया जा सके और अगले कुछ दिनों तक मैं इस व्याख्यान और श्रोताओं के उन सवालों और उन पर दिए गए मेरे जवाबों पर चर्चा करता रहूँगा।

स्वाभाविक ही, इस व्याख्यान में मेरे द्वारा उठाया गया एक मसला ब्रह्मचर्य की अवधारणा के बारे में था। यह स्वतंत्रता विरोधी अवधारणा है, यह यौन की नैसर्गिक इच्छा के दमन का विचार है और इसका पालन करने पर होने वाले दुष्परिणामों की आप कल्पना भी नहीं कर सकते। हजारों साल से धर्म और समाज द्वारा सेक्स को एक प्रकार की वर्जना में बना दिया गया और उन्होंने ब्रह्मचर्य और परहेज को इस तरह से चित्रित किया जैसे वह कोई पवित्र जीवन-पद्धति हो। उन्होंने ब्रह्मचारी संतों और पुरोहितों को पवित्र और बेहतर इन्सानों की तरह प्रचारित किया-लेकिन इसका नतीजा इन्हीं तथाकथित ‘पवित्र’ व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाले अनगिनत यौन दुराचारों, बलात्कारों और दूसरी बर्बरताओं के रूप में सामने आया! अक्सर यह अत्याचार भी उन पर किया जाता था, जो उन पर विश्वास किया करते थे, जो उन पर आश्रित थे। क्योंकि नैसर्गिक इच्छाओं का दमन किया जाता था तो उसे कहीं न कहीं बाहर निकलना ही था।

यह सब मैंने अपने व्याख्यान में कहा और उसके बाद प्रश्नोत्तर शुरू हुए: क्या पुरुष अपनी ऊर्जा खो नहीं देते जब वे कामोन्मत्त हो जाते हैं?

मैं जानता हूँ कि यौन क्रियाओं पर प्रतिबन्ध लगाने के पक्ष में धार्मिक लोग यही तर्क देते हैं, जिससे उन लोगों को बस में रखा जा सके भले ही इसके लिए मनुष्य की मूल भावनाओं पर कुठाराघात ही क्यों न होता हो। लेकिन आपको इन बातों को बस इतना ही महत्व देना चाहिए, जितना आप किसी परी-कथा को सुनकर देते, जो आपको इसलिए सुनाई जा रही होती है कि उसे सुनकर आप उनकी इच्छानुसार व्यवहार करने के लिए प्रेरित हों। आपको डराने के लिए एक तरह की धमकी कि अगर आपने ऐसा न किया तो कुछ बुरा हो जाएगा, जिसका वास्तव में कोई आधार नहीं होता। डॉक्टरों ने वैज्ञानिक रूप से इसे पूर्णतः गलत सिद्ध किया है-और इस बात को आप स्वयं अनुभव कर सकते हैं!

क्या आपने कभी यौन-सुख लिया है? उस वक़्त आपके मन में किस तरह की भावनाएँ पैदा हो रही होती हैं? प्रेम, संतोष, शांति और सम्पूर्ण आनंद! ये इस तरह की भावनाएं नहीं हैं, जो किसी ऊर्जा के क्षरण के पश्चात् कोई व्यक्ति महसूस करता है! यह इस तरह की भावनाएं नहीं हैं, जिसमें महसूस हो कि उसने अपनी जीवनी शक्ति या अपने सबसे बहुमूल्य सार-तत्व को खोया है और इसलिए कमजोरी महसूस कर रहा हो! इसके विपरीत, यह सुख आपको नई ऊर्जा से भर देता है!

स्वाभाविक ही सम्भोग के दौरान आप कुछ स्वास्थ्यवर्धक व्यायाम करते हैं तो मामूली थकान तो होगी ही, संभव है आप कुछ सुस्ती भी महसूस करें और सोना चाहें-लेकिन सोकर उठने के बाद आप पहले से ज़्यादा शक्तिशाली, मज़बूत और ऊर्जावान महसूस करेंगे! लेकिन तभी, जब आप सेक्स सम्बन्धी उन मूर्खतापूर्ण विचारों को अपने अन्दर किसी प्रकार का अपराधबोध पैदा करने की इजाज़त नहीं देंगे!

ब्रह्मचर्य दुनिया का सबसे अप्राकृतिक विचार है! इसलिए डरें नहीं, अपने यौन जीवन का मज़ा लें और खुश रहें!

मछली बेचना और भाषण देना दो बिल्कुल अलग बातें हैं – 12 जनवरी 2014

सन 2006 की शुरुआत में, जब मैं अभी आस्ट्रेलिया में ही था, मेरे साथ एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने मुझ पर ज़ाहिर किया कि आध्यात्मिक माहौल बहुत व्यावसायिक हो गया है। मैं एक अध्यात्मिक बाज़ार में उपस्थित था-और उसके लिए काम न करने के मेरे निर्णय ने मेरे आयोजकों को आश्चर्यचकित और निराश कर दिया।

पूरी कथा बयान करनी हो तो बता दूँ कि मेरे आयोजक भी वहाँ अपना स्टाल लगाने वाले थे और जब हम वहाँ पहुंचे, उन्होंने बताया कि सप्ताहांत के लिए उन्होंने कोई कार्यशाला नहीं रखी है और उसकी जगह इस अपेक्षा में मुझे यहाँ ले आए हैं कि मैं दूसरों की मदद करने का अपना काम वहाँ करूं। पहले भी मैं ऐसे आयोजनों में शिरकत कर चुका था और उनके विषय में मेरे मन में कोई पुख्ता विचार नहीं बन पाए थे। मैं पहले सिर्फ एक दर्शक के रूप में ही इन कार्यक्रमों में शामिल हुआ था, वक्ता के रूप में नहीं, लेकिन मैं जानता था कि वहाँ बहुत से कार्यक्रम एक साथ व्यवस्थित रूप से आयोजित होते रहते हैं, जैसे अक्सर बड़े मॉल में ख़रीदारी का अनुभव होता है, कुछ-कुछ उस तरह। इसलिए इस बार भी मैं यूं ही चला गया था कि देखते हैं, क्या नज़ारा देखने-समझने को मिलता है।

हम एक बहुत विशाल इमारत तक आए, जहां यह आयोजन हो रहा था और मेरे आयोजक मुझे सीधे अपने स्टाल में ले गए, जिसे उन्होंने एक दिन पहले ही तैयार कर रखा था। उस हाल से गुजरते हुए मैंने दूसरे प्रदर्शकों के स्टालों पर नज़र दौड़ाई। लोग क्रिस्टल्स (स्फटिक), एंजेल-कार्ड, आध्यात्मिक पुस्तकें, सिंगिंग बौल्स (बजाने वाले बर्तन) और बहुत सी उपहार में देने योग्य वस्तुएँ बेच रहे थे। वहाँ अपने अपने स्टाल लगाए टेरो कार्ड से भविष्य बताने वाले लोग थे, अतीन्द्रियदर्शी और ज्योतिषी बैठे हुए थे। आप अपने प्रभामंडल का फोटो प्राप्त कर सकते थे, कई विभिन्न तरीकों से अपना भविष्य जान सकते थे और पर्दों से पृथक्कृत छोटे-छोटे केबिनों में अपनी मालिश करवा सकते थे। बगल में स्थित कुछ बड़े हालों में कई कार्यक्रम भी वहाँ चल रहे थे, जहां गुरुओं आदि के व्याख्यानों के टाइम-टेबलों की घोषणाएँ हो रही थी और उनके पर्चे बांटे जा रहे थे। वह एक तरह का आध्यात्मिक सुपरमार्केट ही था, एक मेला, जहां ऊर्जा को खरीदना-बेचना सहज रूप से चल रहा था।

हाल की तरफ निकलने वाले मुख्य रास्ते पर स्थित मेरे आयोजक का स्टाल भी काफी बड़ा था। आखिर, वहाँ पहुँचकर उन्होंने अपनी सारी योजना के बारे में मुझे बताया। उसने मुझसे कहा, "हम अपने स्टाल का एक छोटा सा हिस्सा पर्दों की सहायता से ढँक देते हैं और आप अपना व्यक्तिगत सत्र यहीं लगा सकते हैं। और बाद में हम आपके प्रवचन के स्थान और समय की घोषणा कर देंगे। उस वक़्त यहाँ बहुत से लोग मौजूद होंगे और आसपास घूम रहे लोगों में जिनकी इस विषय में रुचि होगी, वे आपका प्रवचन सुनने वहाँ आ जाएंगे!"

मेरा मुंह खुला का खुला रह गया, उन्हें क्या कहूं कि मैं क्या सोच रहा हूँ। आखिर मैंने कहा "यहाँ बहुत हल्ला-गुल्ला है", जो ज़ाहिरा तौर पर दिखाई भी दे रहा था, और फिर उन्हें समझाना शुरू कर दिया कि सलाह-सत्र (counseling session) हेतु सिर्फ पर्दे लगाकर इस शोर-शराबे और दूसरे व्यवधानों को दूर नहीं किया जा सकता। इस कार्यक्रम में विश्रांति के लिए कोलाहल रहित सम्पूर्ण एकांत चाहिए! इसके अलावा मैं इस तरह व्याख्यान नहीं दे सकता, जैसे कोई मछली-बाज़ार लगा हो और हर मछली बेचने वाला अपनी मछली की प्रशंसा करता हुआ चीख रहा हो: मछली ले लो, सस्ती स्वादिष्ट मछली! व्याख्यान देते समय मुझे व्याख्यान पर ध्यान केन्द्रित करना पड़ता है, अपने श्रोताओं की आँखों में आंखे डालकर देखना होता है, जिससे मैं उनकी प्रतिक्रिया का अंदाज़ा ले सकूँ और फिर मैं अपने व्याख्यान पर उनसे भी एकाग्रता की अपेक्षा करता हूँ! बार-बार लोग ताक-झांक करें या आकर बैठें और जब उन्हें लगे कि उनकी इसमें रुचि नहीं है तो वापस चले जाएँ, यह सब मुझे मंजूर नहीं है। मैं किसी चीज़ का विज्ञापन नहीं करना चाहता और न ही कुछ बेचने की कोशिश कर रहा हूँ!

किसी ने, शायद मज़ाक में कहा कि "मुझे लगा यह व्यक्ति ध्यान का बहुत बड़ा विशेषज्ञ है और कहीं भी, कभी भी ध्यान लगा सकता है"। मैंने उससे कहा कि वह इस कला का उस्ताद होगा मगर मैं जानता था कि मैं ऐसा नहीं कर सकूँगा। मैं खुद भीड़-भाड़ में भी अपना ध्यान तो लगा सकता हूँ मगर जब मुझे दूसरों के साथ चर्चा भी करनी है तो मुझे बाहर भी एकाग्र होने की आवश्यकता होगी, अपने श्रोताओं पर मेरे व्याख्यान का असर भी मुझे जानना-समझना होगा और इसलिए मुझे उस भीड़ भरे बाज़ार जैसी जगह में अतिरिक्त शांति की आवश्यकता होगी!

मुझे लगता है कि मैं ऐसे मेलों के लिए उपयुक्त व्यक्ति नहीं हूँ।

उस मित्रता का अंत कर दें, जो आपको सिर्फ थकाने का काम करती है- 26 सितंबर 2013

जैसा कि मैंने कल लिखा था, आप अक्सर पाएंगे की आपकी मित्रताएँ जैसी हैं, वैसी ही ठीक हैं, भले ही वे वैसी नज़र नहीं आतीं, जैसी मुख्य धारा का मीडिया अच्छी मित्रता के बारे में प्रचारित करता है। लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि आपको लगे कि आपकी मित्रता गलत दिशा में जा रही है, कि आपका मित्र आपका अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है, या कोई और मामला, जो आपके मन में उस मित्र के प्रति संदेह पैदा कर दे और आप सोचने लगें कि उसके साथ आगे मित्रता जारी रखना ठीक नहीं होगा। ऐसे मामलों में अक्सर हम मित्रता समाप्त करने में हिचकिचाते हैं। लेकिन अगर वह आपको तकलीफ दे रही है तो आपको समझना चाहिए कि उसे समाप्त करना उचित ही होगा!

मित्रता समाप्त करने का निर्णय लेना आसान नहीं होता, खासकर तब जब ज़ाहिरा तौर पर आपकी उस मित्र के साथ कोई लड़ाई न हुई हो या कोई ऐसा बिन्दु न हो, जिससे आपको लगे कि मित्रता तोड़ना ही ठीक है। इस बात का ध्यान रखें कि मैं जहां तक हो सके, मित्रता जारी रखने का पक्षधर रहा हूँ लेकिन ऐसा करते हुए एक बात लोग अक्सर भूल जाते हैं: मित्रता हमेशा दोनों के लिए पुष्टिकारक और मजबूती प्रदान करने वाली होनी चाहिए, थका देने वाली नहीं। न ही ऐसी कि आपका मन इस बात से परेशान हो जाए कि मित्र आपका लाभ उठा रहा है। अगर उसके साथ होने वाली हर मुलाक़ात के बाद आप ठगा सा महसूस करते हैं या आपके मन में यह बात आती है कि आप हर बार देते ही चले आ रहे हैं और बदले में आपको कुछ भी प्राप्त नहीं हो रहा है तो निश्चित समझिए कि कुछ न कुछ गलत हो रहा है।

ऐसे वक़्त मैं हमेशा अपनी भावनाओं को मित्र के साथ साझा करके, मित्रता को बचाने की कोशिश करने की सलाह देता हूँ। अगर आपको लग रहा है कि आपका मित्र आपसे हमेशा कोई न कोई लाभ प्राप्त करता रहता है तो शालीनता के साथ, सीधे उससे बात करके, मामले को सुलझाने का प्रयास करें। अगर बात न बने और समस्या बनी ही रहती है तो उसे ओढ़े रहना व्यर्थ है। आपने सुलझाने का प्रयास किया लेकिन वह आपकी ऊर्जा और शक्ति नष्ट ही कर रही है, न कि उसमें इजाफा कर रही है, तो फिर उसे छोड़ देना ही उचित है।

लेकिन मित्रता तोड़ना एक चुनौती है! खासकर अगर वह लंबे समय से चली आ रही मित्रता है, साथ बिताए समय की बहुत सी सुखद स्मृतियाँ हैं और आप दोनों एक-दूसरे को बहुत करीब से जानते हैं। लेकिन अगर एक बार आपने मित्रता खत्म करने का निर्णय ले लिया है तो उसे परिणति तक पहुंचाएँ क्योंकि आपने अच्छी तरह से समझ लिया है कि वह आपके लिए लाभकारी नहीं है। आपको लगेगा कि इससे आपको बहुत दुख होगा लेकिन अक्सर आप पाएंगे कि अनुचित व्यवहार काफी समय चला और अच्छा हुआ कि अब मुक्ति मिल गई। शायद आप उन मित्रों के लिए पुलकित हो रहे थे, जो शुरू में थे न कि उनके लिए, जो अब आपके साथ हैं। इस दिशा में सोचने पर आप, इस घटना से अप्रभावित रहते हुए, बेहतर महसूस करेंगे।

जब मैं ऐसी मित्रता को समाप्त करने की बात करता हूँ तब मेरा मतलब यह नहीं होता कि आप वाद-विवाद शुरू कर दें या उसके साथ लड़े-झगड़ें या उसे इतना बड़ा मामला बना डालें कि ऐसा लगे जैसे आपके बीच कोई तीखा संघर्ष शुरू हो गया हो। यह आवश्यक नहीं है! मामले को बहुत तूल देने की ज़रूरत नहीं है-सिर्फ उस मित्र के साथ बिताए जाने वाले समय में धीरे-धीरे कटौती करते चले जाएँ और दूसरों के साथ ज़्यादा समय बिताएँ और अपने लिए भी अतिरिक्त समय निकालें। अपने आपको मुक्त छोड़ दें, कहीं जाकर पार्टी करें, थोड़ा सा अपने आप में रहें और महसूस करें कि उसके बगैर आपको कैसा लग रहा है-आप महसूस करेंगे कि दरअसल अच्छा ही लग रहा है।