जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती – 29 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपनी पत्नी और बेटी के साथ जर्मनी में बिताए दूसरे सप्ताह का विवरण लिख रहे हैं। उनके रोमांचक अनुभवों के बारे में यहाँ पढ़ें!

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2016 में रंगों के त्यौहार, होली की मस्ती में हमारे साथ शामिल हों – 22 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों को 2016 की होली पर आयोजित मौज-मस्ती के विश्रांति-सत्र के ज़रिए रंगों के उत्सव का आनंद लेने हेतु आश्रम में आमंत्रित कर रहे हैं!

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दोस्तों के साथ मौजमस्ती से भरपूर समय बिताना – 18 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु उनके आश्रम में आए हुए दोस्तों के बारे में चर्चा करते हुए बता रहे हैं कि कैसे वे सब मिलकर मौजमस्ती से भरपूर शानदार समय गुज़ार रहे हैं।

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जब अपरा ने शेर को नहलाया – 28 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु एक दोपहर का किस्सा बयान कर रहे हैं-उनकी पौने चार साल की बेटी ने सोचा कि आज शेर को नहलाया जाए। पूरी कहानी यहाँ पढ़ें।

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भारत में महिलाओं के साथ हाथ मिलाने के मौके पर अजीब परिस्थिति – हाथ मिलाएँ या नहीं मिलाएँ? 22 मार्च 2015

जब स्वामी बालेन्दु की पत्नी ने लोगों से हाथ मिलाना चाहा तो उनके सामने कुछ अटपटी और मज़ेदार स्थितियाँ पैदा हो गईं। बालेन्दु जी के शब्दों में उन अनुभवों वर्णन पढ़ें और जमकर हँसें!

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अगर आप बहुत व्यस्त होने के कारण मौज-मस्ती नहीं कर पाते तो आपके साथ कहीं न कहीं कोई गड़बड़ ज़रूर है – 2 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि ‘बहुत व्यस्त हूँ’, ‘बहुत थका हूँ’ या ‘अवसादग्रस्त हूँ’ जैसे बहाने बनाकर आपको होली जैसे मस्ती भरे त्योहार से दूर नहीं भागना चाहिए! वे ऐसा क्यों समझते हैं, यहाँ पढिए!

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जब एक परिचयात्मक शब्द सब कुछ बदलकर रख देता है! 4 फरवरी 2015

स्वामी बालेंदु शिक्षक की नौकरी के एक साक्षात्कार का ज़िक्र करते हुए बता रहे हैं कि किस तरह वह उनकी अपेक्षा से बहुत अलग रहा!

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दर्द, नुकसान और राहत – 25 जनवरी 2015

स्वामी बालेंदु अपनी पत्नी, रमोना द्वारा लिखा गद्यांश यहाँ पोस्ट कर रहे हैं। पढ़िए और उनकी भाव-तरंगों को खुद अनुभव कीजिए।

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कुत्ते चॉकलेट के साथ ही योनि पसंद करते हैं! 11 अगस्त 2014

स्वामी बालेंदु एक मज़ेदार कहानी लिख रहे हैं, जिस पर वे और उनके मित्र कई साल से बार-बार हँसते रहे हैं।

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जर्मन ट्रेनों में भारतीय तरीके से सफर – 22 जुलाई 2014

स्वामी बालेन्दु अपने पिछले सफ़र का ज़िक्र कर रहे हैं-यह बताते हुए कि वह इतना दिलचस्प और यादगार क्यों है!

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