इस संज्ञान का मुकाबला कैसे करे कि आप ज़्यादा दिन ज़िंदा नहीं रहने वाले हैं? 28 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु घातक बीमारियों और अपंगता के बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि ऐसी बीमारियों या ऐसे अपघातों के समाचारों का मुकाबला कैसे करें जहाँ कोई दूसरा विकल्प नहीं होता।

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अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो आप अति-आदर्शवादी नहीं हो सकते – 27 अगस्त 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि यदि आप कुछ ज़्यादा ही आदर्शवादी हैं तो यह कई बार आपको दुखी कर सकता है-और इस अप्रसन्नता को दूर करने का उपाय है, यह स्वीकार करना कि वास्तविकता आपके आदर्श से बहुत भिन्न है।

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आश्रम में धूम्रपान पर पाबंदी है लेकिन धूम्रपान करने वालों पर न तो पाबंदी है, न ही उनकी निंदा की जाती है! 26 अप्रैल 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि धूम्रपान करने के आदी मेहमान उनके आश्रम में आश्वस्त और प्रसन्न रहते हैं: वे जानते हैं कि आश्रम के गेट के बाहर जाकर वे धूम्रपान कर सकते हैं और कोई भी इस आधार पर उनका आकलन नहीं करेगा!

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"मैं ईश्वर की इच्छा से गरीब हूँ और इस बारे में कुछ नहीं किया जा सकता" – धर्म का बुरा प्रभाव – 26 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि न जाने कितने लोग अपनी बुरी हालत को सहजता से स्वीकार कर लेते है और उसे बदलने के लिए कुछ भी नहीं करते-क्योंकि वे ईश्वर की इच्छा के विचार पर विश्वास करते हैं!

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क्या आपने अपने सम्बन्धों में नाखुश रहना स्वीकार कर लिया है? 11 जून 2014

स्वामी बालेन्दु एक ऐसी परिस्थिति की चर्चा कर रहे हैं, जहाँ लोग ऐसे संबंधों को जी रहे हैं, जिसमें वे वास्तव में खुश नहीं हैं, जैसे उनका सम्बन्ध महज एक इकरारनामा भर हो।

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अरेंज्ड मैरेज यानी शादी मैंने आपसे करी है या पूरे परिवार से!-29 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि संयुक्त भारतीय परिवारों में अरेंज्ड मैरेज के साथ कितनी समस्याएं उत्पन्न होती हैं!

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क्या स्वर्ग की कोरी कल्पना में स्वाहा हो जाती है किसी के गुज़र जाने की पीड़ा? – 1 जनवरी 13

स्वामी बालेन्दु गम के समय में कुछ लोगों के द्वारा दी गई सलाह के विषय में लिखते हैं, जबकि उन्हें न रोने की सलाह दी गई, पढ़िए धार्मिक कारण और उनका जवाब|

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बदलाव चाहते हैं तो पहले स्वयं को बदलिए – 7 नवम्बर 08

Swami Ji writes about acceptance in relationships. Do not expect your partner to change if you cannot change yourself.

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