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मुफ्त सुविधाओं का लाभ उठाते हुए आर्थिक बराबरी का उपदेश – 25 नवम्बर 2015

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स्वामी बालेंदु आश्रम के एक मेहमान के इस विचार पर एक विस्तृत टिप्पणी लिख कर रहे हैं: हर व्यक्ति को समान मेहनताना दिया जाना चाहिए, चाहे वह कोई भी काम करता हो।

आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए फंदा: अस्तित्वहीन की खोज का अंतहीन सिलसिला – 30 जुलाई 2014

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स्वामी बालेन्दु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो गुरुओं, धर्मों और स्वामियों के चंगुल में फँस गए हैं: इन लोगों को उस वस्तु की खोज करने के लिए उद्यत किया जाता है जिसे वे कभी पा नहीं सकेंगे।

अगर पाना चाहते हैं तो खोजना बंद करें! 29 जुलाई 2014

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स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं, जो अपने आपको ‘साधक’ कहते हैं और उन्हें सलाह दे रहे हैं कि खुश रहने के लिए उन्हें चाहिए कि उसे खोजना बंद कर दें।

सिर्फ असंतुष्ट लोग ही जीवन के मकसद के बारे में पूछते हैं – 28 जुलाई 2014

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स्वामी बालेंदु के व्यक्तिगत सत्र में एक व्यक्ति शामिल हुआ और कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि उसे जीवन के महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार करना चाहिए। जीवन में हर तरह से प्रसन्न और संतुष्ट इस व्यक्ति से बालेंदु जी के वार्तालाप के बारे में पढिए।

नास्तिक होने का अर्थ…- 27 जून 2013

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि एक आस्तिक के आम आचरण के विपरीत नास्तिक अपने जीवन में क्या नहीं करता। उनके जीवनानुभाव की कुछ दिलचस्प बातें यहाँ पढ़िए।