झूठ, बहानेबाजी और देरी – बेईमानी पेशेवर रवैया नहीं है – 19 अप्रैल 2015

स्वामी बालेंदु अपने रेस्तराँ के निर्माण-कर्मियों के साथ महसूस की जा रही समस्याओं के बारे में बता रहे हैं-विशेष रूप से उन लोगों के साथ, जो खुद अपने बताए वक़्त पर काम नहीं करते।

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सही और गलत की पहचान करने और अपनी धारणाओं पर पुनर्विचार करने में यात्राएँ किस तरह मददगार होती हैं? 6 नवंबर 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों अपना दिमाग खुला रखना महत्वपूर्ण है और किस तरह यात्राएँ सही और गलत के बारे में दूसरों के बोध और अनुभवों को जानने-समझने का मौका प्रदान करती हैं।

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प्रिय डॉक्टर, एक अनपढ़ कर्मचारी भी मनुष्य है, सबको एक जैसा समझो! 31 अक्तूबर 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उनकी पत्नी अपनी महिला कर्मचारी के साथ एक डॉक्टर के यहाँ गई और उसकी बातें सुनकर बेचैन हो गई। क्यों और कैसे? यहाँ पढ़िये।

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चैरिटी और उनका गरीबी का प्रदर्शन – 12 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु बताते हैं कि कैसे जो बड़ी बड़ी चैरिटी संस्थाएं हैं वो अपने प्रचार में भूखे नंगे, मैले कुचैले बच्चों का अपनी विज्ञापन सामग्री में प्रयोग करते हैं और क्यों आप उनके बच्चों की ऐसी तस्वीरें नहीं देखेंगे.

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एक स्वयं सेवक का अस्वीकृत आवेदन – गलत प्रवृत्ति का एक उदाहरण – 11 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु बताते हैं कि क्यों एक स्वयं सेवक के आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया!

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लड़ाके लड़ाई जारी रखना पसंद करते हैं – 5 जुलाई 2009

स्वामी बालेन्दु अलग अलग लोगों के व्यक्तित्व और स्वभाव के विषय में लिखते हैं कि कुछ लोग तो लड़ाके होते हैं जो कि संघर्ष, तर्क और आक्रमण करते हैं परन्तु कुछ उनकी तरह होते हैं जो इस प्रकार की परिस्थितियों से पलायन करते हैं|

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