एक प्रतियोगिता, जो मुझे अच्छी नहीं लगी, भले ही मैंने उसे जीत लिया था – 20 जुलाई 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उनके एक मित्र ने एक भाषण प्रतियोगिता आयोजित की, जिसमें उन्हें विजय तो प्राप्त हो गई मगर फिर भी उस प्रतियोगिता के विचार से वे आखिर तक उदासीन ही रहे।

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किस सीमा के बाद सेक्स को लत (व्यसन) कहा जा सकता है? 24जून 2014

स्वामी बालेन्दु एक व्याख्यान के दौरान पूछे गए एक प्रश्न का ज़िक्र कर रहे हैं: आपके विचार में सेक्स का कितना अतिरेक लत (व्यसन) बन जाता है?

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मेरे विचार में प्रेम क्या है? 19 जून 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि जब ग्रान कनारिया में भाषण के दौरान उनसे पूछा गया की प्रेम क्या है तो उन्होंने इस प्रश्न का क्या उत्तर दिया।

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मेरे विचार में सेक्स क्या है? 18 जून 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि उनके व्याख्यान के बाद एक श्रोता ने उनसे पूछा कि सेक्स की परिभाषा क्या है। आपकी संभावित कल्पना से कुछ अलग बालेंदु जी का जवाब यहाँ पढ़े।

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क्या सम्भोग के दौरान सम्पूर्ण संतुष्टि प्राप्त हो जाने पर पुरुषों की ऊर्जा क्षरित होती है? इस प्रश्न पर मेरा जवाब: 17 जून 2014

स्वामी बालेन्दु 'सेक्स और स्वतंत्रता' पर अपने व्याख्यान तथा ब्रह्मचर्य और पुरुष कामोन्माद विषयक प्रश्नों पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।

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मछली बेचना और भाषण देना दो बिल्कुल अलग बातें हैं – 12 जनवरी 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे उनके एक आयोजक ने एक अध्यात्मिक बाज़ार में उन्हें प्रवचन देने का निवेदन किया-बिना किसी पूर्वसूचना के और वह भी सड़क चलते लोगों को इकट्ठा करके।

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कर्म के तीन प्रकार-संचित,प्रारब्ध एवं क्रियमाण – 14 May 08

Excerpt of Swami Ji?s lecture about the eastern philosophy of the three Karmas: Sanchit, Prarabhdh and Kriyman.

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चार प्रकार के प्रश्नकर्ता – जिज्ञासु, बुद्धिमान, परीक्षक और आलोचक – 10 मई 2008

स्वामी बालेन्दु चार प्रकार के प्रश्नकर्ताओं का वर्णन करते हैं|

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