अगर आप ईश्वर या धर्म पर कोई आस्था नहीं रखते तो फिर अपनी शुभकामनाओं को ‘प्रार्थना’ क्यों कहते हैं? 30 अप्रैल 2015

स्वामी बालेंदु उन लोगों की बातों पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो कहते हैं कि वे ईश्वर या धर्म पर तो कोई आस्था नहीं रखते मगर प्रार्थना करते हैं। वे बता रहे हैं कि क्यों इन शुभकामनाओं को ‘प्रार्थना’ नहीं कहा जाना चाहिए!

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"’ईश्वर महज अपना काम कर रहा है" – धार्मिक आस्थावानों का नेपाल के भूकंप पर स्पष्टीकरण – 28 अप्रैल 2015

प्रार्थनाओं पर लिखे गए अपने ब्लॉग पर आई टिप्पणी पर स्वामी बालेन्दु प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। टिप्पणी करने वाले ने कहा कि ईश्वर अच्छी तरह जानता है कि वह क्या कर रहा है!

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नेपाल के भूकंप पीड़ितों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं? किसके सामने? उसके, जिसने यह हादसा बरपाया है? 27 अप्रैल, 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि उनकी नज़र में भूकंप पीड़ितों के लिए की जाने वाली प्रार्थनाएँ व्यर्थ हैं। जिसका या तो अस्तित्व ही नहीं है या है, तो जिसने यह कहर ढाया है, ऐसे ईश्वर के सामने भजन-कीर्तन नहीं बल्कि सदिच्छा से की गई सेवा ही पीड़ितों के काम आएगी!

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