ग़ैर-हिन्दुओं के पास ऊंची हिन्दु पदवियां – उस धर्म में जो अपनाने से नहीं जन्म से मिलता है – 30 जनवरी 13

स्वामी बालेन्दु कुंभ मेले में अपनी चमक-दमक दिखा रहे उन विदेशी साधुओं के बारे में बता रहे हैं जो हिन्दु गुरू के रूप में स्वीकार्य हैं, जबकि हिन्दु धर्म में बाहरियों के लिए कोई स्थान ही नहीं|

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क्या है नागा साधू की मूल अवधारणा – मोह-माया का त्याग या गांजा पीने और नंग-धडंग रहने की छूट? – 29 जनवरी 13

स्वामी बालेन्दु बताते हैं कि नागा साधुओं की मूल अवधारणा क्या है, उनका आचरण कैसा होना चाहिए था और आज असल में है कैसा। भारत के नंगे किन्तु पवित्र पुरुषों के ऊपर एक आलोचनात्मक दृष्टि|

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प्रदूषित गंगा से रोगों को आमंत्रण-सिर्फ पापों के धुलने तक सीमित नही है गंगास्नान 28 जनवरी 2013

स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि कुम्भ स्नान की वजह से गंगा में प्रदुषण का स्तर कितना बढ़ गया!

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प्रदर्शन और धन कमाने का धन्धा – कुम्भ मेले में साधु और गुरु – 24 जनवरी 2013

स्वामी बालेन्दु कहते हैं कि धन का प्रदर्शन करने वाले साधु क्या सच में साधु सन्यासी हैं?

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साधु – एक अनासक्त जीवन – 18 फरवरी 2008

स्वामी बालेन्दु भौतिक संसार से पूरी तरह अनासक्त साधुओं के बारे में और विस्तार से बता रहे हैं। साथ ही यह भी कि सामान्य जीवन जीते हुए कोई भी साधु की तरह रह सकता है।

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