संथारा की मूर्खतापूर्ण परंपरा की वजह से आत्महत्या को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता! 26 अगस्त 2015

स्वामी बालेंदु एक टी वी परिचर्चा का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसमें वे भी शामिल हुए थे। यह चर्चा संथारा पर थी, जो जैन समुदाय की एक पुरानी परंपरा है और जो 75 साल से ऊपर के लोगों के बीच आत्महत्या को प्रोत्साहन देती है।

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भारत में परंपरागत आयोजित विवाह – सस्ती नौकरानी ढूँढ़ने का एक तरीका? 3 फरवरी 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कभी-कभी कैसे भारत के पारंपरिक आयोजित विवाह घर में एक अतिरिक्त सहायक प्राप्त करने का ज़रिया नज़र आते हैं। वे इस नतीजे पर क्यों पहुँचे, यहाँ पढ़िए।

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जब मैं पारंपरिक विवाह समारोह में शिरकत करता हूँ तो क्या मैं दहेज प्रथा का समर्थन करता हूँ? 25 दिसंबर 2014

स्वामी बालेंदु एक दहेज प्रथा विरोधी भारतीय के इस सवाल का जवाब दे रहे हैं क्या उसे पारंपरिक विवाहों से दूर रहना चाहिए।

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जब परिवार वाले अस्पृश्यता पर अमल करें तब उनके प्रति आप सहिष्णु नहीं रह सकते – 24 दिसंबर 2014

स्वामी बालेंदु उन परिस्थितियों का वर्णन कर रहे हैं, जहाँ आप सहिष्णु बने नहीं रह सकते, विशेषकर अपने करीबी रिश्तेदारों की आस्थाओं और अंधविश्वासों को लेकर: जैसे अस्पृश्यता के मामले में।

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नए ज़माने के भारतीय युवाओं: क्या आप अपने परिवार के तथाकथित पिछड़ेपन पर शर्मिंदा हैं? 23 दिसंबर 2014

स्वामी बालेन्दु बहुत से युवा, प्रगतिशील और आधुनिक भारतीय पुरुषों और महिलाओं की इस समस्या पर लिख रहे हैं कि वे रूढ़िवादी परिवारों से आते हैं-यहाँ तक कि वे मित्रों के सामने अपनी इस पृष्ठभूमि को स्वीकार करने में भी संकोच करते हैं!

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पुरानी परम्पराओं और धार्मिक रूढ़ियों की जकड़न से अपने मस्तिष्क को आज़ाद कीजिए! 9 अक्टूबर 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों धार्मिक विश्वासों, परंपरागत व्यवहारों और सांस्कृतिक मूल्यों को भी कभी-कभी साफ करना ज़रूरी है!

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लड़के की आस में पांच लडकियां पैदा हो गईं – हमारे स्कूल के बच्चे- 8 नवंबर 2013

स्वामी बालेन्दु अपने स्कूल की चार लड़कियों से अपने पाठकों का परिचय करा रहे हैं। परंपरागत भारतीय परिवार की तरह वे कैसे गुज़र-बसर करते हैं, यहाँ पढ़िये।

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धार्मिक परम्पराएँ शिष्यों को गुरुओं के अपराधों पर पर्दा डालने पर मजबूर करती हैं-12 सितंबर 2013

स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं की कैसे धर्म शिष्यों को आदेश देता है कि न सिर्फ वे उनकी आँखों के सामने किए जा रहे गुरुओं के अपराधों की अनदेखी करें बल्कि दूसरों को भी उसके खिलाफ बोलने की इजाज़त न दें!

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आश्रम में जरूरतमंदों की सहायता करने की परंपरा है – 30 जून 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि आश्रमों की प्राचीन परम्पराओं का पालन करते हुए उनका आश्रम संस्कृत के विद्यार्थियों को भोजन और रहने की जगह मुहैया कराता था।

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कई प्राचीन परंपराएँ आपके सम्मान की हकदार नहीं हैं! – 13 मई 2013

स्वामी बालेंदु उन लोगों को जवाब दे रहे हैं जो उन पर आरोप लगाते हैं कि भारतीय परंपराओं पर उनकी कोई आस्था नहीं है और वे उनका निरादर करते हैं। अपनी बात को पुनः रेखांकित करते हुए वे बता रहे हैं कि किस आधार पर वे ऐसा करते हैं।

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