अनगढ़ प्रेम – 25 जून 2013

प्रेम

क्या आप एक से अधिक लोगों के साथ प्रेम कर सकते हैं?

जी हाँ, बिलकुल कर सकते हैं। प्रेम क्या है?

जब आप किसी पुरुष के प्रति प्रेम का अनुभव करती हैं तो क्या उससे विवाह करना भी ज़रूरी है?

जब आप किसी महिला से प्रेम करते हैं तो क्या उसके साथ सोना भी ज़रूरी है?

जितने लोगों के साथ प्रेम करना चाहें, करें।

अपने प्रेम की सुगंध जितना फैला सकें फैलाएँ, उसे बांधकर न रखें। दूसरों से प्रेम करने और उनसे प्रेम पाने के सुख का आनंद उठाएँ। उनकी आँखों में आंखे डालकर देखें, जिन बातों को आप शिद्दत के साथ महसूस करते हैं, उन्हें बताएं, अपने मन को खोल दें और उसे साझा करें।

सबके साथ विवाह करना ज़रूरी नहीं है। सबके साथ संभोग करना आवश्यक नहीं है।

प्रेम सिर्फ शारीरिक संबंध ही नहीं होता। चुंबन, रोमान्स या छेड़छाड़ हो ही, यह आवश्यक नहीं है।

प्रेम सिर्फ प्रेम है।

हो सकता है कि आपका प्रेम संबंध इतना भाग्यशाली हो कि उसकी परिणति आपके विवाह में भी हो जाए और आप उसके साथ जीवन भर साथ रहें।

यह प्रेम है।

आपके प्रेम संबंध का अर्थ वर्षों की गहरी मित्रता के रूप में भी सामने आ सकता है।

वह भी प्रेम है।

आपका प्रेम संबंध सिर्फ एक घंटा समीप बैठकर कप भर कॉफी पीने तक सिमट सकता है।

लेकिन वह भी प्रेम है।

आपका प्रेम संबंध पल भर का भी हो सकता है जिसमें आप आँखों ही आँखों में कितना कुछ कह जाते हैं। एक क्षण, जिसमें आप महसूस कर लेते हैं कि यह दुनिया आपकी और उसकी साझा मिल्कियत है। इससे ज़्यादा कुछ नहीं।

यह भी प्रेम है।

प्रेम की अपनी सुंदरता है, पता नहीं वह कितने तरीकों से खुद को व्यक्त करता है। आपका प्रिय, उसके प्रति आपके प्रेम को जानता हो या न जानता हो, प्रेम का आनंद लें।

प्रेम एक अनुभव है। यह एक अहसास है। वह आपका है, मगर सबका भी है।

उसकी मूर्ति बनाने की या उसका चित्र बनाकर मढ़ने की कोशिश मत करो, उसे किसी खांचे में फिट मत करो, अपने विचारों के अनुसार उसे बदलने की कोशिश मत करो। उसे किसी संबंध का नाम देकर छोटा करने की कोशिश मत करो। उसे सीमाओं में न बांधो, स्वतन्त्रता पूर्वक प्रेम करो।

प्रेम को वही बने रहने दो, जो वह है।

प्रेम स्वतंत्र है।

प्रेम सबके लिए है।

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