आइए, लिंग की पूजा करें – उसमें क्या बुराई है? 18 फ़रवरी 2015

स्वामी बालेन्दु शिवलिंग को लेकर प्रचलित एक और कहानी सुना रहे हैं-और साथ ही इसमें निहित हिन्दू धर्म के एक और पाखंड का पर्दा फाश कर रहे हैं।

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एक मित्र, जो धर्म पढ़ाता है मगर उस पर विश्वास नहीं करता – 17 जुलाई 2014

स्वामी बालेन्दु अपने एक जर्मन मित्र के बारे में बता रहे हैं जो अपने स्कूल में एक विषय के रूप में धर्म पढ़ाता है मगर ईसाइयत पर उसका कोई विश्वास नहीं है। उनके बीच हुई बातचीत यहाँ पढ़िए।

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मुक्ति की आकांक्षा में मृत्यु कि प्रतीक्षा करने के स्थान पर जीवित रहते हुए अपने आपको धर्म के बंधन से मुक्त कीजिए और खुश रहिए! 16 जुलाई 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे हिन्दू दर्शन लोगों को उन अपराधों के लिए अपराधी ठहराता है, जो उन्होंने जीवन में कभी किए ही नहीं होते। इसका समाधान क्या है, उनके शब्दों में पढिए!

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सन 2005 में अपने पिछले पांच सालों की समीक्षा: वह 2013 के अंत में कैसी लग रही है! 29 दिसंबर 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि सन 2005 में अपने पिछले 5 साल के जीवन पर दृष्टिपात करने पर उन्हें कैसा लगा था-और यह भी कि अगले सालों में क्या हो सकता था और वह कैसा दिखाई देगा!

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जब मैंने अपने गुरु को बताया कि मैंने अपना गुरु का चोला त्याग दिया है- 17 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि गुरु के रूप में पर्याप्त लंबा जीवन गुजारने के बाद अपने एक सामान्य इंसान बन जाने के विषय में अपने परिवारजनों को बताने का विचार और इच्छा उनके मन में कैसे पैदा हुई!

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क्यों आप खुद कठपुतली बनकर अपने जीवन को किसी गुरु के हवाले करना चाहते हैं?- 22 जुलाई 2013

स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं कि क्यों वे समझते हैं कि गुरुवाद ताकत और भोले-भाले लोगों के शोषण को दावत देता है। अपने गुरु आप बनिए!

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अपनी जिम्मेदारियों से बचने का गुरु प्रदत्त सम्मोहक प्रस्ताव – 3 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि किस तरह हिन्दू धर्म में किस तरह गुरुवाद को बढ़ावा दिया गया है और उसके क्या दुष्परिणाम होते हैं|

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‘धार्मिक हूँ, अंधविश्वासी नहीं’ – संभव तो नहीं परन्तु यह सोच भी शुभ संकेत है – 11 फरवरी 2013

स्वामी बालेंदु धर्म और अंधविश्वास के बीच सम्बन्धों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि दोनों को अलग करना संभव नहीं है मगर लोग अगर इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं तो यह एक शुभ संकेत है।

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आपका धर्म कहता है कि ईश्वर को सिद्ध करने की कोशिश मत करो-फिर आप तर्क क्यों करते हैं?-8 फरवरी 2013

स्वामी बालेन्दु धार्मिक विश्वासुओं से सवाल कर रहे हैं कि ईश्वर के अस्तित्व के सम्बन्ध में वे वाद-विवाद में क्यों उलझते हैं, जबकि धर्म उनसे कहता है कि आप तर्कों और विचार-विमर्श से ईश्वर को नहीं जान सकते.

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पापों को धोने वाला कुम्भस्नान – धर्म का सिनेमा स्वर्ग के टिकट को बेचता है – 23 जनवरी 2013

स्वामी बालेन्दु कुम्भ मेले के विषय में प्रचलित पापों को धोने वाले विश्वास के विषय में अपने विचार लिखते हैं|

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