2016 में रंगों के त्यौहार, होली की मस्ती में हमारे साथ शामिल हों – 22 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों को 2016 की होली पर आयोजित मौज-मस्ती के विश्रांति-सत्र के ज़रिए रंगों के उत्सव का आनंद लेने हेतु आश्रम में आमंत्रित कर रहे हैं!

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आश्रम में होली – उन्मादी मगर हर तरह से सुरक्षित मौज-मस्ती – 8 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु आश्रम में होने वाले होली समारोह का वर्णन कर रहे हैं, जहाँ भारतीय और विदेशी मिलकर सुरक्षित माहौल में होली खेलते हैं।

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हर साल उत्तरोत्तर अधिक मौज-मस्ती – अपरा का होली समारोह – 5 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु होली पर अपनी बेटी अपरा की मौज-मस्ती का वर्णन करते हुए बता रहे हैं कि कैसे उसे देखते हुए उन्हें अपना बचपन याद आ जाता है।

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योग-विद्यार्थियों के साथ 2007 की होली – 4 जनवरी 2015

सन 2007 में आश्रम में योग शिक्षकों का प्रशिक्षण शिविर लगाया गया था। स्वामी बालेंदु उस शिविर में आए छात्रों की उपस्थिति में आयोजित होली समारोह को याद कर रहे हैं।

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आजकल अपरा को सारा दिन नाचना पसंद है! 18 मार्च 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि इस वक़्त अपरा को नृत्य करना कितना अधिक भा रहा है, होली का उसने कितना मज़ा लिया और अपनी माँ के जन्मदिन का वह किस कदर इंतज़ार कर रही है.

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होली मुबारक – 17 मार्च 2014

स्वामी बालेंदु रंगों का भारतीय त्योहार, होली मनाने के पीछे की मूल भावना को स्पष्ट करते हुए सभी को होली-2014 की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ प्रेषित कर रहे हैं!

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होली सिर्फ मौज-मस्ती ही बनी रहे – पश्चिमी पर्यटकों पर कोई विकृत प्रभाव न छोड़े- 16 मार्च 2014

स्वामी बालेंदु सन 2006 में होली के दौरान अपने पश्चिमी मित्रों को हुए नकारात्मक अनुभव का वर्णन कर रहे हैं।

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2006 में होली पर घर-वापसी – 9 मार्च 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उन्होंने आस्ट्रेलिया में कुछ दिन और रुकने का आमंत्रण ठुकरा दिया था क्योंकि वे होली पर घर आना चाहते थे!

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आप हर किसी की खुशियों की जिम्मेदारी नहीं ले सकते – 29 मार्च 2013

स्वामी बालेन्दु बताते हैं कि क्यों आप हर किसी की खुशियों की जिम्मेदारी नहीं ले सकते!

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जन्मदिन मनाना, होली मनाना और साथ होना – 27 मार्च 2013

स्वामी बालेन्दु आश्रम में होली उत्सव के विषय में लिखते हैं|

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