बच्चों के मन मेँ हम अवसाद और अक्रियाशीलता के बीज बोते हैं – 2 अप्रैल 2014

बच्चों की स्कूली शिक्षा के दौरान और उनके फुरसत के क्षणों मेँ अपने व्यवहार से हम बच्चों को बहुत सी मनोवैज्ञानिक समस्याओं की ओर धकेल देते हैं। कैसे, स्वामी बालेंदु के शब्दों मेँ पढ़िये।

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आप खास हैं क्योंकि आप, आप हैं- इसलिए नहीं कि आप क्या करते हैं!-14 अगस्त 2013

स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं कि क्यों वे ऐसा समझते हैं कि वृहत बहुसंख्यक समूह का हिस्सा बन जाना ठीक ही है-और यह बात आपको किंचित भी कम विशिष्ट नहीं सिद्ध करती!

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यह आपका जीवन है – ध्यान रहे, समाज आप पर कोई दबाव न बना पाए- 13 अगस्त 2013

स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं, जिन्होंने अपने जीवन की एक ऐसी विशेष रूपरेखा (कार्ययोजना) बनाई थी, जो समाज के सामान्य नियमों और परम्पराओं के विपरीत थी।

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पूर्णकालिक स्कूल – क्या हम अपने बच्चों को रोबोट बना देना चाहते हैं? – 8 जुलाई 2013

जब स्वामी बालेंदु ने सुना कि जर्मनी के प्राथमिक स्कूल अब पूर्णकालिक स्कूल हो जाएंगे तो उन्हें दुखद आश्चर्य हुआ। इस विषय में उनके विचार यहाँ पढ़ें।

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