विपरीत ध्रुव एक दूसरे को आकृष्ट करते हैं! फिर अपनी ही जाति या उपजाति में विवाह पर इतना आग्रह क्यों? 22 अक्टूबर 2013

स्वामी बालेंदु यह प्रश्न उठा रहे हैं कि भारतीय अपनी ही जाति या उपजाति में विवाह तय करने पर इतना ज़ोर क्यों देते हैं, जबकि भिन्न-भिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आए लोगों के बीच ज़्यादा सुखी और दीर्घजीवी दांपत्य-जीवन की संभावना हो सकती है।

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अजीब बात है, अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं के बीच सम्प्रेषण अधिक स्पष्ट और आसान है- 21 अक्तूबर 2013

स्वामी बालेंदु अपने खुद के अनुभव से बता रहे हैं कि दो भिन्न संस्कृतियों और भाषाओं के लोगों के बीच स्थापित संबंध अधिक दीर्घजीवी होते हैं।

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जब सेक्स में जीवनसाथी की रुचि ख़त्म हो जाये – 7 अप्रैल 2013

स्वामी बालेन्दु उस जोड़े की समस्या लिखते हैं जिसमें कि पत्नी की सेक्स में रूचि समाप्त हो गई थी|

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