आइए, मिलजुलकर उन किसानों की मदद करें, जिनकी फसल पूरी तरह बरबाद हो गई है! 12 अप्रैल 2015

स्वामी बालेंदु अपने इलाके के उन किसानों की मदद की अपील कर रहे हैं, जिनकी खड़ी फसल हाल की बारिश और ओलावृष्टि के कारण पूरी तरह तबाह हो गई है!

Continue Readingआइए, मिलजुलकर उन किसानों की मदद करें, जिनकी फसल पूरी तरह बरबाद हो गई है! 12 अप्रैल 2015

वृन्दावन में ओलावृष्टि – 5 अप्रैल 2015

स्वामी बालेन्दु हाल ही में हुई ओलावृष्टि के बारे में बता रहे हैं, जिसके चलते वृन्दावन को विशाल आकार के ओलों की मार झेलनी पड़ी। उसके आगमन और फिर उसकी मार की तकलीफ के बारे में बालेंदु जी के शब्दों में यहाँ पढिए!

Continue Readingवृन्दावन में ओलावृष्टि – 5 अप्रैल 2015

यमुना आरती – अन्धविश्वास, भोजन की बरबादी, प्रदूषण और मस्ती भरा माहौल – 3 दिसम्बर 2014

स्वामी बालेन्दु उनकी पत्नी को वृन्दावन के केशी घाट पर यमुना आरती के दौरान हुए अनुभव का वर्णन कर रहे हैं-बहुत सी त्यागने योग्य बुरी बातें भी देखनी पड़ीं मगर उसके बावजूद उसने हर पल का आनंद लिया।

Continue Readingयमुना आरती – अन्धविश्वास, भोजन की बरबादी, प्रदूषण और मस्ती भरा माहौल – 3 दिसम्बर 2014

वैश्वीकरण के खतरे – जब सारी अच्छी चीज़ें निर्यात कर दी जाती हैं! 10 जुलाई 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे भारत में अच्छी गुणवत्ता वाले सामान, जैसे चावल, चाय, कॉफ़ी या आम मिलना दूभर होता है, जबकि ये सारी वस्तुएँ भारत में खूब पैदा होती हैं। कैसे इस मसले का संबंध वैश्वीकरण से है, यहाँ पढ़िए!

Continue Readingवैश्वीकरण के खतरे – जब सारी अच्छी चीज़ें निर्यात कर दी जाती हैं! 10 जुलाई 2014

खूबसूरत ग्रान कनारिया द्वीप पर आनंद मनाते हुए – 25 जून 2014

स्वामी बालेन्दु ग्रान कनारिया में काम करते हुए, अपने परिवार के साथ घूमते-फिरते और ख़ुशियाँ मनाते हुए बिताए गए अढ़ाई हफ़्तों के बारे में बता रहे हैं।

Continue Readingखूबसूरत ग्रान कनारिया द्वीप पर आनंद मनाते हुए – 25 जून 2014

नग्नता की अधिकता आपके शिश्नोत्थान को कम करती है! 6 फरवरी 2014

स्वामी बालेंदु नग्नता, नग्न समुद्री बीचों और शिश्नोत्थान के बारे में लिखते हुए समझा रहे हैं कि आखिर करोड़ों-अरबों लोगों के पास वही अवयव हैं, जो आपके पास हैं।

Continue Readingनग्नता की अधिकता आपके शिश्नोत्थान को कम करती है! 6 फरवरी 2014

बदलाव चाहते हैं तो पहले स्वयं को बदलिए – 7 नवम्बर 08

Swami Ji writes about acceptance in relationships. Do not expect your partner to change if you cannot change yourself.

Continue Readingबदलाव चाहते हैं तो पहले स्वयं को बदलिए – 7 नवम्बर 08