आयुर्वेदिक रेस्तराँ के काम की प्रगति – 22 फरवरी 2015

आज रविवार है और आज मैं अपने व्यक्तिगत जीवन में तीव्रगति से हो रही दैनिक हलचलों के बारे में आपको बताना चाहता हूँ। वास्तव में अभी, इस वक़्त दिनचर्या बड़ी व्यस्त चल रही है, बहुत सारी घटनाएँ हो रही हैं, बहुत सारे कामों को अंजाम दिया जा रहा है और मैं वाक़ई बहुत, बहुत व्यस्त हो गया हूँ और रोज़ ब रोज़ व्यस्तता बढ़ती ही जा रही है। साथ ही बड़ा मज़ा आ रहा है! कितना कुछ हो रहा है- वाह, बड़ा अच्छा लग रहा है!

स्वाभाविक ही, बहुत सी रोज़मर्रा की चीजें हैं: जैसे ईमेल, यह ब्लॉग और निश्चित ही हमारे मेहमान और उनके विश्रांति सत्र आदि। पूर्णेन्दु हमारे दो मेहमानों का गाइड बनकर बाहर निकला हुआ है। वे लोग राजस्थान गए हुए हैं-जयपुर और पुष्कर हो आए हैं और इस समय जोधपुर घूम-फिर रहे हैं और आज वहाँ रहकर कल फालोदी, जैसलमेर आदि जाएँगे, जहाँ ऊँट की सवारी करेंगे, एक दिन रेगिस्तान में बिताएँगे और उसके बाद बीकानेर होते हुए दिल्ली लौटेंगे। वह होली मनाने वापस आ जाएगा-जिसकी हम सभी यहाँ जोर-शोर से तैयारियाँ कर रहे हैं!

और फिर हमारी सबसे बड़ी परियोजना तो चल ही रही है: हमारा आयुर्वेदिक रेस्तराँ 'अम्माजी'ज़'! कुछ माह पहले मैंने उसके बारे में आपको बताया था। आम भारतीय परम्परा के अनुसार इसमें भी काफी विलम्ब हो गया। इस विषय में आप ज़्यादा कुछ कर भी नहीं सकते- आर्किटेक्ट शुरू में बनाई गई योजना से अधिक वक़्त लेता है, कोई भी निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं होता और लोग किसी काम को दस दिन में निपटाने का वादा करके अक्सर उसे बीस या तीस दिन में पूरा करते हैं!

लेकिन अब रेस्तराँ के भवन का ईंट-गारे वाला काम पूर्ण हो चुका है और उसे फर्नीचर आदि से सुसज्जित करने का काम, आतंरिक रूप-सज्जा और रेस्तराँ के आसपास की जगह को सँवारने काम किया जाना बाकी है, जिससे वह हमारी पूर्व परिकल्पना के मुताबिक एक सुन्दर और आधुनिक रेस्तराँ दिखाई दे! हमें बहुत सी बातों पर विचार-विमर्श करके निर्णय लेने हैं, बहुत से लोगों को रेस्तराँ के बारे में बताना है, कुछ लोगों से सलाह-मशविरा करना है और उन लोगों व्यापारियों, दूकानदारों से भी चर्चा करनी है, जिनसे हम भविष्य में आवश्यक सामान खरीदेंगे और सबसे बड़ी बात, इन सबको सुगठित रूप से संचालित करने का महती कार्य भी करते चलना है, जिससे हमारे बीच अच्छा तालमेल बन सके! तो यह सब बड़े और चुनौतीपूर्ण काम हैं- मगर इसमें आनंद भी बड़ा है!

हमें रसोई के लिए बहुत सारी चीज़ें खरीदनी हैं और उसके साथ ही बहुत से जर्मन मित्र, जो अगले दो महीनों में यहाँ आएँगे, पूछते रहते हैं कि वे जर्मनी से क्या लेकर आएँ, यहाँ तक कि हम खुद ही कुछ जर्मन मित्रों और परिचितों से कहते हैं कि अपनी रसोई में देखें कि उनके पास रसोई में काम आने वाली कोई चीज़ अतिरिक्त तो नहीं है या उन्हें अब उनकी ज़रूरत नहीं है। जब वे हमें किसी ऐसी चीज़ के बारे में बताते हैं तो हम उन्हें उन मित्रों का पता बता देते हैं, जो भारत आते वक़्त यह सामान अपने साथ ला सकते हैं। हमें लगता है कि यह बड़ा दुखद होगा कि कोई उपयोगी वस्तु, जो सही-सलामत है, ठीक से काम कर रही है, यूँ ही फेंक दी जाए-और इस तरह वे लोग हमारे रेस्तराँ के निर्माण में अपना योगदान देते हैं और हमारी इस परियोजना का हिस्सा बन रहे हैं!

हमें अभी भी विश्वास है कि हम अगले माह रेस्तराँ का शुभारंभ कर देंगे-लेकिन हम भारत में हैं, कुछ भी निश्चित रूप से कहना मुश्किल है!

जब वह मुबारक दिन बहुत करीब आ जाएगा, मैं आप सबको अवश्य सूचित करूँगा!

3 तरह के लोग, जो हमारे आश्रम में रहना पसंद करते हैं – 12 फरवरी 2015

कल मैंने आपको बताया था कि हमारे पास धार्मिक रुचियों वाले कई लोगों के ईमेल आते हैं, जो हमारे आश्रम आना चाहते हैं लेकिन स्वाभाविक ही उनकी धार्मिक अपेक्षाओं को पूरा करना हमारे लिए संभव नहीं होता। मैंने यह भी बताया था कि कैसे उनके ईमेल या चिट्ठियों की पंक्तियों से या उनकी भाषा से ही आप उनके सोच की दिशा और उनके इरादे भाँप सकते हैं। यह सही है कि आश्रम आने की इच्छा व्यक्त करते हुए कभी-कभी हमें ऐसे सन्देश प्राप्त होते हैं लेकिन अधिकतर संदेश ऐसे लोगों के होते हैं, जो इनसे ठीक विपरीत विचार और भावनाएँ रखते हैं।

वास्तव में दूसरी तरह के ईमेल हमारे पास ज़्यादा आते हैं। खुले तौर पर धार्मिक लोगों के अलावा, जिनके बारे में मैंने कल लिखा था, तीन तरह के लोगों से आज आपको मिलवाना चाहता हूँ, जो हमसे आश्रम के बारे में पूछताछ करते हैं।

1) सामान्य स्त्री पुरुष जो तनाव मुक्ति की खोज में यहाँ आते हैं

पहले 'वर्ग' में वही 'मुख्यधारा' के लोग होते हैं, जो कॉर्पोरेट दुनिया की तनाव और भागदौड़ वाली ज़िन्दगी से ऊबकर और अपने काम की, घर की और आम जीवन की गुमनामी से आजिज़ आकर सुकून की खोज में यहाँ आते हैं। ये लोग जीवन में अकेलापन और अवसाद महसूस करते हैं और शान्ति, तनाव मुक्ति, यहाँ तक कि अपनी शारीरिक तकलीफों के इलाज के लिए यहाँ आते हैं। वे ऐसे उपाय चाहते हैं, जिनकी सहायता से उनके विभिन्न व्यसनों, शारीरिक व्याधियों का इलाज हो सके, कुछ ऐसे व्यायाम सीख सकें, जो उन्हें उनके मौजूदा दर्द से राहत प्रदान कर सकें और भविष्य में भी उन्हें होने से रोक सके।

निश्चय ही हर तरह के लोगों के लिए हमारे दरवाज़े खुले हैं क्योंकि हम जानते हैं कि योग और आयुर्वेद विज्ञान के अंग हैं, जो न सिर्फ शारीरिक व्याधियों में बल्कि मानसिक शान्ति के लिए भी बहुत उपयोगी हैं। हमारे आश्रम में कुछ दिन ठहरकर ही उन्हें बहुत लाभ हो सकता है-और हम जीवन के हर पड़ाव पर स्थित, हर स्तर के, हर क्षेत्र में काम करने वाले और हर जगह के लोगों को मित्र बनाकर और उनके बारे में जानकर खुश होते हैं!

2) स्वास्थ्य-सचेत लोग जिन्हें अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करने की लालसा होती है

हमसे पूछताछ करने वाले दूसरे प्रकार के लोग वे होते हैं, जो अपने शरीर और इस धरती के लिए निरापद वैकल्पिक जीवन-चर्या में रुचि रखते हैं। वे निरामिष, शाकाहारी, कच्चा खाने वाले, चिकित्सक, मालिश इत्यादि और वैकल्पिक चिकित्सा में दिलचस्पी रखने वाले और ऐसे ही कई तरह के लोग होते हैं। कोई भी, जो यह जानता है कि योग और आयुर्वेद उसे एक और दृष्टिकोण, अतिरिक्त ज्ञान और बहुत सी नई टिप्स और जीवन-शैली से परिचित कराएगा, उन्हें जानने-समझने में मदद करेगा, जीवन में नए परिवर्तन लाने में सहायक होगा।

हम इन लोगों का खुले मन से, बाहें फैलाकर स्वागत करते हैं और हमारे पास जो कुछ भी है, उनके साथ साझा करके खुश होते हैं और हम खुद भी उनके ज्ञान और अनुभवों से बहुत कुछ सीखते हैं। ज्ञान का आदान-प्रदान और एक दूसरे की सहायता-शानदार!

3) भारत यात्रा का सपना देखने वाले गूढ़ और रहस्यमय हिप्पी

गूढ़ और रहस्यमय बातों में रुचि रखने वाले लोग अगले वर्ग में आते हैं। ये लोग अपने आपको आध्यात्मिक या रूहानी कहते हैं लेकिन धार्मिक कहलाना पसंद नहीं करते। जो पुरुष और महिलाएँ दर्शन-शास्त्र और एक अलग तरह की जीवन-शैली में रुचि रखते हैं, जो दूसरों से, अपने समाज से अपने आपको ‘कुछ खास और अलग’ पाते हैं और उनके साथ तालमेल नहीं बिठा पाते। अपने आपकी खोज में वे अक्सर लंबी यात्राएँ करने के लिए तैयार होते है। इस बात को समझने के लिए कि आखिर वे क्या चाहते हैं, वे कौन हैं और उन्हें कौन सी बात खुश कर सकती है। वे अपने जीवन का गहरा अर्थ खोजना चाहते हैं और उसे योग और आयुर्वेद के माध्यम से समझने की कोशिश करने के लिए तत्पर हैं।

मैं हिप्पी शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूँ लेकिन बहुत से लोग, भले ही इस वर्ग में आते हों, अपने आपको इस नाम से जोड़ना नहीं चाहेंगे और इस ओर ध्यान नहीं देंगे। मैं जानता हूँ कि इन लोगों के लिए भी हमारे दिल खुले हुए हैं और हमें इस बात की खुशी है कि अक्सर हम इन लोगों के लिए स्वर्ग साबित हो सकते हैं, ऐसी शीर्ष जगह, भारत में आने के बाद जिनके यहाँ वे निःसंकोच भ्रमण कर सकते हैं-क्योंकि अक्सर देखा यह गया है कि यह देश उनकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग सिद्ध होता है। जैसा कि मैंने कल बताया, निश्चय ही हमारे आश्रम में उन्हें एक ऐसी जगह मिल जाती हैं, जहाँ धार्मिक कट्टरता और कूपमंडूकता का कोई स्थान नहीं है। इस दीवाने मुल्क से हम धीरे-धीरे उनका परिचय करवाते हैं और अपने जीवन में उन्हें शामिल करके, अपने प्यार और जीवंतता से उन्हें अपना बनाकर, हम आशा करते हैं कि उनकी तलाश में, उनकी खोज में उनकी मदद कर सकेंगे।

आप भी अम्माजी’ज़ आयुर्वेदिक रेस्तराँ का हिस्सा बन सकते हैं – 16 अक्टूबर 2014

कल मैंने आपको अपनी एक बड़ी परियोजना के बारे में बताया था: आयुर्वेदिक रेस्तराँ, आइसक्रीम और बेकरी सहित। मैंने ज़िक्र किया था कि आयुर्वेदिक रसोई के बारे में हमारा बहुत लम्बा अनुभव रहा है और रेस्तराँ खोलने से पहले हम अपने रसोइयों को कुछ समय तक प्रशिक्षण भी देंगे कि किन बातों का विशेष ध्यान रखना है। ब्रेड और आइसक्रीम बनाने का और यहाँ तक कि पास्ता और पित्ज़ा बनाने का भी हमें काफी अनुभव है लेकिन पश्चिमी खाद्यों के बारे में हम और विस्तार से जानकारी प्राप्त करना चाहेंगे और उनकी पाक-विधियाँ सीखना चाहेंगे!

हमारे मेनू कार्ड में यूरोपीय व्यंजन होंगे यह तय है: ताज़े ब्रेड रोल से लेकर कोसोंस और पित्ज़ा और केक तक। अगर आप बेकर, आइसक्रीम विशेषज्ञ या इतालवी रसोइये हैं- या पश्चिमी निरामिष भोजन तैयार कर सकने वाले अनुभवी रसोइये हैं तो हम आपके सामने आपसी विनिमय का यह प्रस्ताव रखना चाहते हैं:

भारत में स्थित हमारे आश्रम में पधारिए और अपने ज्ञान और अनुभव को हमारे साथ साझा कीजिए! हमें और हमारे रसोइयों को, जो वैसे भी अपने क्षेत्र के पेशेवर अनुभवी विशेषज्ञ हैं, प्रशिक्षित कीजिए- और बदले में दो सप्ताह हमारे साथ आश्रम में रहिए, पूरी तरह मुफ्त!

मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे रसोइए पैनी नज़र रखते हैं और सब कुछ बहुत जल्द सीख लेंगे और आपको भी हमारे रेस्तराँ की रसोई में कुछ समय गुज़ारने पर कुछ नए गुर और पाक कला सम्बन्धी ज्ञान और अनुभव प्राप्त होगा।

जबकि यह प्रस्ताव आज से ही लागू हो गया है, हम भविष्य में कुछ आगे का भी विचार कर रहे है, जिसमें हम एक और प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं, इस विश्वास के साथ कि आगे चलकर जल्द ही हम अल्प बजट वाले विदेशी पर्यटकों के बीच पर्याप्त लोकप्रिय हो चुके होंगे: जब हमारा रेस्तराँ शुरू हो जाएगा, वहाँ व्यंजन बनाने से पहले की तैयारियाँ, साफ़-सफाई आदि जैसे बहुत से कामों को निपटाने वालों तथा पुरुष और महिला वेटर के रूप में काम करने वालों की हमें ज़रुरत होगी।

हमें अभी से बहुत से ऐसे लोगों के आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिनके पास यात्रा का बड़ा बजट नहीं है और जो यहाँ रहकर कोई काम करना चाहते हैं। वर्त्तमान में हम सिर्फ कम्प्यूटर के काम का प्रस्ताव ही सामने रख पा रहे हैं और यह काम हर कोई नहीं कर सकता! परन्तु जैसे ही हमारा रेस्तराँ खुल जाएगा, हम यह प्रस्ताव बहुत से दूसरे लोगों के सामने भी रख सकेंगे!

अर्थात, चाहे आप विशेषज्ञ रसोइए के रूप में अपना ज्ञान साझा करना चाहते हों या रेस्तराँ के दूसरे कामों हेतु अपनी सेवाएँ प्रदान करना चाहते हों, आपके आवेदन प्राप्त करके हमें ख़ुशी होगी! बस, संक्षेप में अपने विषय में जानकारी देते हुए हमें इस पते पर ईमेल कीजिए: [email protected] और हम आपका यहाँ स्वागत करने के लिए तैयार बैठे हैं!

निश्चय ही, अगर आप इन पंक्तियों को पढ़ रहे हैं और आपको पश्चिमी भोजन बना सकने वाले या बेकिंग कर सकने वाले किसी पेशेवर रसोइए की जानकारी है, जो भारत आकर हमारे साथ रहने का इच्छुक हो तो कृपया इस ब्लॉग की लिंक उन्हें भेज दें!

अम्माजी’ज़ रेस्तराँ की इमारत के निर्माण की प्रगति संबंधी फोटो आप यहाँ देख सकते हैं

आयुर्वेदिक रेस्तराँ की परियोजना का स्वप्न साकार होना – 15 अक्टूबर 2014

कल मैंने अपने जीवन की सबसे बड़ी परियोजना का ज़िक्र किया था: हम "अम्माजी' के नाम से आयुर्वेदिक रेस्तराँ" का निर्माण कर रहे हैं।

"अम्माजी'ज़ आयुर्वेदिक रेस्तराँ"

जी हाँ, आप ठीक पढ़ रहे हैं। हम एक रेस्तराँ खोलने जा रहे हैं। इस साल की शुरुआत में, 15 फरवरी 2014 के दिन हमने आश्रम परिसर में, मुख्य द्वार से सटकर सड़क के किनारे, जिससे सड़क से गुज़रने वाला हर व्यक्ति उसे देख सके, एक और इमारत का निर्माण शुरू किया है। और वहाँ से आजकल बड़ी संख्या में लोग गुज़रते हैं क्योंकि दिल्ली और आगरा के बीच एक नए हाइ-वे का निर्माण पूरा हो चुका है, जिसे यमुना एक्सप्रेस-वे कहा जाता है और जिसकी एक शाखा वृन्दावन से होते हुए निकलती है। हमारे लिए ख़ुशी की बात यह है कि हाइ-वे की यह शाखा हमारे आश्रम-द्वार के ठीक सामने से गुज़रती है! एक साल से हम सपना देख रहे थे कि एक रेस्तराँ खोला जाए और अब वह सपना साकार होने जा रहा है।

इमारत लगभग पूरी हो चुकी है, अंदरूनी हिस्से की सजावट (इंटीरियर डेकोरेशन) का काम चल रहा है और नीचे दिए गए चित्र में आप रसोई के साज़ो सामान की पहली खेप के रूप में एक बड़ा सा ओवन देख रहे हैं, जो जन्मदिन के उपहार के रूप में अपने कुछ मित्रों की ओर से कल ही मुझे प्राप्त हुआ है! आशा है कि इस साल के अंत तक निर्माण-कार्य संपन्न हो चुका होगा और अगले साल की शुरुआत से हम अपने मेहमानों का रेस्तराँ में स्वागत कर सकेंगे!

हमारे मेहमानों को कुछ नया और अनोखा देखने को मिलेगा: यह एक आयुर्वेदिक रेस्तराँ होगा जहाँ उन्हें सामान्य भोजन के साथ ही ऑर्गेनिक (जैविक) भोजन भी उपलब्ध होगा और वे दोनों में से किसी का भी चुनाव कर पाएँगे। यूरोप में लोग इस विषय में अधिकाधिक जागरूक होते जा रहे हैं कि वे अपने भोजन में क्या ग्रहण कर रहे हैं और अब ऑर्गेनिक खाद्यों का इस्तेमाल महज फैशन नहीं रह गया है बल्कि भोजन में उसका समावेश करने वालों की संख्या लगातार बढती जा रही है! इसके विपरीत, भारत में स्थिति बहुत बुरी है: खाद्य सामग्रियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में रसायनों का उपयोग किया जाता है और सब्जियों के आकार और वज़न में रातोंरात वृद्धि करने के लिए ओक्सिटोसिन के इंजेक्शन का प्रयोग किया जाता है और इन रसायनों और रासायनिक खादों के दुष्परिणामों के समाचार और आलेख रोजाना अखबारों की सुर्खियाँ बनते रहते हैं। यह अब एक सामान्य बात हो गई है और हमने निर्णय किया है कि हम अपने मेहमानों को अपने रेस्तराँ में कुछ अलग चुनने की आज़ादी प्रदान करेंगे: कीटनाशक और हार्मोन रहित खाद्य सामग्री का चुनाव करने की आज़ादी!

लेकिन ऑर्गेनिक आहार सामग्रियाँ उपलब्ध करवाने के साथ ही हम लोगों को आयुर्वेद के नजदीक भी लेकर आना चाहते हैं और यह दिखाना चाहते हैं कि सिर्फ उचित खान-पान से ही किस तरह आप न सिर्फ अपने आपको स्वस्थ रख सकते हैं बल्कि स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत सी परेशानियों से बच सकते हैं और कुछ बीमारियों का इलाज भी कर सकते हैं। हमारे आयुर्वेदिक रेस्तराँ में आप ऑर्गेनिक आहार तो प्राप्त कर ही सकेंगे मगर इसके अतिरिक्त हम आपको बताएँगे कि किस तरह का भोजन आपके शरीर की बनावट और प्रकृति के लिए उपयुक्त होगा। वात, पित्त और कफ का शमन करने वाले खाद्यों का प्रयोग भी आप कर सकेंगे या फिर आप इन दोषों को नियंत्रण में रखने हेतु एक संतुलित आहार का चुनाव भी कर सकते हैं।

पिछले कई सालों से हम आयुर्वेद पर काम कर रहे हैं, अपनी रसोई में विभिन्न जड़ी-बूटियों, मसालों और अन्य भोजन सामग्रियों पर प्रयोग करते हुए उनके असरात का अध्ययन कर रहे हैं। हम दुनिया भर में आयुर्वेदिक व्यंजन-विधियों पर कार्यशालाएँ आयोजित करते रहे हैं और अपने आश्रम में आयुर्वेदिक रसोई शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाते रहे हैं। आम तौर पर यशेंदु उन कार्यक्रमों का कर्ताधर्ता होता है और उसकी अनुपस्थिति में या जब वह अत्यधिक व्यस्त होता है, मैं खुद यह काम संभालता हूँ। हर शनिवार आप यहाँ, मेरे ब्लॉग में विभिन्न व्यंजन तैयार करने की हमारी विधियों को पढ़ते ही रहते हैं। इस तरह हमारे पास आयुर्वेदिक ज्ञान और अनुभव का बहुत बड़ा ज़खीरा उपलब्ध है, जिसे हम अपने रेस्तराँ में इस्तेमाल करने का इरादा रखते हैं और इस दिशा में मैंने यशेंदु और पूर्णेंदु के साथ मिलकर काफी काम पहले से ही शुरू कर दिया है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए मैं स्वयं रेस्तराँ के निर्माण की प्रक्रिया में शामिल रहा हूँ, हम लोग अलग-अलग समूहों में दिल्ली जाकर विभिन्न उपकरण और दूसरे सामान मँगवाते रहे हैं और हम तीनों के अलावा रमोना, मेरे पिता और कई मित्रों के बीच इस विषय पर गहन चर्चा और चिंतन-मनन होता रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बहुत से नए विचार सामने आए हैं, जिनका हम भविष्य में उपयोग करेंगे।

इसके अतिरिक्त, अगर जन्मदिन पर मुझे प्राप्त उपहारों की बात करें तो, हम अपने आपको सिर्फ भारतीय भोजन तक सीमित नहीं कर रहे हैं। जी नहीं, अम्माजी’ज़ आयुर्वेदिक रेस्तराँ में विभिन्न पाक-शैलियों का समन्वय किया जाएगा, जिसमें उत्तर और दक्षिण भारतीय और यूरोपीय व्यंजनों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा दो और खास प्रस्तुतियाँ भी होंगी: जर्मन बेकरी और इटालियन आइसक्रीम पार्लर!

अंत में यह कि जैसा कि हम जानते हैं इस इलाके में बच्चों के खेलने की ऐसी कोई जगह नहीं है; कोई पार्क नहीं, कोई खुला मैदान नहीं, जहाँ वे सुरक्षित रूप से खेल सकें। इस तरह वे खेल सकते हैं तो सिर्फ घर में। हमने अपने आश्रम में सामने की तरफ, रेस्तराँ से लगी हुई बच्चों के खेलने की जगह बनाई है, जहाँ रेत बिछाकर झूले, फिसलपट्टियाँ और कुछ दूसरे खेल-कूद के उपकरण लगवाएंगे, जहाँ बच्चे मज़े में खेलते रह सकते हैं जबकि उनके अभिभावक लंच या डिनर लेते हुए निश्चिंत होकर गप-शप और आपसी चर्चा कर सकते हैं!

आज पहली बार हमने अपने रेस्तराँ के आगामी कुछ महीनों में होने वाले शुभारंभ की सार्वजनिक घोषणा की है। पहले दिन से ही हम अपनी एक और वैबसाइट www.ammajis.com पर रेस्तराँ के निर्माण में हो रही प्रगति के फोटो अपलोड कर रहे हैं। हमने एक फेसबुक पेज भी बनाया है और अगले कुछ महीनों में होर्डिंग्ज, पोस्टर्स, पैम्फलेट्स और परिचय पुस्तिकाओं के जरिये हम इसका विज्ञापन और प्रचार भी करने जा रहे हैं।

इस तरह हमारा यह सपना जल्द ही साकार होने जा रहा है। यह बताना आवश्यक नहीं कि हमने रसोई में जो कुछ भी सीखा है, अपनी माँ से सीखा है, जिन्हें हम अम्माजी कहा करते थे और जो दो साल पहले सदा-सदा के लिए हमें छोडकर चली गईं थीं। इसीलिए उनकी याद में हमने रेस्तराँ का नामकरण किया है: “अम्माजी’ज़”-भोजन, जो सिर्फ आपकी माँ बना सकती है।

आयुर्वेद संबंधी हमारी कार्यशालाओं में अदृश्य शक्तियों से सम्बंधित कोई काम नहीं होता – 29 सितंबर 2014

हमने हाल ही में अपना आयुर्वेदिक मालिश प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। वह काफी सफल रहा, सहभागियों ने बहुत कुछ सीखा और हम अपने ज्ञान को और सबसे बढ़कर, आयुर्वेदिक मालिश और उपचार के अपने सालों के अनुभव को दूसरों के साथ साझा करके बहुत खुश हुए। लेकिन एक बिंदु था, जिसमें हमें असुविधा महसूस हुई: जब सहभागियों ने हमसे इन मालिशों के अलौकिक शक्तियों से सम्बंधित पहलुओं को जानना चाहा।

आयुर्वेद का शब्दशः अर्थ है जीवन का विज्ञान। आयुर्वेद विश्रांति सत्रों में हम आपकी शारीरिक और मानसिक समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करते हैं और उन्हें आराम पहुँचाने की या संभव हो तो उनका उपचार करने की कोशिश करते हैं। मालिश शरीर को आराम पहुँचाती है और उससे आपके मस्तिष्क को भी आराम मिलता है। पीठ, कंधे, घुटने और शरीर के दूसरे अंगों में होने वाले दर्द के लिए उपचार उपलब्ध हैं। तनाव, अवसाद और अनिद्रा रोग का इलाज भी संभव है।

लेकिन हम मायावी ताकतों जैसा कोई काम नहीं करते।

वास्तव में हम इस प्रकार की किन्हीं अदृश्य शक्तियों जैसी किसी चीज़ पर विश्वास ही नहीं करते! हम जानते हैं कि कुछ लोग इस विज्ञान को, जिसका शरीर पर एक परिमेय, वास्तविक असर होता है, अदृश्य शक्ति जैसी चीज़ से, जिसे छुआ नहीं जा सकता, जिसे नापा नहीं जा सकता और न ही जिसकी कोई व्याख्या की जा सकती है, जोड़ने की कोशिश करते हैं। जिसके बारे में यह भी कहा जा सकता है कि उसका अस्तित्व ही नहीं है। मैं यह भी जानता हूँ कि मालिश से इलाज करने वाले (massage therapists), अपने धार्मिक विश्वासों के चलते इस तरह मालिश करते हैं, जो पूरी तरह अंधविश्वास से भरी हुई प्रतीत होती है: जैसे वे पूजा की वेदी पर मोमबत्ती जलाते हैं, वे उस टेबल को हाथों और अपने सिर से छूकर प्रार्थना करते हैं- शायद मदद हेतु या मरीज के इलाज हेतु या पता नहीं किसलिए। हम इस तरह का कोई कर्मकांड नहीं करते।

धार्मिक उपचारकों के इन कामों से और बहुत हद तक धार्मिक आयुर्वेद शिक्षकों के व्याख्यानों के कारण भी ऐसे व्यक्ति को, जो आयुर्वेद से जुड़ा हुआ नहीं है, यह गलतफहमी हो सकती है कि यह सब भी आयुर्वेद के हिस्से हैं, कि आयुर्वेद का संबंध ऊर्जा से भी है। लेकिन यह मूलतः ऐसा विज्ञान है, जिसका असर प्रमाणित किया जा सकता है।

एक्यूप्रेशर पॉइंट्स आप स्वयं दबाते हें, खिंची हुई मांसपेशियों पर आप स्वयं अपने हाथ फेरते हैं और आप खुद ही जानते हैं कि तकलीफदेह जोड़ों पर किस तरह हाथ चलाया जाए! स्वाभाविक ही आप सामने वाले की मदद कर रहे होते हैं, स्वाभाविक ही वहाँ एक शांत वातावरण होता है और एक भीतरी नीरवता का एहसास होता है, जो आपको अपना काम बेहतर तरीके से अंजाम देने में मदद करता है। हमारा विचार है कि यह सब आपसे संबन्धित है, आपकी भीतरी स्थिति और आपके काम से संबन्धित है न कि किसी बाहरी शक्ति से। इसके मनोवैज्ञानिक असर के अलावा हम नहीं मानते कि वे सब धार्मिक और अंधविश्वास से पूर्ण कर्मकांड आपके लिए या आपके सामने पड़े व्यक्ति के लिए किसी भी तरह उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

यह स्पष्ट है कि अगर आप यह अपेक्षा करते हैं कि हमारी प्रशिक्षण कार्यशालाओं में ये सब चीज़ें सिखाई जाएँगी तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी। हम आपको किसी भी तरह का अनुष्ठान, कर्मकांड या पूजा करने का तरीका नहीं बता सकते और न ही किसी बाहरी उपचारक शक्ति से प्रार्थना ही कर सकते हैं कि वह आकर आपके सामने पड़े व्यक्ति का इलाज कर दे। आप खुद यह सब करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन हम यह सब आपको सिखाने में असमर्थ हैं। सिर्फ इसलिए कि हमारा इन चीजों में विश्वास ही नहीं है।

हमारे सहभागी आश्रम से आयुर्वेदिक मालिश के ज्ञान और अभ्यास का प्रशिक्षण लेकर प्रसन्नचित्त और संतुष्ट होकर ही वापस लौटे। संभव है वे ऊर्जा संबंधी बिन्दुओं को न समझ पाए हों मगर हम इस संबंध में अपना दृष्टिकोण उनके सामने रखने में सफल हुए। लेकिन इस घटना से हमें एक बात समझ में आई और वह यह कि हमें अपनी वेबसाइट पर यह नोट लगाना चाहिए कि हमारे कार्यक्रमों और कार्यशालाओं में अदृश्य शक्तियों संबंधी कोई बात शामिल नहीं होती। बिल्कुल भी नहीं। इससे हमें प्रशिक्षण हेतु उपयुक्त व्यक्तियों का चुनाव करने में मदद मिलेगी और उन्हें भी यहाँ आकार निराशा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

विशेष छूट: सभी विश्रांति कार्यक्रमों पर 20% की छूट! 31 जुलाई 2014

आज हमने एक आकर्षक पेशकश के बारे में सूचना-पत्र जारी किया है, जिसे आपके साथ यहाँ साझा करते हुए मुझे बड़ी प्रसन्नता हो रही है:

हमारे सभी विश्रांति कार्यक्रमों में 20% की छूट!

जैसा कि किसी भी विशेष प्रस्ताव के साथ होता है, इस पेशकश के साथ भी कुछ नियम और शर्तें रखी गई हैं। लेकिन वे बहुत स्पष्ट हैं, उनमें कोई झमेला नहीं है: 20% की इस छूट का लाभ प्राप्त करने के लिए आपको 1 अगस्त से 31 अगस्त 2014 से पहले कुल खर्च की 80% पूरी रकम अग्रिम जमा करते हुए विश्रांति-स्थलों की बुकिंग करनी होगी। उसके बाद अपने पसंदीदा कार्यक्रम में आप 31 दिसंबर 2015 से पहले कभी भी आ सकते हैं।

तो अपने आयुर्वेद और योग विश्रांति-स्थलों की बुकिंग हेतु 50% अग्रिम जमा करके बाद में यात्रा से चार सप्ताह पहले 50% बकाया खर्च जमा करने की जगह अब आपको कुल मिलाकर लागत का सिर्फ 80% एकमुश्त जमा कराना होगा!

मुझे लगता है, यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए ज़्यादा उपयोगी होगी, जो अक्टूबर या नवम्बर की छुट्टियों में हमारे लोकप्रिय आयुर्वेदिक या योग सत्रों में शामिल होना चाहते हैं! और उनके लिए भी, जो साल के सबसे बेहतरीन मौके पर हमारे विश्रांति-स्थलों पर आयोजित वज़न कम करने की आयुर्वेदिक और योग कार्यशालाओं में सहभागी होना चाहते हैं। वे सभी लोग, जो इन विश्रांति-स्थलों की बुकिंग करना चाहते हैं उनके लिए पैसे की बचत का यह एक सुनहरा मौका है-अभी और इसी वक़्त!

स्वाभाविक ही हमारे और भी कई विश्रांति कार्यक्रम हैं- जैसे हमारे सभी योग-विश्रांति कार्यक्रम, जो विभिन्न विषयों पर केन्द्रित होते हैं या हमारा आयुर्वेदिक खाद्य-विश्रांति-कार्यक्रम। यहाँ तक कि 2015 में आयोजित होने वाला होली उत्सव भी इसी प्रस्ताव योजना में सम्मिलित है!

आपमें से वे सभी लोग जो भारत आकर हमारे आश्रम का दौरा करना चाहते हैं, योग का आनंद लेना चाहते है या आयुर्वेद के विभिन्न प्रयोगों का लाभ उठाना चाहते हैं-जल्दी करें, तुरंत बुकिंग कराएँ और अपनी इरादे को कामयाब बनाएँ!

हम आशा करते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग हमारे इस विशेष छूट प्रस्ताव का लाभ उठाएँगे!

अब जबकि मैंने आप सबको हमारे प्यारे शहर वृन्दावन में आने का इच्छुक बना दिया है, मैं उस ज्वलंत प्रश्न का उत्तर देना चाहता हूँ, जो इस वक़्त आपके मन में आ रहा होगा: हमारे इन विश्रांति-स्थलों के खर्च में हम इतनी आकर्षक छूट कैसे दे पा रहे हैं जबकि ये लोकप्रिय विश्रांति-कार्यक्रम वैसे ही अच्छे चल रहे हैं?

सब कुछ न बताते हुए मैं आपको संक्षेप में बताता हूँ-हम एक शानदार परियोजना पर काम कर रहे हैं और अगर इस समय कुछ अतिरिक्त बुकिंग हो जाती हैं तो हमारे इस प्रकल्प का कार्य सुचारू रूप से और अधिक तेज़ी के साथ चल निकलेगा-और फिर आपके सामने होगा एक और खुशनुमा आश्चर्य! तो हमारे विश्रांति-स्थलों की यात्रा के खर्च में एक पंचमांश की छूट की हमारी इस प्रस्ताव-योजना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ और इंतज़ार करें, आपके सामने आने वाले एक विस्मयकारी तोहफे का! और हाँ, अगर आप इससे पहले हमारे आश्रम आते हैं तो मेरे बताने से पहले ही यह रहस्य खुल जाएगा क्योंकि तोहफा पहले ही आपकी आँखों के सामने होगा!

भारत में जल्द ही आपसे मुलाक़ात की आशा है!

गर्मागर्म आयुर्वेदिक नींबू-चाय बनाने की विधि-शीत-ऋतु में सर्दी, खांसी और गले की तकलीफ में लाभप्रद-30 नवंबर 2013

शीतऋतु की शुरुआत हो चुकी है और शामें अब काफी ठंडी हो जाती हैं इसलिए हमने शाम के वक़्त एक विशेष गर्म चाय पीना शुरू कर दिया है। दरअसल एक आयुर्वेदिक काढ़ा तो हम पीते ही हैं, जिसे तैयार करने की विधि हमने दो साल पहले पाठकों को बताई थी और जो काफी लोकप्रिय भी हुई थी। लेकिन परिवर्तन के लिए हम उसी का एक हल्का स्वरूप भी उपयोग में लाते हैं, जो नींबू युक्त है। इसके अलावा यह ऊष्मा भी प्रदान करता है और मौसमी सर्दी, खांसी और गले के प्रदाह में भी आराम पहुंचाता है।

गर्मागर्म आयुर्वेदिक नींबू-चाय – शीत-ऋतु में सर्दी, खांसी और गले की तकलीफ में लाभप्रद

अपनी सर्दी, खांसी, गले की खराश और दूसरी तकलीफ़ों के इलाज के लिए घर में खुद यह गर्म नींबू-चाय बनाएँ! आयुर्वेदिक, स्वास्थ्यकर और स्वादिष्ट! ऊपर से विटामिन सी युक्त!

गर्मागर्म आयुर्वेदिक नींबू-चाय तैयार करने में कितना वक़्त लगता है?

तैयारी करने में:
पकाने में:
कुल समय:

सामग्री

3 कप पानी
1चकरी का फूल (स्टार एनिस)
1 मध्यम आकार का दालचीनी का टुकड़ा
1 तीन सेंटीमीटर लंबा अदरक का टुकड़ा
1/2 टेबल स्पून हल्दी या सूखी खड़ी हल्दी (एक टुकड़ा)
1 टुकड़ा जावित्री
3 साबुत लौंग
1 नींबू
स्वाद के अनुसार शहद

गर्मागर्म आयुर्वेदिक नींबू-चाय कैसे बनाएँ?

आपको सिर्फ अदरक के साथ थोड़ी सी तैयारी करनी होगी। अदरक के कुछ टुकड़े कर लें। एक बर्तन में पानी लेकर उसमें ऊपर लिखे मसाले जस के तस डाल दें और बर्तन पर ढक्कन रखकर उसे जलते स्टोव पर उबलने के लिए रख दें। सात मिनट तक इस मिश्रण को उबलने दें।

इस बीच नींबू का रस निकाल लें। सात मिनट बाद बर्तन उतारकर उस मिश्रण में नींबू का रस मिला दें। उबलते मिश्रण में नींबू न मिलाएँ। नींबू बड़े और छोटे आकार के हो सकते हैं और आप कितना खट्टा पसंद करते हैं आपके स्वाद पर निर्भर करता है। इसलिए नींबू डालकर अपनी पसंद के अनुसार चाय का खट्टापन जांच लें।

अब एक छन्नी लेकर चाय छान लें, जिससे सारे मसालों के अंश छनकर अलग हो जाएँ। आप यह भी कर सकते हैं कि उन्हें एक काँच के बर्तन में वैसा ही छोड़ दें-वे काँच के बर्तन में देखने में सुंदर लगते हैं-और सीधे चाय के कप में ही पीते वक़्त छान लें।

कप में चाय लेकर अपने स्वाद के अनुसार शहद मिला सकते हैं।

आयुर्वेदिक लाभ

गर्म नींबू-चाय में शीतकाल में ऊष्मा पहुँचाने वाले हर तरह के मसाले और पित्त बढ़ाने वाले ‘गर्म’ तासीर युक्त अवयव हैं। लेकिन साथ ही ये आपके कफ को कम करते हैं, गले से होकर गुजरने पर ये उसे पतला (और ढीला) करते हैं, जिससे सांस लेने में होने वाली तकलीफ और खराश दूर होती है। उसमें उपस्थित नींबू आपको विटामिन सी प्रदान करता है, जो आपके रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत बनाता है, जिससे छींकें और नाक बहना जैसी शिकायतें दूर हो जाती हैं। गर्म होने के कारण इसे पीने पर गले की अंदरूनी सिंकाई हो जाती है और गले के प्रदाह में आराम पहुंचता है। शहद डालकर पीने पर वह आसानी से गले के नीचे उतर जाता है!

बदलाव चाहते हैं तो पहले स्वयं को बदलिए – 7 नवम्बर 08

किसी भी रिश्ते में स्वीकारभाव का होना बहुत जरूरी है। यदि हम दूसरों को जस का तस स्वीकार नहीं कर सकते तो हम किसी के साथ भी एक सफल रिश्ता नहीं बना सकते। अगर हम हर वक़्त किसी को बदलने की ज़द्दोज़हद में लगे रहते हैं और चाहते हैं कि वह हमारे मनमुताबिक बदल जाए, तो यह निश्चित है कि इस कोशिश में हमें ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचेगा। आखिर हम दूसरे को बदलना क्यों चाहते हैं? हम खुद को क्यों नहीं बदल सकते? और अग़र यदि आप स्वयं को ही नहीं बदल सकते तो दूसरे में बदलाव की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? यदि आप वास्तव में परिवर्तन चाहते हैं तो सबसे पहले अपने भीतर झांककर देखें और यह जानने की कोशिश करें जो आप साथी से चाहते हैं क्या वह सब आप स्वयं कर पाए हैं। यदि नहीं, तो सबसे पहले स्वयं को बदलें। असल में होता यह है कि लोग दूसरों को बदलना चाहते हैं और शायद इसके ज़रिए समाज को और यहां तक कि सारी व्यवस्था को बदलने का मंसूबा रखते हैं। परंतु भरसक कोशिश करने के बावजूद वे इसमें सफल नहीं हो पाते। वे सफल हो भी नहीं सकते क्योंकि दूसरों को जो शिक्षा वे देते हैं उसका स्वयं पालन नहीं करते। लेकिन यदि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को बदलने की कोशिश करे तो चीज़ें अवश्य बदल सकती हैं।

रिश्ता सफल होता है समर्पण से, अहम या उम्मीदों से नहीं। उम्मीदों को पीछे छोड़ना होगा और साथी को स्वीकार करना होगा, उसका आदर करना होगा। मैं एक बार फिर कहना चाहूंगा कि यदि प्रेमसंबंध में आप स्वीकारभाव, आदर और प्यार चाहते हैं तो निश्चय ही पहले स्वयं को स्वीकार, आदर और प्यार करना होगा।

आज अक्षय नवमी है। इस दिन लोग यहाँ आंवला के वॄक्ष की पूजा करते हैं। कई आयुर्वेदिक औषधियों में आंवले का प्रयोग किया जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। यह पाचन के लिए अच्छा होता है और आपको युवा बनाए रखता है। एंटी – एजिंग लोशनों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद कहता है आंवला ‘अमृत‘ है। कभी भी और किसी भी रूप में इसका सेवन करना फायदेमंद होता है। यह सदैव आपके लिए गुणकारी है। मैं इस तरह की परंपराओं को पसंद करता हूं जो हमें प्रकृति के नज़दीक ले जाती हैं।