अपने शरीर से प्रेम का अर्थ यह नहीं है कि खा-खाकर मोटे हो जाएँ और यह भी नहीं कि भूखे मर जाएँ! 20 अगस्त 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि अपने शरीर से असंतुष्ट होने पर लोग दो तरह का व्यवहार करते हैं: या तो वे खाना खाना छोड़ देते हैं और बहुत अधिक व्यायाम करने लगते हैं या फिर अपने शरीर के प्रेम में, जैसा है, उसे अपनी नियति मान लेते हैं वे दोनों बातों को उचित नहीं समझते। क्यों? यहाँ पढिए!

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अंधविश्वासियों की किस्में – 4: भारत के लोकप्रिय क्रिकेटर और अन्य खिलाड़ी – 14 मार्च 13

स्वामी बालेंदु अंधविश्वासियों की एक और किस्म का वर्णन करते हैं। ये वो खिलाड़ी हैं जो जूते, दस्ताने या रुमाल को अपनी सफलता का रहस्य मानते हैं।

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