स्त्रियाँ और पुरुष, दोनों रोज़गार करते हैं मगर घर के कामों की ज़िम्मेदारी सिर्फ स्त्रियों की ही होती है – 10 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे लैंगिक भूमिकाओं को स्त्रियाँ और पुरुष, दोनों ज़िंदा रखे हुए हैं। जैसे, घर के कामों का सारा बोझ स्त्री उठाती है और पुरुष को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और वह मदद के लिए सामने नहीं आता!

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जी नहीं, घर की सफाई करना सिर्फ स्त्रियों का काम ही नहीं है! 9 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस प्रकार परंपरागत लैंगिक भूमिकाएँ आज भी सिर्फ भारत में ही नहीं, पश्चिम में भी समस्याएँ बनी हुई हैं। यहाँ पढिए, कौन से काम पुरुषोचित हैं और कौन से स्त्रियोचित, इस विषय में लोगों की प्रचलित धारणाओं के बारे में!

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हम इतने नकारात्मक हैं कि हमें हर जगह लिंगभेद और दूसरी बुराइयाँ दिखाई देती हैं – 25 अक्टूबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने फोटो पर आई कुछ नकारात्मक टिप्पणियों के बारे में लिख रहे हैं-टिप्पणियाँ न सिर्फ चर्चा के विषय से कोसों दूर थीं बल्कि उस व्यक्ति की आलोचना कर रही थीं जो वहाँ मौजूद तक नहीं था!

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महिलाओं की यौन इच्छाओं से पुरुषों की सुरक्षा करना – लैंगिक समानता की दिशा में एक और तर्क – 7 मई 2015

स्वामी बालेन्दु लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध आवाज़ उठा रहे हैं: कोई यह क्यों नहीं पूछता कि वास्तव में पुरुष यौन सम्बन्ध स्थापित करना चाहता है या नहीं?

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विश्वास और प्रेम की अनुभूति – 15 फरवरी 2015

स्वामी बालेंदु प्रेम, विश्वास और खुद अपने सम्बन्धों के बारे में लिखते हुए पुरुषों और स्त्रियॉं, दोनों में मौजूद आदिम एहसासों और उनमें पाई जाने वाली संरक्षण देने और संरक्षण पाने की प्रवृत्तियों के बारे में लिख रहे हैं।

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पढ़े-लिखे उच्च वर्ग में भी लड़की के जन्म पर निराशा व्यक्त की जाती है! 14 जनवरी 2015

स्वामी बालेंदु भारत की एक बहुत बड़ी समस्या का वर्णन कर रहे हैं: बहुत सी महिलाएँ लड़के की जगह लड़की को जन्म देकर बहुत निराश हो जाती हैं!

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प्रबंधन के क्षेत्र में ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएँ होनी चाहिए! 8 मई 2014

स्वामी बालेन्दु यह समझा रहे हैं कि यदि महिला प्रबंधकों की संख्या अधिक हो तो बहुत सी समस्याओं का अंत हो सकता है!

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