धर्म के कपटपूर्ण संसार में दो तरह के लोग रहते हैं – 11 जून 2015

स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो धर्म द्वारा निर्मित भ्रमजाल में निवास करते हैं-या तो अंधी भेंड की तरह, सिर्फ दूसरों के आदेश का आँख मूंदकर पालन करते हुए या फिर पाखंडी, जो जानते तो हैं कि यह गलत है, फिर भी उसी नकली दुनिया में रहे आते हैं।

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क्या वास्तव में आप काल्पनिक संसार को वास्तविक संसार से अधिक वरीयता देते हैं? 18 सितम्बर 2014

स्वामी बालेन्दु टीवी देखने के विरुद्ध कुछ और तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं। वे क्यों सोचते हैं कि टीवी लोगों को आभासी दुनिया में रहने को प्रेरित करता है, यहाँ पढिए।

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आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए फंदा: अस्तित्वहीन की खोज का अंतहीन सिलसिला – 30 जुलाई 2014

स्वामी बालेन्दु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो गुरुओं, धर्मों और स्वामियों के चंगुल में फँस गए हैं: इन लोगों को उस वस्तु की खोज करने के लिए उद्यत किया जाता है जिसे वे कभी पा नहीं सकेंगे।

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महज भ्रम बनाए रखने के लिए दुखद सम्बन्ध को न ढोएँ – 16 जून 2014

स्वामी बालेंदु लोगों से कह रहे हैं कि दुख को यूं ही स्वीकार न करें बल्कि उसे समाप्त करने के लिए कुछ करें, यहाँ तक कि यदि अपने साथी के साथ संबंध तोड़ना पड़े तो अपनी खुशी के लिए वह भी करें!

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कभी ईश्वर का अनुभव नहीं किया? कोई बात नहीं, ऐसे आप अकेले नहीं हैं! – 6 जून 2013

स्वामी बालेंदु ईश्वर के अहसास या अनुभूति के बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि उन्हें कभी ईश्वर की अनुभूति नहीं हुई और यही बात उनके ईश्वर पर विश्वास न करने का कारण है।

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